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Washington वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को इज़राइल के कनेस्सेट (संसद) में संबोधन देते हुए कहा कि अमेरिका ईरान के साथ न्यूक्लियर डील करने के लिए तैयार है जब तेहरान इसके लिए तैयार होगा। उन्होंने इसे ईरान के लिए “अब तक का सबसे अच्छा फैसला” बताया और कहा कि यह डील जल्द ही संभव होगी। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल के लोगों का ईरान के नागरिकों के प्रति कोई शत्रुता नहीं है। उनका मकसद सिर्फ शांति स्थापित करना है और किसी भी परमाणु विनाश की संभावना को रोकना है। उन्होंने ईरान से अपील की कि उसके नेता आतंकवाद से परहेज़ करें, पड़ोसी देशों को धमकी देना बंद करें, और मिलिटेंट प्रोक्सी फंडिंग रोकें, साथ ही इज़राइल के अस्तित्व को मान्यता दें।
ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के मुख्य न्यूक्लियर ठिकानों पर 14 बम गिराए थे और ईरान उस समय लगभग दो महीने दूर था परमाणु हथियार हासिल करने से। उन्होंने जोर दिया कि ईरान अब न्यूक्लियर प्रोग्राम दोबारा शुरू नहीं कर रहा और “वे जीवित रहना चाहते हैं। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि अगर अमेरिका ने यह कार्रवाई नहीं की होती, तो मध्य पूर्व में “अंधेरा बादल” छाया रहता और क्षेत्रीय देश इस डील में शामिल नहीं होते। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान के साथ शांति समझौता करना है, लेकिन फिलहाल रूस पर ध्यान केंद्रित करना उनकी प्राथमिकता है।
ट्रम्प ने मध्य पूर्व में हाल की स्थिति का वर्णन करते हुए कहा कि आतंकवाद और अराजकता की ताकतें कमजोर और अलग-थलग पड़ गई हैं। उन्होंने कहा कि अब “गर्वित और जिम्मेदार राष्ट्रों का नया गठबंधन” उभर रहा है, जो क्षेत्र की स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने टीम को निर्देश दिया कि ईरान से डील जल्दी पूरी हो सकती है, जिसमें उनकी सलाहकार टीम, विशेषकर जैरेड कुश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी, महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। हालांकि, फिलहाल उनका प्राथमिक ध्यान रूस और उसके मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। ट्रम्प ने कहा कि यदि डील संभव हुई, तो यह न केवल अमेरिका और ईरान बल्कि मध्य पूर्व और इज़राइल के लिए भी लाभकारी होगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान अब खुले तौर पर न्यूक्लियर प्रोग्राम शुरू नहीं कर रहा और उनकी रणनीति “सुरक्षित और जीवित रहने” की है। पूर्व राष्ट्रपति का यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच संभावित भविष्य की कूटनीति और मध्य पूर्व में सुरक्षा एवं स्थिरता के प्रयासों को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
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