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Davos डावोस: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में अपने भाषण में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति वलादिमीर पुतिन के साथ अपने संबंधों पर प्रकाश डाला। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने हमेशा बड़े वैश्विक नेताओं के साथ “बहुत अच्छे संबंध” बनाए रखे हैं। ट्रंप ने कहा, "मैं हमेशा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अच्छे संबंधों में रहा हूँ। वह एक अद्भुत व्यक्ति हैं। उन्होंने जो किया वह असाधारण है और सभी द्वारा बहुत सम्मानित हैं। अब मेरी उनके साथ अच्छी संबंध स्थिति है।"
उन्होंने यह भी बताया कि उनके और शी जिनपिंग के संबंध कोविड महामारी के दौरान थोड़े प्रभावित हुए थे। ट्रंप ने कहा, "मैं इसे पहले ‘चाइना वायरस’ कहता था, लेकिन उन्होंने मुझसे कहा कि क्या आप इसे किसी अलग नाम से बुला सकते हैं? और मैंने ऐसा करने का निर्णय लिया।"
ट्रंप ने पुतिन के साथ संबंधों का भी उल्लेख किया और कहा कि बड़े वैश्विक मामलों में उन्होंने हमेशा रूस के राष्ट्रपति के साथ भी संतुलित और मजबूत संबंध बनाए रखे हैं। उनका यह बयान वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में अमेरिका के दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
पूर्व राष्ट्रपति ने WEF में अपने भाषण में यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्थिरता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने दुनिया के नेताओं से संवाद, पारस्परिक सम्मान और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। ट्रंप के अनुसार, वैश्विक महामारी और कोविड-19 जैसी चुनौतियों ने देशों के बीच संचार और भरोसे की प्रणाली को प्रभावित किया, लेकिन अब उन्हें भरोसा है कि संबंध सुधार की ओर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान चीन और रूस के साथ अमेरिका की रणनीतिक नीतियों में संभावित सुधार और सहयोग का संकेत देता है। ट्रंप ने अपने भाषण में कोविड के दौरान हुई विवादास्पद टिप्पणियों और उनकी स्थिति में बदलाव को भी सार्वजनिक रूप से साझा किया।
इस अवसर पर उन्होंने वैश्विक नेताओं और निवेशकों को यह संदेश भी दिया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आर्थिक स्थिरता और पारस्परिक सम्मान ही वैश्विक समस्याओं का समाधान है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका हमेशा बड़े वैश्विक साझेदारों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के पक्ष में रहेगा, और यह नीति अमेरिका की विदेश नीति का स्थायी हिस्सा रही है।
डावोस में ट्रंप के बयान ने मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में काफी चर्चा पैदा कर दी है। विशेषज्ञ इसे अमेरिका-चीन और अमेरिका-रूस संबंधों में संतुलन बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहे हैं।
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