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वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक अलग विभाग और व्हाइट हाउस में एक 'टास्क फोर्स' बनाई जाएगी। इसका मकसद महिलाओं को प्रभावित करने वाली बीमारियों पर शोध (रिसर्च) को तेज करना है। इस घोषणा के समय मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों में भारतीय-अमेरिकी NIH निदेशक जय भट्टाचार्य भी शामिल थे।
सोमवार को व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम में, फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रम्प के साथ मिलकर इस पहल की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े शोध का दायरा बढ़ाना, आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और चिकित्सा उपचार तक पहुंच को बेहतर बनाना है।
'जीवन के सभी चरणों में बेहतर परिणामों के लिए महिलाओं के स्वास्थ्य को आगे बढ़ाना' (Advancing Women's Health to Improve Outcomes in All Phases of Life) नाम के इस कार्यकारी आदेश के तहत, एक 'व्हाइट हाउस महिला स्वास्थ्य टास्क फोर्स' का गठन किया गया है। यह टास्क फोर्स विभिन्न संघीय एजेंसियों के बीच तालमेल बिठाने का काम करेगी।
स्वास्थ्य और मानव सेवा सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर इस टास्क फोर्स का नेतृत्व करेंगे। इस टास्क फोर्स की पहली बैठक सोमवार को ही हुई।
ट्रम्प ने कहा कि यह पहल उन बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं पर ध्यान देगी, जो महिलाओं को प्रभावित करती हैं, लेकिन जिन पर अब तक पर्याप्त शोध नहीं हो पाया है।
ट्रम्प ने कहा, "चिकित्सा विज्ञान में शानदार प्रगति के बावजूद, कई ऐसी बीमारियां और स्थितियां हैं जो महिलाओं को ज्यादा प्रभावित करती हैं, लेकिन इन पर बहुत कम शोध हुआ है।"
उन्होंने बताया कि नया विभाग इन स्वास्थ्य समस्याओं पर शोध को बढ़ावा देगा। साथ ही, यह ऐसी तकनीकों के विकास को प्रोत्साहित करेगा, जिससे बीमारियों का जल्दी पता चल सके और बेहतर इलाज मिल सके।
ट्रम्प ने कहा, "मैं अभी जिस कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने जा रहा हूं, उसके तहत स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग को नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) के भीतर महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक नया विभाग बनाने का निर्देश दिया जाएगा।"
राष्ट्रपति ने इस पहल को तैयार करने का श्रेय मेलानिया ट्रम्प को दिया। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन महिलाओं और लड़कियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के प्रयासों का समर्थन करेगा।
फर्स्ट लेडी ने इस कार्यक्रम के लिए पांच प्राथमिकताएं बताईं। इनमें सबसे पहली प्राथमिकता उन बीमारियों के लिए शोध फंड (अनुसंधान निधि) आवंटित करना है, जो विशेष रूप से महिलाओं को प्रभावित करती हैं।
उन्होंने महिलाओं की शारीरिक संरचना (बायोलॉजी) को बेहतर ढंग से समझने और चिकित्सा क्षेत्र में नई खोजों को तेज करने के लिए 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया।
उनकी अन्य प्राथमिकताओं में शामिल हैं: प्रयोगशालाओं में विकसित हो रहे प्रभावी इलाज को सुरक्षित तरीके से मरीजों तक जल्दी पहुंचाना, चिकित्सा क्षेत्र की नई तकनीकों को किफायती बनाना, और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर अधिक खुलकर चर्चा को बढ़ावा देना।
मेलानिया ट्रम्प ने कहा, "आज से हम महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी हकीकत को बदल देंगे।"
उन्होंने इस पहल को एक ऐसे अवसर के रूप में बताया, जिसमें आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई वैज्ञानिक क्षमताओं का उपयोग करके चिकित्सा शोध में लंबे समय से चली आ रही कमियों को दूर किया जा सकता है। फर्स्ट लेडी ने कहा कि यह कार्यक्रम महिलाओं के पूरे जीवनकाल में—बचपन और मातृत्व से लेकर उनके बाद के वर्षों तक—उनके काम आना चाहिए।
उन्होंने कहा, "सबसे पहले, ऐसी बीमारियों के इलाज खोजने के लिए रिसर्च फंडिंग दी जानी चाहिए जो महिलाओं को अलग तरह से प्रभावित करती हैं।"
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि चिकित्सा के क्षेत्र में होने वाली प्रगति महिलाओं तक पहुँचनी चाहिए, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो।
इस समारोह में NIH के डायरेक्टर जय भट्टाचार्य, सेकंड लेडी उषा वेंस, सेंटर्स फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज के एडमिनिस्ट्रेटर मेहमत ओज़ और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
ट्रंप ने अपने संबोधन के दौरान भट्टाचार्य का जिक्र किया और NIH में उनके काम के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।
राष्ट्रपति ने उषा वेंस का भी स्वागत किया, जो अपने छोटे बच्चे के साथ इस समारोह में शामिल हुई थीं।
कार्यक्रम के दौरान व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स का भी जिक्र किया गया, जिसमें ट्रंप ने उनके ब्रेस्ट कैंसर से ठीक होने के बारे में बात की।
यह घोषणा 'ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह' के दौरान की गई है, जो हर साल अक्टूबर में मनाया जाता है।
'नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ' (NIH) अमेरिका की प्रमुख बायोमेडिकल रिसर्च एजेंसी है, जो बीमारियों, उनके इलाज और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययनों को बढ़ावा देती है। इसके रिसर्च कार्यक्रमों में महिलाओं को प्रभावित करने वाली स्थितियों, प्रजनन स्वास्थ्य और बीमारियों में लिंग-आधारित अंतरों पर किया जाने वाला काम शामिल है।
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