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न्यूयॉर्क में तिरंगा फाड़ने पर मचा बवाल रिजिजू ने दी कड़ी चेतावनी

Ratna Netam
30 Aug 2026 9:22 PM IST
न्यूयॉर्क में तिरंगा फाड़ने पर मचा बवाल रिजिजू ने दी कड़ी चेतावनी
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नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। अमेरिका के न्यूयॉर्क में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों को तिरंगे के साथ अपमानजनक व्यवहार करते और एक झंडे को फाड़ते हुए देखा गया। इसके बाद रिजिजू ने कहा कि RSS, BJP या सरकार की आलोचना करने की आजादी है, लेकिन देश और तिरंगे का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।
रिजिजू ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर घटना से जुड़ा वीडियो साझा करते हुए प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी। उन्होंने लिखा कि सरकार या राजनीतिक-सामाजिक संगठनों की आलोचना अलग बात है, लेकिन भारत और उसके राष्ट्रीय ध्वज का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, **“यह तुम्हें बहुत ज्यादा महंगा पड़ेगा।”**
मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर हुआ प्रदर्शन
यह पूरा घटनाक्रम शनिवार 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर हुआ। अंदर RSS प्रमुख मोहन भागवत ‘Universal Oneness Celebration’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जबकि बाहर उनके दौरे और RSS की विचारधारा का विरोध करने के लिए प्रदर्शनकारी जुटे थे।
इस कार्यक्रम का आयोजन American Hindus for Engagement and Dialogue यानी AHEAD की ओर से किया गया था। कार्यक्रम में हजारों लोगों के शामिल होने की योजना थी और अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोग पहुंचे थे।
भागवत की न्यूयॉर्क यात्रा को लेकर कार्यक्रम से पहले ही राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था। कई संगठनों ने उनके कार्यक्रम का विरोध किया था, जबकि आयोजकों ने इसे भारतीय-अमेरिकी समुदाय और अंतरधार्मिक एकता से जुड़ा आयोजन बताया।
तिरंगे के साथ क्या हुआ?
विरोध प्रदर्शन के दौरान सामने आए वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के साथ अपमानजनक व्यवहार करने का दावा किया गया है।
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक एक वीडियो में एक प्रदर्शनकारी अपने पैर के आसपास तिरंगा बांधे दिखाई दिया। एक अन्य वीडियो में कुछ लोगों को भारतीय झंडा पकड़कर उसे फाड़ते और उसके बाद नारे लगाते देखा गया।
घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए और भारत में भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों के एक हिस्से को खालिस्तान समर्थक बताया गया है। हालांकि वायरल वीडियो में मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की संगठनात्मक पहचान स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुई है।
रिजिजू ने कहा- RSS और BJP की आलोचना करो लेकिन...
तिरंगे के साथ हुए व्यवहार पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखा रुख अपनाया।
उन्होंने अपने संदेश में साफ किया कि RSS, BJP और केंद्र सरकार की आलोचना करने का अधिकार लोगों को है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार या किसी संगठन से असहमति जताना स्वीकार्य है, लेकिन उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज और देश को निशाना बनाए जाने पर आपत्ति जताई।
रिजिजू ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के झंडे और देश का अपमान न करें।
उनकी प्रतिक्रिया का मुख्य संदेश राजनीतिक विरोध और राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान के बीच अंतर करने को लेकर था।
मोहन भागवत के विरोध में जुटे थे प्रदर्शनकारी
न्यूयॉर्क में मोहन भागवत का कार्यक्रम पहले से ही विवादों में था।
रॉयटर्स के मुताबिक न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कार्यक्रम से पहले कहा था कि वह इस आयोजन का समर्थन नहीं करते। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं, इसे लेकर स्थिति अलग है।
ममदानी ने RSS की विचारधारा की आलोचना करते हुए भारत के धर्मनिरपेक्ष और बहुलतावादी स्वरूप की बात कही थी।
RSS इन आरोपों को खारिज करता रहा है। संगठन खुद को हिंदू-केंद्रित सभ्यतागत और सांस्कृतिक आंदोलन बताता है।
इसी राजनीतिक और वैचारिक विवाद के बीच 29 अगस्त को कार्यक्रम हुआ और बाहर प्रदर्शन भी आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के अंदर क्या बोले मोहन भागवत?
मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित Infosys Theater में आयोजित कार्यक्रम में मोहन भागवत ने विविधता, एकता और भारतीय समाज को लेकर अपनी बात रखी।
यह कार्यक्रम RSS के शताब्दी वर्ष से जुड़े वैश्विक संपर्क कार्यक्रमों के बीच आयोजित किया गया था। भागवत तीन देशों की यात्रा पर निकले थे और अमेरिका उनका महत्वपूर्ण पड़ाव था।
कार्यक्रम का नाम ‘Universal Oneness Celebration’ रखा गया था और आयोजकों का कहना था कि इसका उद्देश्य साझा विरासत और अंतरधार्मिक एकता का संदेश देना है।
हालांकि बाहर प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने RSS की विचारधारा और भारत में अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध जताया।
विरोध के दौरान बढ़ा तनाव
प्रदर्शन के दौरान एक तरफ RSS और भारत सरकार का विरोध करने वाले लोग थे, जबकि दूसरी तरफ कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे भारतीय मूल के लोग मौजूद थे।
तिरंगे के कथित अपमान के बाद दोनों पक्षों के बीच बहस और तनाव की स्थिति बनने की रिपोर्ट सामने आई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भी प्रदर्शन स्थल पर नारेबाजी और टकराव जैसी स्थिति दिखाई दी।
इस घटना का सबसे ज्यादा विरोध तिरंगे को लेकर हुआ। भारत में सोशल मीडिया यूजर्स ने भी वायरल वीडियो साझा करते हुए प्रदर्शनकारियों की आलोचना की।
SFJ का नाम क्यों आया सामने?
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में प्रदर्शन से जुड़े लोगों में प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस यानी SFJ से जुड़े तत्वों की मौजूदगी का दावा किया गया है।
भारत सरकार ने SFJ को गैरकानूनी संगठन घोषित किया हुआ है और उसके नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू को भारत ने आतंकवादी घोषित किया है।
इस वजह से न्यूयॉर्क की घटना ने केवल राजनीतिक विरोध का मुद्दा नहीं बल्कि भारत में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को लेकर चल रही बहस को भी दोबारा चर्चा में ला दिया।
हालांकि किसी प्रदर्शन में शामिल सभी व्यक्तियों को किसी एक संगठन से जोड़ना उचित नहीं होगा, जब तक उनकी पहचान की स्वतंत्र पुष्टि न हो।
न्यूयॉर्क मेयर के रुख पर भी चर्चा
मोहन भागवत के कार्यक्रम से पहले न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी का बयान भी चर्चा में रहा।
उन्होंने कार्यक्रम का विरोध करते हुए RSS की विचारधारा पर सवाल उठाए थे। ममदानी ने कहा था कि जिस भारत की अवधारणा से वह परिचित रहे हैं, वह एक बहुलतावादी और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य की है, जहां प्रत्येक व्यक्ति के लिए जगह है।
इसके बाद जब कार्यक्रम के बाहर तिरंगे के कथित अपमान के वीडियो सामने आए तो भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया के कुछ हिस्सों में ममदानी की प्रतिक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए।
हालांकि इस घटना पर ममदानी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने आई है या नहीं, इसे लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट आधिकारिक बयान नहीं मिला है।
राजनीतिक विरोध और राष्ट्रीय प्रतीक पर बहस
न्यूयॉर्क की घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि राजनीतिक विरोध की सीमा क्या होनी चाहिए।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी राजनीतिक दल, सरकार, विचारधारा या संगठन का शांतिपूर्ण विरोध अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। न्यूयॉर्क में भी प्रदर्शनकारी RSS और मोहन भागवत को लेकर अपनी असहमति जताने के लिए एकत्र हुए थे।
लेकिन भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के साथ हुए कथित व्यवहार ने विवाद का स्वरूप बदल दिया। भारत में तिरंगा केवल सरकार या किसी राजनीतिक दल का प्रतीक नहीं बल्कि देश का राष्ट्रीय ध्वज है। इसी आधार पर रिजिजू ने भी अपनी प्रतिक्रिया में सरकार की आलोचना और देश के अपमान को अलग-अलग रखने की बात कही।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
घटना का वीडियो रविवार को तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गया। इसके बाद भारत में राजनीतिक नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
किरन रिजिजू की प्रतिक्रिया इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि उन्होंने बेहद सख्त शब्दों में प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी।
उनका कहना था कि RSS, BJP या सरकार की आलोचना की जा सकती है, लेकिन देश और राष्ट्रीय ध्वज को अपमानित करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल न्यूयॉर्क की यह घटना राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। एक तरफ मोहन भागवत के कार्यक्रम को लेकर वैचारिक विरोध है, वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शन के दौरान सामने आए तिरंगे के अपमान के दृश्यों ने भारत में नाराजगी बढ़ा दी है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि अमेरिकी प्रशासन या न्यूयॉर्क के स्थानीय अधिकारियों की ओर से तिरंगे के साथ हुए व्यवहार और प्रदर्शन के दौरान पैदा हुई स्थिति को लेकर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आती है या नहीं।
किरन रिजिजू का संदेश फिलहाल स्पष्ट है—राजनीतिक विरोध और आलोचना की स्वतंत्रता अपनी जगह है, लेकिन भारत के राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को वह राजनीतिक असहमति के दायरे में स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
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