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Delhi दिल्ली। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) आठ से अधिक देशों में लाइव हो चुका है, इनमें यूएई, सिंगापुर, भुटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, कतर और मॉरीशस का नाम शामिल है। यह डिजिटल पेमेंट में भारत की लीडरशिप को दिखाता है। यह जानकारी सरकार की ओर से शुक्रवार को संसद में दी गई। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी के राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में दी जानकारी में बताया कि यूपीआई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती स्वीकृति से रेमिटेंस को बढ़ावा मिल रहा है, वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहन मिल रहा है और वैश्विक फिनटेक परिदृश्य में भारत की स्थिति और मजबूत हो रही है।
इसके अलावा, सरकार ने भारत स्टैक/डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) को साझा करने या उस पर सहयोग के लिए 23 देशों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू)/समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनका उद्देश्य मुख्य रूप से भारत के डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म्स के अपनाने को बढ़ावा देना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन समझौता ज्ञापनों का उद्देश्य डिजिटल पहचान, डिजिटल भुगतान, डेटा आदान-प्रदान और सेवा वितरण प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है। ये भारत स्टैक ढांचे के तहत भारत की व्यापक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर कूटनीति के अनुरूप हैं।
डिजिलॉकर के लिए क्यूबा, केन्या, संयुक्त अरब अमीरात और लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक (एलपीडीआर) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
इसके अलावा, सरकार ने भारत के डीपीआई की सफलता को वैश्विक स्तर पर साझा करने के लिए कदम उठाए हैं।
इंडिया स्टैक ग्लोबल भारत के डीपीआई को प्रदर्शित करता है और मित्र देशों द्वारा इसे अपनाने में सहायता प्रदान करता है। यह पोर्टल 18 प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच प्रदान करता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “भारत की जी20 अध्यक्षता (2023) के दौरान शुरू किया गया ग्लोबल डीपीआई रिपॉजिटरी एक वैश्विक ज्ञान मंच के रूप में कार्य करता है, जिसमें भारत ने डीपीआई समाधानों की सबसे अधिक संख्या में योगदान दिया है।”
प्रमुख डीपीआई और डिजिटल समाधानों में आधार, यूपीआई, कोविन, एपीआई सेतु, डिजिलॉकर, आरोग्य सेतु, जीईएम, उमंग, दीक्षा, ई-संजीवनी और पीएम गतिशक्ति आदि शामिल हैं।
इस बीच, नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, जनवरी महीने में यूपीआई लेनदेन की संख्या में 28 प्रतिशत की वृद्धि (साल-दर-साल) दर्ज की गई और यह 21.70 अरब तक पहुंच गई। साथ ही, लेनदेन राशि में भी 21 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई और यह 28.33 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई।
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