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ट्रम्प ने सैन्य अदालत के दोषी को गोली मारने का आदेश दिया, 1961 के बाद अमेरिकी सैन्य व्यवस्था में पहली ऐसी सजा
jantaserishta.com
6 Oct 2026 4:43 PM IST

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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पूर्व अमेरिकी सैनिक और सैन्य मनोचिकित्सक निदाल हसन को गोली मारकर मौत की सजा देने की मंजूरी दे दी है। पेंटागन ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। अगर यह सजा लागू होती है, तो 1961 के बाद अमेरिकी सैन्य न्याय व्यवस्था में यह मौत की सजा पाने वाला पहला मामला होगा।
सैन्य व्यवस्था में आखिरी बार प्राइवेट जॉन ए. बेनेट को 1961 में मौत की सजा दी गई थी। हसन के मामले में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब सेना के सचिव को सजा की तारीख और स्थान तय करना होगा। हालांकि, कानूनी अपील के चलते सजा पर रोक लगने की संभावना भी बनी हुई है।
2009 में फोर्ट हुड में की थी गोलीबारी
5 नवंबर 2009 को मेजर निदाल हसन निजी पिस्तौल लेकर टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पहुंचा था। वहां उसने सैनिकों और अन्य लोगों पर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। इस घटना में 13 लोगों की मौत हुई थी। इसे अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुई सबसे घातक सामूहिक गोलीबारी बताया गया।
उस समय अमेरिका अफगानिस्तान और इराक में युद्ध में शामिल था। हसन ने बाद में कहा था कि वह इन युद्धों को गलत और अनैतिक मानता था और उसने यह हमला जिहाद के लिए किया था।
गोलीबारी के दौरान हसन भी घायल हुआ था और कमर के नीचे से लकवाग्रस्त हो गया। सैन्य अदालत में उसने हत्याओं की बात स्वीकार की। साल 2013 में उसे पहले से हत्या की योजना बनाने और हत्या के प्रयास से जुड़े कुल 45 मामलों में दोषी ठहराया गया।
हमले पर नहीं जताया पछतावा
निदाल हसन ने अपने किए पर पछतावा नहीं जताया। सैन्य मानसिक स्वास्थ्य पैनल के सामने उसने कहा था कि वह चाहता था कि हमले के दौरान उसकी भी मौत हो जाती, ताकि वह शहीद बन सके। उसने यह भी कहा था कि अगर उसे मौत की सजा दी जाती है, तब भी वह खुद को शहीद मानेगा।
हसन का जन्म वर्जीनिया के अर्लिंगटन में फिलिस्तीनी मूल के मुस्लिम माता-पिता के घर हुआ था। उसने वर्जीनिया टेक से पढ़ाई की और 1997 में सैन्य मेडिकल स्कूल की ट्रेनिंग शुरू की थी।
हमले से पहले के कुछ वर्षों में इस्लाम को लेकर उसके विचार अधिक कट्टर होते गए थे। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने हसन के मकसद को जिहादी बताते हुए उसे आतंकवादी कहा। हालांकि, उसके खिलाफ आतंकवाद से जुड़ी धाराओं के तहत मुकदमा नहीं चलाया गया था।
सैन्य डेथ रो में चार कैदी
अमेरिकी सैन्य व्यवस्था में राष्ट्रपति की पुष्टि के बिना किसी कैदी को मौत की सजा नहीं दी जा सकती। हसन के मामले में ट्रम्प की मंजूरी के बाद अगला कदम सेना के सचिव द्वारा सजा की तारीख और जगह तय करना है। इसके बाद कानूनी अपील के कारण प्रक्रिया रुक भी सकती है।
अमेरिकी सैन्य डेथ रो में फिलहाल चार कैदी मौत की सजा का इंतजार कर रहे हैं। इससे पहले राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने 2008 में प्राइवेट रोनाल्ड ए. ग्रे की मौत की सजा को मंजूरी दी थी। ग्रे को 1980 के दशक में बलात्कार और हत्याओं की एक श्रृंखला में दोषी ठहराया गया था। हालांकि, एक जज ने उसकी सजा पर रोक लगाकर उसे संघीय अदालत में अपील के लिए अतिरिक्त समय दिया था। 2026 तक ग्रे सैन्य डेथ रो में है।
गोली मारकर मौत की सजा बेहद दुर्लभ
अमेरिका में मौत की सजा देने का सबसे सामान्य तरीका घातक इंजेक्शन है। 1976 में मौत की सजा फिर शुरू होने के बाद से 1,488 लोगों को इंजेक्शन के जरिए मौत दी जा चुकी है।
इसके मुकाबले गोली मारकर मौत की सजा सिर्फ छह लोगों को दी गई है। ऐसे में हसन का मामला लागू होने पर गोली मारकर दी जाने वाली मौत की सजा के बेहद दुर्लभ मामलों में शामिल होगा।
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