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ईरान पर अमेरिकी हमले तेज, 12वें दिन सैन्य ठिकानों पर बमबारी; कई शहरों में धमाकों की गूंज
Washington: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार गहराता जा रहा है। संघर्ष के 12वें दिन अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर व्यापक हवाई हमले किए। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों के दौरान कई इलाकों में जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं और कई शहरों में धमाकों की खबरें सामने आईं। हालांकि, दोनों देशों की ओर से नुकसान के अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं और स्वतंत्र रूप से सभी दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
बताया जा रहा है कि अमेरिकी हमलों का लक्ष्य ईरान के सैन्य ढांचे, मिसाइल से जुड़े ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाना था। वहीं ईरान ने भी हमलों के बाद अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने तथा जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
किन क्षेत्रों को बनाया गया निशाना?
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य प्रतिष्ठानों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों के बाद कुछ क्षेत्रों में धुएं के गुबार और विस्फोटों की तस्वीरें सामने आईं। हालांकि, सुरक्षा कारणों से कई स्थानों की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि प्रभावित क्षेत्रों का आकलन किया जा रहा है और आवश्यक राहत एवं सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं।
भारी तबाही के दावे
हमलों के बाद दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की बात कही गई है, जबकि ईरान का कहना है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई हमलों को विफल भी किया।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक संभव नहीं हो पाई है। युद्ध जैसे हालात में शुरुआती जानकारी समय के साथ बदल सकती है।
कई शहरों में सुनाई दिए धमाके
स्थानीय मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई शहरों में देर रात और सुबह के समय तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। कुछ इलाकों में सुरक्षा बलों की गतिविधियां बढ़ा दी गई हैं और नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही, तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्रीय सहयोगी देशों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।
वैश्विक समुदाय की चिंता
संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का कहना है कि लगातार सैन्य कार्रवाई से क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है और मानवीय संकट गहरा सकता है।
कई देशों ने कूटनीतिक समाधान और संवाद के जरिए विवाद सुलझाने पर जोर दिया है।
वैश्विक बाजार पर असर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी देखा जा रहा है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है। निवेशक भी भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
नागरिकों की सुरक्षा पर फोकस
संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श (Travel Advisory) जारी किए हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
आगे क्या?
अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से सुरक्षा एवं सैन्य गतिविधियां जारी हैं। आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह दोनों देशों की रणनीति, कूटनीतिक प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पर निर्भर करेगा। फिलहाल संघर्ष को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
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