
x
शक्तिशाली भूकंप के बाद तिब्बत में फिर झटके
नई दिल्ली: तिब्बत में शनिवार, 24 अक्टूबर को रात से सुबह के बीच करीब पांच घंटे के भीतर तीन बार भूकंप आया। इनकी तीव्रता 4.0, 4.6 और 4.5 दर्ज की गई। सबसे तेज झटका रात 2 बजकर 7 मिनट पर आया। इसी दौरान भारत, अफगानिस्तान और चीन के अन्य हिस्से में भी अलग-अलग भूकंप दर्ज किए गए। ताजा भूकंपीय गतिविधियां ऐसे समय सामने आई हैं, जब तिब्बत में गुरुवार को आए शक्तिशाली भूकंप के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम चल रहा है।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, तिब्बत में पहला भूकंप भारतीय समयानुसार रात 1 बजकर 8 मिनट पर आया। इसकी तीव्रता 4.0 और गहराई 15 किलोमीटर थी। इसके बाद रात 2 बजकर 7 मिनट पर 4.6 तीव्रता का दूसरा भूकंप दर्ज हुआ, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर रही। सुबह 5 बजकर 38 मिनट पर तीसरा भूकंप आया, जिसकी तीव्रता 4.5 मापी गई। इस तरह पहले और तीसरे भूकंप के बीच लगभग साढ़े चार घंटे का अंतर रहा।
शनिवार तड़के भारत के अलग-अलग इलाकों में भी हल्की भूकंपीय गतिविधि दर्ज हुई। जम्मू-कश्मीर के डोडा में सुबह 3 बजकर 11 मिनट पर 2.8 तीव्रता का भूकंप आया। इसके बाद कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर में सुबह 3 बजकर 29 मिनट पर 2.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। अफगानिस्तान में सुबह 3 बजकर 39 मिनट पर 4.0 और चीन में सुबह 4 बजकर 9 मिनट पर 4.6 तीव्रता का भूकंप आया। इन घटनाओं को समझते समय यह अंतर जरूरी है कि अलग-अलग स्थानों पर भूकंप दर्ज होने और किसी एक भूकंप के झटके दूसरे देश तक महसूस होने का अर्थ अलग होता है। उपलब्ध रिकॉर्ड अलग-अलग समय और स्थान पर हुई घटनाएं दिखाते हैं। इसलिए तिब्बत के इन्हीं तीन भूकंपों के झटके भारत और अफगानिस्तान तक महसूस होने की बात की पुष्टि इन आंकड़ों से नहीं होती। इसी तरह केवल समय में नजदीकी होने से सभी घटनाओं के बीच सीधा संबंध तय नहीं किया जा सकता।
तिब्बत में ताजा झटकों से पहले गुरुवार, 22 अक्टूबर की रात नागकू क्षेत्र में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था। स्थानीय अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार तक इसमें 16 लोगों की मौत और 76 लोगों के घायल होने की जानकारी थी। प्रभावित क्षेत्रों में बिजली तथा संचार सेवाओं को बहाल करने के प्रयास जारी थे। अधिकारियों ने आगाह किया था कि पहले भूकंप में क्षतिग्रस्त मकानों की दरकी या झुकी दीवारें बाद के झटकों में गिर सकती हैं।
भूकंप प्रभावित नागकू क्षेत्र में कम से कम 339 मकान ढहने की जानकारी सामने आई। बारह हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। ऊंचाई वाले दूरस्थ इलाकों और कम तापमान के कारण राहत अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। बचाव दल प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर तलाश कर रहे हैं। लोगों के लिए अस्थायी आवास, तंबू, बिस्तर और गर्म कपड़ों जैसी जरूरी सामग्री पहुंचाई गई है। अधिकारियों ने बाद के झटकों के साथ चट्टानें खिसकने के खतरे पर भी चिंता जताई है।
गुरुवार के मुख्य भूकंप का केंद्र उत्तरी तिब्बत के ऊंचाई वाले कम आबादी के क्षेत्र में था। शुरुआती रिपोर्टों में आसपास के गांवों में मकानों में दरारें और लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। घटनास्थल से आए दृश्यों में लोग घरों से निकलकर खुले स्थानों या वाहनों में शरण लेते दिखाई दिए। मुख्य भूकंप के बाद भी छोटे झटके दर्ज हुए थे। इससे पहले से प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित आश्रय और राहत सामग्री की उपलब्धता अहम बनी हुई है।
शनिवार के तीनों भूकंपों से हुए नुकसान का अलग और स्पष्ट आकलन उपलब्ध स्रोतों में सामने नहीं आया है। इसलिए गुरुवार के भूकंप में हुई मौतों और मकानों की क्षति को शनिवार के ताजा झटकों का नुकसान बताना सही नहीं होगा। फिलहाल खबर के दो प्रमुख पहलू हैं—तिब्बत में कुछ घंटों के भीतर बार-बार दर्ज हुई भूकंपीय गतिविधि और पहले से आपदा प्रभावित इलाकों में जारी राहत अभियान। आगे की स्थिति का आकलन नए आधिकारिक विवरण तथा स्थानीय स्तर पर नुकसान की पुष्टि के आधार पर होगा।
Next Story





