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Delhi दिल्ली। ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान को झूठा करार देते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। ईरान सैन्य मुख्यालय ने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर उनका रुख यथावत है। ईरान सैन्य मुख्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''ईरान और अमेरिका के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है। ट्रंप की ओर से बातचीत का दावा झूठा है। अमेरिका के ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले की धमकी के बाद पीछे हटना खतरे से बचने की कोशिश है। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का रुख नहीं बदला है।''
ईरान सैन्य मुख्यालय ने कहा, ''ईरान की जवाबी कार्रवाई के डर से ट्रंप अपने 48 घंटे के अल्टीमेटम से पीछे हट गए।''
ईरान के सैन्य मुख्यालय ने कहा कि हमारी ओर से पहले ही साफ कर दिया गया था कि अगर अमेरिका ईरान के पावर प्लांट पर हमला करता है तो इजरायल के बिजली, ऊर्जा और आईसीटी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जाएगा। मध्य-पूर्व के उन देशों में मौजूद पावर प्लांट, जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं, वैध निशाने माने जाएंगे। इसके साथ ही जब तक हमारे क्षतिग्रस्त प्लांट दोबारा नहीं बन जाते, तब तक होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोमवार को कहा कि अमेरिका की ईरान के साथ सकारात्मक और उत्पादक बातचीत हुई है। उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों के बीच मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को पूरी तरह खत्म करने को लेकर गंभीर वार्ता जारी है। डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर अमेरिका अगले पांच दिन तक कोई हमला नहीं करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कहा, ''ईरान के साथ पिछले दो दिनों में बेहद सकारात्मक और उत्पादक बातचीत हुई है, जिसका मकसद मध्य पूर्व में जारी टकराव का पूर्ण समाधान निकालना है। चर्चाओं का ये दौर पूरे हफ्ते जारी रहेगा। दोनों देशों के बीच गहन और विस्तृत चर्चाओं के सकारात्मक रवैए को देखते हुए, मैंने अमेरिकी रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा ढांचे पर सभी सैन्य हमलों को फिलहाल पांच दिनों के लिए टाल दिया जाए।"
इससे पहले रविवार को ट्रंप की एक पोस्ट ने हंगामा मचा दिया था। ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी ईरान को दी थी और कहा था कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोला गया तो ईरान के बड़े बिजली संयंत्रों को निशाना बनाया जाएगा। इसके जवाब में ईरान ने भी दावा किया कि वह अमेरिकी सहायता से चलने वाले किसी भी संयंत्र को नहीं छोड़ेगा।
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