
x
पुतिन संग प्रस्तावित बैठक पर बोले ट्रंप
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले महीने चीन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ संभावित त्रिपक्षीय बैठक में शामिल होने की इच्छा जताई है। सोमवार को व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि ऐसी वार्ता का मुख्य विषय परमाणु हथियार और निरस्त्रीकरण हो सकता है। हालांकि, तीनों नेताओं की बैठक अभी तय नहीं हुई है। इसकी तारीख, एजेंडा और आयोजन को लेकर अंतिम सहमति की आधिकारिक घोषणा बाकी है।
ट्रंप ने परमाणु हथियारों पर बातचीत की जताई इच्छा
ट्रंप ने संभावित बैठक के बारे में कहा कि यदि राष्ट्रपति चिनफिंग इसे आयोजित करना चाहते हैं तो वह तैयार हैं। उन्होंने संकेत दिया कि बातचीत केवल परमाणु हथियारों तक सीमित नहीं रहेगी और व्यापार जैसे दूसरे विषय भी उठ सकते हैं। उनके बयान से अमेरिका, रूस और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधे संवाद की संभावना बढ़ी है। लेकिन बातचीत के प्रति सकारात्मक रुख और औपचारिक बैठक की पुष्टि अलग बातें हैं। फिलहाल ट्रंप ने अपनी इच्छा बताई है; तीनों पक्षों की ओर से साझा कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है।
एपेक सम्मेलन के दौरान हो सकती है मुलाकात
चीन के शेनझेन में 18 और 19 नवंबर को एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग मंच यानी एपेक का शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है। इसी आयोजन के इतर तीनों नेताओं की बैठक की संभावना पर चर्चा हो रही है। अमेरिका, रूस और चीन इस मंच के सदस्य हैं।
किसी बड़े बहुपक्षीय सम्मेलन के दौरान अलग से होने वाली बैठक के लिए नेताओं की उपलब्धता, सुरक्षा और एजेंडे पर सहमति आवश्यक होती है। एपेक में संभावित मौजूदगी से मुलाकात का अवसर जरूर बन सकता है, लेकिन इससे त्रिपक्षीय शिखर वार्ता अपने आप सुनिश्चित नहीं होती।
क्रेमलिन ने चर्चा स्वीकार की, समझौते से इनकार
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने स्वीकार किया है कि संभावित त्रिपक्षीय मुलाकात का विषय बातचीत में आया है। प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि तीनों राष्ट्राध्यक्षों के चीन में एक ही सम्मेलन में शामिल होने की संभावना के कारण ऐसी बैठक का उल्लेख हुआ। पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि बैठक या उसके संभावित विषयों को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव अथवा समझौता तय नहीं हुआ है। इस बयान से संकेत मिलता है कि मामला अभी संभावनाओं और प्रारंभिक संपर्क के स्तर पर है। इसे निश्चित शिखर सम्मेलन के रूप में प्रस्तुत करना जल्दबाजी होगी।
यूक्रेन युद्ध को लेकर भी उठे सवाल
संभावित बैठक की चर्चा के साथ यूक्रेन युद्ध का मुद्दा भी जुड़ गया है। सामने आई जानकारी के अनुसार, पुतिन ऐसी वार्ता में युद्ध समाप्त करने की संभावनाओं पर चर्चा चाहते हैं। दूसरी ओर, ट्रंप ने अपने बयान में परमाणु निरस्त्रीकरण को प्राथमिकता दी है। इससे संभावित एजेंडे को लेकर दोनों पक्षों के जोर में अंतर दिखाई देता है। यूक्रेन युद्ध पर बातचीत होगी या नहीं, और होगी तो किस दायरे में, यह स्पष्ट नहीं है। किसी भी प्रस्तावित शांति प्रक्रिया में संबंधित देशों की भूमिका और उनकी सहमति महत्वपूर्ण प्रश्न बने हुए हैं।
यूक्रेन ने अपनी भागीदारी पर दिया जोर
यूक्रेन ने ऐसी किसी वार्ता पर आपत्ति जताई है, जिसमें उसके भविष्य पर चर्चा हो और वह स्वयं शामिल न हो। विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने कहा कि यूक्रेन, अमेरिका और रूस की बैठक युद्ध समाप्त करने में सहायक हो सकती है, जबकि रूस, चीन और अमेरिका का अलग प्रारूप विपरीत असर डाल सकता है। क्रेमलिन ने भी कहा है कि अंतिम समाधान के लिए कीव की भागीदारी आवश्यक होगी। हालांकि, वार्ता के प्रारूप और प्रतिनिधित्व पर मतभेद बने हुए हैं। फिलहाल ऐसा कोई साझा ढांचा घोषित नहीं हुआ है, जिसे सभी संबंधित पक्षों ने स्वीकार किया हो।
परमाणु वार्ता पर चीन का अलग रुख
परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रश्न पर चीन पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है। चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसकी परमाणु क्षमता अमेरिका और रूस के स्तर की नहीं है। इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में उसे समान आधार पर त्रिपक्षीय परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता में शामिल करने की मांग उचित और व्यावहारिक नहीं है। यह रुख संभावित बातचीत के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। तीनों नेताओं की मुलाकात पर सहमति बन भी जाए, तब भी हथियार नियंत्रण की शर्तों और जिम्मेदारियों पर साझा समझ बनाना अलग प्रक्रिया होगी। केवल बैठक से किसी परमाणु समझौते की गारंटी नहीं मिलती।
वैश्विक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगी बातचीत
यदि यह बैठक होती है तो परमाणु जोखिम कम करने, आपसी संवाद बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय तनावों पर चर्चा का अवसर मिल सकता है। यह संभावित महत्व है; किसी परिणाम या समझौते का पूर्वानुमान अभी नहीं लगाया जा सकता। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात तीनों देशों की औपचारिक सहमति है। बैठक का एजेंडा, यूक्रेन से जुड़े विषयों का दायरा और परमाणु वार्ता पर चीन की स्थिति आगे की दिशा तय करेंगे। ट्रंप के बयान ने कूटनीतिक संभावनाओं को चर्चा में जरूर ला दिया है, लेकिन अंतिम तस्वीर संबंधित सरकारों की आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही स्पष्ट होगी।
Next Story





