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ईरान से युद्ध पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- पांच महीने से कोई हताहत नहीं
Ratna Netam
7 Nov 2026 3:45 PM IST

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वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सैन्य टकराव को युद्ध मानने से इनकार करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच महीनों में इस संघर्ष के दौरान कोई भी घायल या हताहत नहीं हुआ है। ट्रंप ने कहा कि जब इतने लंबे समय तक किसी की जान नहीं गई और कोई घायल नहीं हुआ, तो इसे युद्ध कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के साथ बातचीत में काफी प्रगति की है और अब युद्ध से पहले की तुलना में अधिक तेल निकाल रहा है।ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों के साथ कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। ट्रंप ने अपने बयान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को युद्ध के बजाय एक सीमित सैन्य टकराव के रूप में पेश करने की कोशिश की। उनके इस रुख से अमेरिका की ईरान नीति और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
'ईरान के साथ बातचीत में काफी प्रगति हुई'
ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत कर रहा है और इस दिशा में काफी प्रगति हुई है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अब युद्ध से पहले की तुलना में अधिक तेल निकाल रहा है। उनके मुताबिक, मौजूदा स्थिति को युद्ध कहना उचित नहीं है, क्योंकि पिछले पांच महीनों में किसी के घायल होने या मारे जाने की घटना नहीं हुई है।अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, उन्होंने बातचीत के मौजूदा प्रारूप, संभावित समझौते की शर्तों और किसी अंतिम निर्णय की समयसीमा के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी।ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि उनकी सरकार ईरान के साथ तनाव को नियंत्रित करने और क्षेत्र में अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखने पर काम कर रही है। उनके बयान से स्पष्ट है कि अमेरिकी प्रशासन मौजूदा स्थिति को पूर्ण युद्ध के बजाय नियंत्रित सैन्य और कूटनीतिक टकराव के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है।
अमेरिकी सैनिकों के नुकसान पर ट्रंप के दावे पर सवाल
ट्रंप के इस बयान पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अमेरिकी सैन्य कर्मियों के हताहत और घायल होने से संबंधित आंकड़े उनके दावे से मेल नहीं खाते। सितंबर 2026 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्वयं ईरान संघर्ष में 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत स्वीकार की थी। वहीं, अक्टूबर में सामने आए अमेरिकी रक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस संघर्ष में 19 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी और 860 से अधिक सैन्यकर्मी घायल हुए थे।इसलिए ट्रंप का पांच महीने तक किसी के घायल या मारे नहीं जाने का दावा उपलब्ध सैन्य आंकड़ों से विरोधाभासी दिखाई देता है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी ट्रंप का दावा
ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई ने ईरान की परमाणु क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। उनका कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना उनकी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर भी लिखा कि यदि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से नहीं रोका होता, तो इजरायल और मध्य पूर्व की स्थिति आज बिल्कुल अलग होती। ट्रंप ने आरोप लगाया कि उनकी इस कार्रवाई के महत्व को पर्याप्त रूप से स्वीकार नहीं किया जा रहा है।हालांकि, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हुए वास्तविक नुकसान का पूरा आकलन अभी स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस की अक्टूबर में प्रकाशित रिपोर्ट में भी ईरान की परमाणु क्षमताओं पर हमलों के दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर अनिश्चितता जताई गई थी। ईरान लगातार परमाणु हथियार बनाने के इरादे से इनकार करता रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव का असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां सैन्य गतिविधियों और समुद्री आवाजाही में बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है।अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है और ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी से जुड़ी गतिविधियां भी जारी हैं। दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध करते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।अमेरिकी समाचार एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर के पहले सप्ताह में अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी ठिकानों पर सीमित रक्षात्मक हमले भी किए। इससे क्षेत्र में दोबारा बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
समझौते की कोशिशों के बीच जारी है सैन्य तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। कतर सहित कुछ क्षेत्रीय देश दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच संभावित समझौते की शर्तों को लेकर अभी मतभेद बने हुए हैंरिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ईरान की परमाणु गतिविधियों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समाधान चाहता है, जबकि ईरान अमेरिकी सैन्य दबाव और प्रतिबंधों से राहत की मांग कर रहा है।ट्रंप ने बातचीत में प्रगति का दावा जरूर किया है, लेकिन ईरान के साथ किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों का रुख पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण होगा।फिलहाल ट्रंप का ताजा बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति सैन्य टकराव को युद्ध मानने से इनकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने और क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियों के आंकड़े उनके दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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