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ट्रंप की ग्रीनलैंड पर बड़ी घोषणा तेल गैस और खनिजों की खोज की तैयारी

Ratna Netam
14 Oct 2026 3:23 PM IST
ट्रंप की ग्रीनलैंड पर बड़ी घोषणा तेल गैस और खनिजों की खोज की तैयारी
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वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि आर्कटिक क्षेत्र में स्थित ग्रीनलैंड में बड़े पैमाने पर तेल, प्राकृतिक गैस और खनिज संसाधनों की खोज शुरू करने की तैयारी की जा रही है। ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका और यूरोप की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए दावा किया कि यहां बड़ी मात्रा में प्राकृतिक संसाधन मौजूद हो सकते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच आर्कटिक क्षेत्र में रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने को लेकर नया समझौता हुआ है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर 14 अक्टूबर को साझा किए गए एक पोस्ट में ग्रीनलैंड के प्राकृतिक संसाधनों और सामरिक महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड में तेल, गैस और खनिजों की बड़े पैमाने पर खोज शुरू होने वाली है। ट्रंप के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि इस द्वीप में आसानी से निकाले जा सकने वाले तेल का भंडार दुनिया के कई अन्य क्षेत्रों से अधिक हो सकता है। हालांकि, उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई विशिष्ट आंकड़ा या अध्ययन प्रस्तुत नहीं किया।
ट्रंप ने अपने बयान में ग्रीनलैंड के रणनीतिक महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप की सुरक्षा के नजरिए से इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, भविष्य में अमेरिका पर होने वाले संभावित हमलों की निगरानी और उन्हें रोकने में ग्रीनलैंड बड़ी भूमिका निभा सकता है।
राष्ट्रपति ने दावा किया कि ग्रीनलैंड में अमेरिकी रक्षा व्यवस्था ड्रोन, मिसाइल और भविष्य में विकसित होने वाले अन्य आधुनिक हथियारों से उत्पन्न खतरों का मुकाबला करने में सक्षम होगी। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड की स्थिति अमेरिका को संभावित हमलों का पता लगाने और प्रतिक्रिया देने के लिए अतिरिक्त समय तथा बेहतर निगरानी सुविधा उपलब्ध कराती है।
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का यह बयान अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच हुए नए रक्षा समझौते के बाद सामने आया है। तीनों पक्षों ने 22 सितंबर 2026 को आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग मजबूत करने के उद्देश्य से समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का विस्तार करने और रक्षा सुविधाओं को मजबूत करने का प्रावधान किया गया है।
समझौते के अनुसार, अमेरिका को ग्रीनलैंड में अपनी मौजूदा सैन्य सुविधाओं के आधुनिकीकरण और अतिरिक्त रक्षा क्षेत्रों की स्थापना के अवसर मिलेंगे। इसमें पिटुफिक स्पेस बेस की गतिविधियों का विस्तार और अन्य स्थानों पर सैन्य सुविधाओं को विकसित करने से संबंधित व्यवस्थाएं शामिल हैं। दोनों पक्षों ने आर्कटिक क्षेत्र में निगरानी, सैन्य अभ्यास और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है।
हालांकि, इस समझौते में डेनमार्क की संप्रभुता और ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता दी गई है। ग्रीनलैंड अभी भी डेनमार्क साम्राज्य के अंतर्गत एक स्वशासित क्षेत्र है। इसलिए ट्रंप के बयान को ग्रीनलैंड पर अमेरिकी स्वामित्व स्थापित होने के रूप में नहीं देखा जा सकता।
ग्रीनलैंड लंबे समय से अपने प्राकृतिक संसाधनों के कारण अंतरराष्ट्रीय रुचि का केंद्र रहा है। यहां दुर्लभ खनिजों के साथ तेल और गैस की संभावनाओं पर चर्चा होती रही है। विशेष रूप से दुर्लभ मृदा खनिज आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों और रक्षा उपकरणों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि इन संसाधनों को लेकर अमेरिका की रुचि बढ़ी हुई है।
हालांकि, ग्रीनलैंड में बड़े पैमाने पर खनन और ऊर्जा संसाधनों का दोहन आसान नहीं माना जाता। क्षेत्र की कठोर जलवायु, सीमित बुनियादी ढांचा और जटिल भूगर्भीय परिस्थितियां बड़ी चुनौतियां हैं। पहले भी यहां प्राकृतिक संसाधनों की खोज और उनके व्यावसायिक उपयोग के प्रयास अपेक्षित स्तर पर सफल नहीं हो सके हैं।
ट्रंप की इस घोषणा में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि उन्होंने फिलहाल खोज अभियान शुरू करने की निश्चित तारीख, संबंधित कंपनियों या परियोजनाओं के स्थानों की जानकारी नहीं दी है। इससे यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित गतिविधियां कब और किस स्तर पर शुरू होंगी।
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति की नई घोषणा ने इस क्षेत्र के आर्थिक और सामरिक महत्व को एक बार फिर सामने ला दिया है। तेल, गैस और खनिज संसाधनों की संभावनाओं के साथ ही अमेरिका की रक्षा रणनीति में भी ग्रीनलैंड महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अब ध्यान इस बात पर रहेगा कि ट्रंप की घोषणा के बाद प्राकृतिक संसाधनों की खोज को लेकर कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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