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वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को लेकर नया दावा किया है। जॉर्जिया के पेरी में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित चुनावी रैली में उन्होंने कहा कि अमेरिका को दोनों मिल गए हैं। ट्रंप ने डेनमार्क के साथ हुए समझौते का उल्लेख करते हुए ग्रीनलैंड को अमेरिकी उपलब्धि के रूप में पेश किया। हालांकि, उपलब्ध समझौतों और रिपोर्टों के मुताबिक, ग्रीनलैंड की संप्रभुता अमेरिका को हस्तांतरित नहीं हुई है। वेनेजुएला भी अमेरिका का हिस्सा नहीं बना है।
शनिवार, 24 अक्टूबर को स्थानीय समयानुसार हुई रैली में ट्रंप ने समर्थकों से कहा कि डेनमार्क ने ग्रीनलैंड अमेरिका को दे दिया है। उन्होंने पहले जताई गई उन आशंकाओं का भी जिक्र किया कि अमेरिका इस आर्कटिक द्वीप पर हमला कर सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि इसके बजाय समझौता हुआ है। उन्होंने इस कथित उपलब्धि की तुलना एक बड़ी संपत्ति के सौदे से करते हुए इसे इतिहास की सबसे बड़ी रियल एस्टेट डील के तौर पर प्रस्तुत किया। ट्रंप ने अपने संबोधन में वेनेजुएला का नाम भी लिया और समर्थकों से पूछा कि ग्रीनलैंड तथा वेनेजुएला में किसे बड़ी उपलब्धि माना जाए। इसके बाद उन्होंने कहा, “हमें दोनों मिल गए हैं।” राष्ट्रपति ने यह आरोप भी लगाया कि मीडिया ने संबंधित समझौते को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। उनके बयान में सुरक्षा सहयोग, आर्थिक हितों और किसी क्षेत्र के स्वामित्व को एक साथ प्रस्तुत किया गया, जबकि उपलब्ध दस्तावेज इनकी अलग-अलग स्थिति बताते हैं।
ट्रंप का यह बयान अमेरिका और डेनमार्क के बीच 22 अक्टूबर को हुए एक समझौता ज्ञापन के बाद आया है। इसका उद्देश्य समुद्री उद्योग में सहयोग बढ़ाना और अमेरिकी जहाज निर्माण क्षमता को मजबूत करना है। इस व्यवस्था का ग्रीनलैंड की संप्रभुता हस्तांतरित करने से संबंध नहीं है। समझौते के दायरे में स्पष्ट किया गया है कि यह ग्रीनलैंड और फरो आइलैंड्स पर लागू नहीं होता। इसलिए इस दस्तावेज को ग्रीनलैंड अमेरिका को सौंपे जाने का आधार नहीं माना जा सकता। समझौता ज्ञापन की प्रकृति भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, यह दोनों देशों के राजनीतिक इरादों को दर्ज करता है और अंतरराष्ट्रीय संधि नहीं है। इससे कोई नया कानूनी अधिकार या दायित्व पैदा नहीं होता। दस्तावेज के तहत खरीद, ठेका देने अथवा दोनों पक्षों के बीच धन हस्तांतरण की अनुमति भी नहीं दी गई है। दोनों देशों को अपने खर्च स्वयं उठाने हैं। ये प्रावधान राष्ट्रपति द्वारा इस्तेमाल की गई संपत्ति सौदे वाली भाषा से अलग तस्वीर सामने रखते हैं।
ग्रीनलैंड को लेकर सितंबर में हुए सुरक्षा समझौते को भी इस घटनाक्रम से अलग समझना जरूरी है। अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने 22 सितंबर को आर्कटिक तथा उत्तरी अटलांटिक में सुरक्षा सहयोग मजबूत करने के लिए समझौता किया था। अमेरिकी पक्ष ने इसे क्षेत्र में अपने सुरक्षा हितों और सैन्य पहुंच के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। इसमें स्थायी सैन्य अड्डों से जुड़े अधिकारों का भी उल्लेख किया गया। लेकिन सुरक्षा संबंधी अधिकार मिलने का अर्थ क्षेत्र का अमेरिकी भूभाग बन जाना नहीं है। इसी समझौते पर डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन के वक्तव्य में डेनमार्क साम्राज्य की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की बात कही गई थी। साथ ही ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को भी स्वीकार किया गया। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने समझौते को साझा सुरक्षा और सहयोग मजबूत करने वाला कदम बताया था। इन वक्तव्यों से स्पष्ट है कि संबंधित पक्ष इसे सुरक्षा साझेदारी के रूप में प्रस्तुत कर रहे थे, संप्रभुता हस्तांतरण के रूप में नहीं।
ग्रीनलैंड में प्राकृतिक संसाधनों की खोज को लेकर भी ट्रंप पहले बयान दे चुके हैं। उन्होंने 13 अक्टूबर को तेल, गैस और खनिजों की बड़े स्तर पर खोज की तैयारी का दावा किया था। उनके अनुसार, द्वीप के संसाधन और भौगोलिक स्थिति अमेरिका तथा यूरोप की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, डेनमार्क की ओर से यह स्पष्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है कि सुरक्षा समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड के प्राकृतिक संसाधनों पर विशेष अधिकार नहीं मिले हैं।
वेनेजुएला को लेकर भी ट्रंप का बयान अमेरिकी स्वामित्व का प्रमाण नहीं है। रैली में उन्होंने वहां के तेल संसाधनों और अमेरिकी प्रभाव का उल्लेख किया, लेकिन किसी देश पर प्रभाव या उसके साथ आर्थिक व्यवस्था होने से वह अमेरिकी क्षेत्र नहीं बन जाता। उपलब्ध रिपोर्टों ने स्पष्ट किया है कि वेनेजुएला की संप्रभुता अमेरिका को हस्तांतरित नहीं हुई है। राष्ट्रपति के दावे को इसी तथ्य के साथ पढ़ना आवश्यक है। फिलहाल इस घटनाक्रम का मुख्य तथ्य यह है कि ट्रंप ने चुनावी मंच से दोनों क्षेत्रों को अमेरिकी उपलब्धि बताया है। ग्रीनलैंड के मामले में सुरक्षा सहयोग बढ़ा है, लेकिन डेनमार्क की संप्रभुता और स्थानीय लोगों का आत्मनिर्णय का अधिकार कायम है। अक्टूबर का समुद्री सहयोग समझौता भी ग्रीनलैंड को अपने दायरे से बाहर रखता है। ऐसे में दोनों क्षेत्रों के अमेरिका को मिल जाने की बात एक राजनीतिक दावा है, जिसकी पुष्टि उपलब्ध दस्तावेज नहीं करते।
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