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वॉशिंगटन: व्हाइट हाउस ने बताया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने 'एसोसिएशन ऑफ़ साउथईस्ट एशियन नेशन्स' (ASEAN) समिट के लिए मनीला जाएंगे और उसके बाद 'एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन' (APEC) समिट के लिए चीन जाएंगे।
व्हाइट हाउस ने रविवार को 'न्यूयॉर्क पोस्ट' को बताया कि ट्रंप 16 नवंबर को फिलीपींस की राजधानी में होने वाले समिट में हिस्सा लेंगे और फिर APEC के लिए शेन्ज़ेन जाएंगे, जो 17 से 19 नवंबर तक चलेगा।
अखबार ने व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि इस यात्रा का मकसद दक्षिण-पूर्व एशिया में अपने सहयोगियों के प्रति अमेरिका की प्रतिबद्धता दिखाना और अमेरिका के आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है।
'पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में ट्रंप के इस साल तीसरी बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से आमने-सामने मिलने की उम्मीद है। इससे पहले मई में बीजिंग में और पिछले महीने व्हाइट हाउस में शी की यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात हुई थी।
फिलीपींस, जो इस साल ASEAN की अध्यक्षता कर रहा है, ने 49वें ASEAN समिट और उससे जुड़े समिट के लिए मेट्रो मनीला में 16 से 18 नवंबर को कामकाज न होने (non-working days) की घोषणा की है। इस आयोजन में 'ईस्ट एशिया समिट' भी शामिल है, जिसमें भारत और अमेरिका दोनों की भागीदारी है।
सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट मार्को रुबियो ने जुलाई में ही राष्ट्रपति की दिलचस्पी का संकेत दे दिया था, जब वह मनीला में ASEAN विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए थे।
ABS-CBN न्यूज़ के अनुसार, रुबियो ने तब पत्रकारों से कहा था, "मुझे लगता है कि वह जाना चाहेंगे। मुझे नहीं पता कि शेड्यूल कैसा है।"
फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने सितंबर में नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के समय उन्हें ASEAN-भारत समिट और ईस्ट एशिया समिट के लिए फिर से निमंत्रण दिया था।
उस यात्रा के बाद एक बयान में मार्कोस ने कहा, "मैं इस नवंबर में मनीला में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं।"
अगर मनीला में यह बैठक होती है, तो यह ऐसे समय में होगी जब टैरिफ और भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को लेकर वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। पिछले साल, पीएम मोदी ने कुआलालंपुर में हुए आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में वर्चुअली हिस्सा लिया और ईस्ट एशिया समिट के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर को भेजा, जिससे ट्रंप के साथ बैठक की संभावना खत्म हो गई, जो खुद वहां मौजूद थे।
दोनों नेताओं के बीच आखिरी बार 30 सितंबर को टेलीफोन पर बातचीत हुई थी, जिसे पीएम मोदी ने "फायदेमंद" बताया था।
एक और तुरंत आने वाली चुनौती 18 अक्टूबर को है। यह 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' की धारा 113 के तहत तय समय-सीमा है। इसके अनुसार, राष्ट्रपति को उन पांच सबसे बड़े देशों से आने वाले सामान पर "100 प्रतिशत तक" ड्यूटी बढ़ानी पड़ सकती है जो रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस की खरीद जारी रखते हैं। 2022 से भारत रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में से एक रहा है।
यह कानून राष्ट्रपति को ड्यूटी से छूट देने की इजाज़त देता है, अगर वे कांग्रेस को यह प्रमाणित करें कि छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन खुद रूसी डीजल खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नई दिल्ली लंबे समय से दोहरे मापदंडों का मुद्दा उठाती रही है। विदेश मंत्रालय ने अगस्त 2025 में कहा था कि अमेरिका "अपने परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, ईवी उद्योग के लिए पैलेडियम, और उर्वरकों व रसायनों का रूस से आयात जारी रखे हुए है"।
आसियान समूह में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम और तिमोर-लेस्ते शामिल हैं। ईस्ट एशिया समिट में आसियान सदस्य देशों के साथ-साथ आठ सहयोगी देश भी शामिल होते हैं, जिनमें भारत, अमेरिका, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।
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