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बाज नहीं आया तुर्किये, UN में एर्दोगन ने फिर उठाया कश्मीर मुद्दा

nidhi
23 Sept 2026 7:49 AM IST
बाज नहीं आया तुर्किये, UN में एर्दोगन ने फिर उठाया कश्मीर मुद्दा
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UN के मंच से एर्दोगन ने फिर छेड़ा कश्मीर का मुद्दा
न्यूयॉर्क : तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया है। न्यूयॉर्क में 22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने कहा कि दक्षिण एशिया में कश्मीर समेत सभी विवादों का समाधान बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों का भी उल्लेख किया।
एर्दोगन ने अपने संबोधन में कहा कि दक्षिण एशिया में मौजूद विवादों को बातचीत के रास्ते हल करना महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक कश्मीर मुद्दे को भी इसी प्रक्रिया के तहत देखा जाना चाहिए। तुर्किये के राष्ट्रपति इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से कई बार कश्मीर का जिक्र कर चुके हैं। उनके हालिया बयान को अंकारा के लंबे समय से चले आ रहे रुख की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है। कश्मीर को लेकर भारत का रुख लंबे समय से स्पष्ट रहा है। नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताता आया है। भारत का यह भी कहना है कि पाकिस्तान के साथ लंबित मुद्दों को द्विपक्षीय तरीके से निपटाया जाना चाहिए और इसमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है। तुर्किये की ओर से कश्मीर पर की गई पिछली टिप्पणियों पर भी भारत आपत्ति जता चुका है।
यह पहली बार नहीं है जब एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा उठाया हो। पिछले वर्षों में भी उनके UNGA संबोधनों में कश्मीर का उल्लेख होता रहा है। हालांकि 2024 के संयुक्त राष्ट्र महासभा संबोधन में उन्होंने जम्मू-कश्मीर का जिक्र नहीं किया था, जबकि 2025 में उन्होंने फिर इस विषय पर बात की थी। एर्दोगन के भाषण में कश्मीर के अलावा गाजा और संयुक्त राष्ट्र में सुधार जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से शामिल रहे। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना में बदलाव की मांग दोहराई और कहा कि वैश्विक संस्था को शांति एवं सुरक्षा के अपने दायित्व को अधिक प्रभावी ढंग से निभाने की जरूरत है।
तुर्किये के राष्ट्रपति के ताजा बयान के बाद कश्मीर का मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में आ गया है। एक तरफ एर्दोगन संयुक्त राष्ट्र चार्टर और बातचीत के जरिए समाधान की बात कर रहे हैं, वहीं भारत का घोषित रुख है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों पर उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं किया जा सकता तथा भारत-पाकिस्तान के बीच लंबित विषयों में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है।
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