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Riyadh रियाद: समुद्री संसाधनों के प्रबंधन में ओवरफिशिंग को लंबे समय से एक प्रमुख समस्या माना जाता रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भी बड़ी चुनौती उससे जुड़ी अनिश्चितता है। किंग अब्दुल्ला यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (KAUST) में मरीन साइंसेज़ की असिस्टेंट प्रोफेसर जेसिका मेसन ने इस विषय पर चिंता जताते हुए कहा कि फिशरीज़ मैनेजमेंट में अभी भी कई बुनियादी पहलुओं को लेकर स्पष्ट जानकारी की कमी है।
जेसिका मेसन ने एक इंटरव्यू में कहा कि वैज्ञानिक समुदाय अभी तक यह पूरी तरह नहीं समझ पाया है कि ओवरफिशिंग वास्तव में कहाँ और किस स्तर पर हो रही है। उन्होंने बताया कि मछलियों की आबादी, उनके प्रजनन क्षेत्र (स्पॉनिंग एरिया) और समुद्री कनेक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा, “हम अभी भी कई बुनियादी बातें नहीं जानते हैं, जैसे कि अत्यधिक मछली पकड़ने के रुझान क्या हैं, स्पॉनिंग एरिया कहाँ स्थित हैं, रेड सी में समुद्री जीवों के बीच कनेक्टिविटी कैसे काम करती है, और वास्तव में कितनी मात्रा में मछली पकड़ने की कोशिश की जा रही है।”
विशेषज्ञों के अनुसार, इन जानकारियों की कमी के कारण प्रभावी नीतियां बनाना और संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना कठिन हो जाता है। फिशरीज़ मैनेजमेंट का उद्देश्य समुद्री जैव विविधता को संरक्षित करते हुए मछली पकड़ने की गतिविधियों को संतुलित रखना होता है, लेकिन जब मूलभूत आंकड़े ही स्पष्ट नहीं होते, तो यह कार्य और जटिल हो जाता है।
रेड सी जैसे क्षेत्रों में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यहां समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र जटिल है और कई प्रजातियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में यदि किसी एक प्रजाति पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, तो उसका असर पूरे समुद्री तंत्र पर पड़ सकता है।
जेसिका मेसन ने कहा कि फिशरीज़ मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए अधिक वैज्ञानिक शोध, डेटा संग्रह और निगरानी की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए इन चुनौतियों का समाधान खोजा जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि मछलियों के प्रजनन क्षेत्रों की सही पहचान और उनकी सुरक्षा अत्यंत जरूरी है, क्योंकि यही क्षेत्र समुद्री जीवन के संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि इन क्षेत्रों की सही जानकारी नहीं होगी, तो संरक्षण प्रयास भी प्रभावी नहीं हो पाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिशरीज़ से जुड़े आंकड़ों को एकत्रित करने और उनका विश्लेषण करने के लिए सरकारों, वैज्ञानिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय जरूरी है। इससे न केवल ओवरफिशिंग को नियंत्रित किया जा सकेगा, बल्कि समुद्री संसाधनों का दीर्घकालिक संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
इस बीच, वैश्विक स्तर पर भी समुद्री संसाधनों के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और कई देश फिशरीज़ मैनेजमेंट को मजबूत करने के लिए नई नीतियां और तकनीकी उपाय अपना रहे हैं।
जेसिका मेसन के अनुसार, जब तक समुद्री पारिस्थितिकी से जुड़े मूलभूत तथ्यों को बेहतर तरीके से नहीं समझा जाएगा, तब तक प्रभावी और टिकाऊ फिशरीज़ मैनेजमेंट संभव नहीं हो पाएगा।
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