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ये है बेहद दुर्लभ एम्बेग्रेस, जानिए आखिर ऐसा क्या है व्हेल की उल्टी में जो बिकती है करोड़ों में
Apurva Srivastav
5 Jun 2021 12:27 PM IST

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क्या आप कभी सोच सकते हो कि किसी मछली की उल्टी भी करोड़ों रुपये में बिक सकती है
क्या आप कभी सोच सकते हो कि किसी मछली की उल्टी भी करोड़ों रुपये में बिक सकती है? व्हेल मछली की उल्टी करोड़ों रुपये की बिकती है. हाल ही में यमन के 35 मछुआरों के हाथ यही 'खजाना' लगा, जिसकी बाजार में कीमत करीब 11 करोड़ रुपये है. Ambergris को स्पर्म व्हेल का 'वॉमिट गोल्ड' (Vomit Gold) भी कहा जाता है. इसकी कीमत 35 लाख रुपये प्रति किलो तक हो सकती है.
सुनने में अजीब लगता है, लेकिन स्पर्म व्हेल की उल्टी का इस्तेमाल महंगे परफ्यूम बनाने में किया जाता है. दरअसल जब स्पर्म व्हेल किसी कैटलफिश, ऑक्टोपस या किसी दूसरे समुद्री जीव को खाती है तो इसके पाचन तंत्र में खास तरह का स्राव होता है. ऐसा इसलिए होता है ताकी नुकीले दांत या अंग से उसके शरीर को नुकसान न पहुंचे. बाद में स्पर्म व्हेल गैर जरूरी स्राव को उल्टी के जरिए अपने शरीर से निकाल देती हैं. इस दौरान वह अपने शरीर से एम्बेग्रेस को निकालती है. सूरज की रोशनी और समुद्र का खारा पानी मिलने के बाद उल्टी एम्बेग्रेस बन जाता है.
बेहद दुर्लभ एम्बेग्रेस
बताया जाता है कि एम्बेग्रेस की गंध बहुत बुरी होती है, लेकिन हवा के संपर्क में इसकी गंध मीठी हो जाती है. दरअसल एम्बेग्रेस परफ्यूम की सुगंध को हवा में उड़ने से रोकता है. एम्बेग्रेस बेहद दुर्लभ है और इसी वजह से इसकी कीमत भी बहुत ज्यादा है. इसकी कीमत सोने से भी ज्यादा होती है.
अरब देशों में भारी मांग
अरब देशों में व्हेल की उल्टी की मांग काफी ज्यादा है. वो इसकी ज्यादा से ज्यादा कीमत अदा करने के लिए भी तैयार रहते हैं. हालांकि हड्डियों, तेल और एम्बेग्रेस के लिए व्हेल मछली का बड़े पैमाने का शिकार होता है. एम्बेग्रेस सदियों से न सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में परफ्यूम और दवाओं के तौर पर इस्तेमाल हो रहा है. इतिहास के कई यात्रा वृतांतों में इसका जिक्र है. आयुर्वेद के अलावा यूनानी दवाओं में भी इसका उपयोग होता है.
गैर कानूनी है उल्टी
एम्बेग्रेस की बिक्री वैसे गैर कानूनी है. दरअसल स्पर्म व्हेल लुप्तप्राय प्रजाति है. स्पर्म व्हेल को 1970 में लुप्तप्राय प्रजाति घोषित किया था. इसके गैर कानून व्यापार में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
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