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मतदान से ठीक पहले ईरान पर हमला
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान से पहले ईरान के केशम द्वीप पर कई धमाकों की खबर सामने आई है। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों में इन्हें अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जोड़ा गया है। समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में कुछ ईरानी ठिकानों पर सीमित रक्षात्मक हमले किए गए। हालांकि, निशाना बनाए गए सभी स्थानों, नुकसान और हताहतों का विस्तृत आधिकारिक विवरण तत्काल उपलब्ध नहीं था। यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच समझौते की कोशिशों के दौरान सामने आया है।
रॉयटर्स ने वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि अमेरिका ने केशम द्वीप पर हमला किया। अखबार ने अपनी जानकारी का आधार अमेरिकी अधिकारियों को बताया। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के सप्ताहों में वाशिंगटन की ओर से सीमित स्तर की कार्रवाइयां की गई हैं। इन्हें छोटे पैमाने पर रखने और सार्वजनिक रूप से अधिक प्रचारित नहीं करने की बात कही गई, ताकि व्यापक सैन्य अभियान दोबारा शुरू होने का संकेत न जाए। रॉयटर्स की शुरुआती रिपोर्ट पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड की तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली थी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने केशम द्वीप पर पांच धमाकों की सूचना दी। इसके अलावा अर्धसरकारी फार्स समाचार एजेंसी ने होर्मोजगान प्रांत के तटीय शहर बंदर लेंगेह में समुद्र की दिशा से विस्फोटों की आवाज सुनाई देने की जानकारी दी। शुरुआती ईरानी रिपोर्टों में धमाकों के कारण स्पष्ट नहीं किए गए थे। किसी निश्चित सैन्य परिसर के नष्ट होने या लोगों के मारे जाने का ब्योरा भी नहीं दिया गया। इसलिए विस्फोटों की सूचना और उनके लिए जिम्मेदार पक्ष से संबंधित रिपोर्टों को अलग-अलग संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
एसोसिएटेड प्रेस से बात करने वाले अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया कि कार्रवाई उन ईरानी संसाधनों के खिलाफ हुई, जिनसे अमेरिकी परिसंपत्तियों पर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था। अधिकारी ने नाम सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर जानकारी दी। इस विवरण में कार्रवाई को सीमित बताया गया है। इससे फिलहाल पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध की औपचारिक वापसी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। दूसरी ओर, ईरान में हुए विस्फोटों से सैन्य तनाव कम होने की उम्मीदों को लेकर नए सवाल उठे हैं।
इन खबरों से कुछ घंटे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की संभावना जताई थी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर कहा कि ईरान जल्द समाधान चाहता है और समझौता हो सकता है। यह बयान बताता है कि सैन्य दबाव की खबरों के बीच बातचीत का रास्ता भी खुला हुआ है। हालांकि, किसी समझौते की अंतिम शर्तों या उसके लागू होने की तारीख की घोषणा नहीं की गई। ट्रंप की टिप्पणी को संभावित प्रगति का संकेत माना जा सकता है, अंतिम सहमति का प्रमाण नहीं। इससे पहले आठ अक्टूबर को ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका तीन नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। उस समय उन्होंने तेहरान के साथ बातचीत को उपयोगी बताया था। ऐसे में चुनाव की पूर्व संध्या पर सैन्य कार्रवाई की रिपोर्ट उनके पुराने बयान के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। रॉयटर्स की अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध और ऊंची ईंधन कीमतें रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए चुनौती बनी हुई थीं। ईरान से जुड़े फैसले अमेरिकी चुनावी बहस में घरेलू आर्थिक चिंताओं के साथ जुड़े रहे हैं।
कूटनीतिक स्तर पर ईरान और अमेरिका मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सोमवार को इस संपर्क के जारी रहने की जानकारी दी थी। उन्होंने उपविदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी की दोहा यात्रा का भी उल्लेख किया। कतर की मध्यस्थता के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। होर्मुज क्षेत्र में तनाव के बीच ये संपर्क इसलिए अहम हैं, क्योंकि सैन्य गतिविधियों के साथ समाधान तलाशने की प्रक्रिया भी जारी है।
केशम के आसपास इससे पहले भी तनाव की खबरें आई थीं। 31 अक्टूबर को ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका पर दो मछली पकड़ने वाली नौकाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया था। उस घटना में दो मछुआरों के लापता और एक के घायल होने की बात कही गई थी। उस समय अमेरिकी पक्ष की तत्काल पुष्टि उपलब्ध नहीं थी। यह पिछली और अलग घटना थी; उसके हताहतों के आंकड़े ताजा धमाकों से नहीं जोड़े जाने चाहिए। दोनों मामलों में स्थान की निकटता के बावजूद घटनाक्रम और उपलब्ध जानकारी अलग हैं। अमेरिका में तीन नवंबर को होने वाले चुनाव प्रतिनिधि सभा और सीनेट में नियंत्रण तय करेंगे। प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों, सीनेट की 35 सीटों और 36 राज्यों के गवर्नर पदों के लिए मतदान हो रहा है। राष्ट्रपति पद इस चुनाव में दांव पर नहीं है, लेकिन परिणाम ट्रंप के शेष कार्यकाल की राजनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित करेंगे। मतदान की पूर्व संध्या पर आई हमले की खबरों के बावजूद सैन्य कार्रवाई का चुनावी उद्देश्य स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं है। फिलहाल स्पष्ट नुकसान, लक्ष्यों और दोनों सरकारों के विस्तृत बयानों का इंतजार है।
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