
MASKO मॉस्को: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने की कोशिशें फिलहाल जारी हैं, लेकिन अगले दौर की औपचारिक वार्ता की तारीख तय नहीं हो सकी है। बुधवार को क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने जानकारी दी कि दोनों देशों के वार्ता दलों के प्रमुख लगातार संपर्क में हैं, लेकिन इस्तांबुल में प्रस्तावित वार्ता की तिथि अभी तक निश्चित नहीं की गई है। पेस्कोव ने कहा कि दोनों पक्षों को गंभीर और ठोस तैयारी के साथ आगे बढ़ना होगा ताकि वार्ता सार्थक साबित हो सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि वार्ता के स्तर को तय करने की प्रक्रिया जारी है और यह सिलसिला आगे भी चलता रहेगा। उच्चस्तरीय या शीर्ष नेतृत्व की बैठक तभी संभव होगी जब सभी आवश्यक तैयारियां पूरी हो जाएं।
उन्होंने यूरोपीय सैनिकों की संभावित तैनाती पर भी कड़ा विरोध जताया। पेस्कोव के अनुसार, यूक्रेन में नाटो ढांचे की मौजूदगी और उसका विस्तार रूस-यूक्रेन संघर्ष के मुख्य कारणों में से एक है। इस कारण से मॉस्को किसी भी स्थिति में यूरोपीय सैनिकों की मौजूदगी को स्वीकार नहीं करेगा। इसी बीच, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 15 अगस्त को अलास्का के आर्कटिक वॉरियर कन्वेंशन सेंटर में मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने मॉस्को और कीव के बीच प्रत्यक्ष वार्ता जारी रखने और उसे उच्च स्तर तक ले जाने पर चर्चा की।
इस मुलाकात में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, राष्ट्रपति सहयोगी यूरी उशाकोव, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ भी मौजूद रहे।विशेषज्ञ मानते हैं कि पुतिन-ट्रंप बातचीत से रूस और यूक्रेन के बीच नई संभावनाएं खुल सकती हैं। अमेरिका की सक्रिय भागीदारी से शांति प्रक्रिया को नई गति मिल सकती है। हालांकि, अभी तक यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की की ओर से पुतिन से मुलाकात पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पेस्कोव ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस किसी भी वार्ता को तभी सार्थक मानेगा जब उसमें सुरक्षा गारंटी और नाटो विस्तार से जुड़े मुद्दों पर ठोस समाधान निकले। क्रेमलिन का मानना है कि संघर्ष का मूल कारण पश्चिमी सैन्य ढांचे का पूर्व की ओर विस्तार है।





