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चार फीट लंबे सोने के झुमके देख उड़ जाएंगे होश, 55 कारीगरों ने बनाए, दो वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम; देखें VIDEO
Shubhra Nandy
25 Oct 2026 11:13 AM IST

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16 किलो है झुमके का वजन
दुबई : सोने के गहनों का शौक रखने वालों के लिए दुबई से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक ज्वेलरी कंपनी ने सोने के ऐसे विशाल झुमके तैयार किए हैं, जिनका कुल वजन 16 किलो से भी ज्यादा है। इन झुमकों की लंबाई करीब चार फीट है और इन्हें तैयार करने में 55 कारीगरों ने हजारों घंटे मेहनत की है। खास बात यह है कि इन अनोखे झुमकों ने एक साथ दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। पारंपरिक भारतीय डिजाइन से प्रेरित इन झुमकों का नाम 'मयूर सहस्र' रखा गया है।
16.514 किलो वजन, 22 कैरेट सोने से बने झुमके
दुबई की प्रसिद्ध ज्वेलरी कंपनी जॉयअलुक्कास ज्वेलरी ने इन विशाल झुमकों को तैयार किया है। कंपनी ने इस अनोखी जोड़ी को 'मयूर सहस्र' नाम दिया है, जिसका अर्थ एक हजार मोर होता है। दोनों झुमकों का संयुक्त वजन 16.514 किलोग्राम है। इन्हें 22 कैरेट सोने से तैयार किया गया है। इतने अधिक वजन और असाधारण आकार के कारण ये झुमके सामान्य आभूषणों से बिल्कुल अलग हैं। आमतौर पर सोने के झुमकों का वजन कुछ ग्राम होता है, लेकिन इस जोड़ी का वजन कई हजार ग्राम है। यही वजह है कि इन्हें पहनने के बजाय प्रदर्शनी के लिए तैयार किया गया है।
एक ही जोड़ी ने बनाए दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
इन झुमकों को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से दो अलग-अलग श्रेणियों में मान्यता मिलने की जानकारी दी गई है। पहला रिकॉर्ड दुनिया के सबसे भारी सोने के झुमकों की जोड़ी के लिए है। दूसरा रिकॉर्ड दुनिया के सबसे बड़े झुमकों की जोड़ी के लिए बताया गया है। इस तरह जॉयअलुक्कास ने एक ही आभूषण डिजाइन के जरिए दो उपलब्धियां हासिल की हैं। इन रिकॉर्डों ने कंपनी की कारीगरी और पारंपरिक भारतीय आभूषण डिजाइन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।
चार फीट लंबे झुमके देखकर रह जाएंगे हैरान
झुमके का कुल वज़न: 16.514 किलोग्राम; सोने की शुद्धता: 22 कैरेट; लंबाई: 1.215 मीटर; व्यास: 68.2 सेंटीमीटर; कारीगरों की संख्या: 55; कुल मैन-आवर्स: 5,840। बताया गया है कि इन बालियों की लंबाई लगभग 1.215 मीटर, यानी करीब चार फीट है, और इनका व्यास लगभग 68.2 सेंटीमीटर है। इनका आकार इतना बड़ा है कि सामान्य आभूषणों की तुलना में ये किसी विशाल कलाकृति जैसे दिखाई देते हैं। इनकी बनावट पारंपरिक भारतीय झुमकों से प्रेरित है, लेकिन आकार और वजन के मामले में ये बिल्कुल अलग हैं।
55 कारीगरों ने महीनों तक की मेहनत
इन विशाल झुमकों को तैयार करना आसान काम नहीं था। जानकारी के अनुसार, इन्हें बनाने के लिए 55 कुशल कारीगरों की टीम ने कई महीनों तक काम किया। इस पूरी प्रक्रिया में कुल 5,840 कार्य घंटे लगे। कारीगरों ने झुमकों की बनावट, नक्काशी और डिजाइन के प्रत्येक हिस्से पर विशेष ध्यान दिया। इतने बड़े आकार में पारंपरिक डिजाइन की बारीकियों को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण काम था।यही वजह है कि इस उपलब्धि को केवल सोने की मात्रा के बजाय कारीगरों की तकनीकी दक्षता और रचनात्मकता से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
मोर के पंखों से प्रेरित है खास डिजाइन
'मयूर सहस्र' नाम के पीछे भारतीय संस्कृति से जुड़ी प्रेरणा है। संस्कृत में मयूर का अर्थ मोर और सहस्र का अर्थ एक हजार होता है। भारतीय परंपरा में मोर को सुंदरता और भव्यता का प्रतीक माना जाता है। इसी अवधारणा को ध्यान में रखते हुए झुमकों के डिजाइन में मोर के पंखों जैसी बारीक आकृतियां तैयार की गई हैं। इनकी बनावट पारंपरिक घंटी के आकार वाले झुमकों से मिलती-जुलती है। सोने पर की गई नक्काशी और विस्तृत सजावट इन्हें विशेष रूप प्रदान करती है। कंपनी का उद्देश्य भारतीय आभूषण कला की पारंपरिक विशेषताओं को बड़े और अनोखे रूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत करना बताया गया है।
क्या इन झुमकों को खरीदा जा सकता है?
इतने विशाल झुमकों को देखकर कई लोगों के मन में सवाल उठ सकता है कि क्या इन्हें खरीदा भी जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी ने इन्हें सामान्य बिक्री के लिए तैयार नहीं किया है। इन्हें विशेष उपलब्धि और कारीगरी के नमूने के तौर पर प्रदर्शित किया जा रहा है। दुबई गोल्ड डिस्ट्रिक्ट स्थित 'ज्वेल ऑफ जॉय' शोरूम में इन्हें रखा गया है। यहां आने वाले लोग इन झुमकों को देख सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, इन्हें देखने के लिए प्रवेश शुल्क नहीं रखा गया है। हालांकि, शोरूम जाने से पहले प्रदर्शन की वर्तमान स्थिति और समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।
दुबई में आकर्षण का केंद्र बने विशाल झुमके
दुबई पहले से ही सोने और आभूषणों के अंतरराष्ट्रीय कारोबार के लिए प्रसिद्ध है। यहां दुनिया भर से पर्यटक और खरीदार सोने के गहने देखने और खरीदने पहुंचते हैं। ऐसे में 16 किलो से अधिक वजन वाले झुमकों का प्रदर्शन आभूषण प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण बन गया है। इन झुमकों ने यह भी दिखाया है कि पारंपरिक भारतीय आभूषण डिजाइन को आधुनिक तकनीक और बड़े पैमाने की कारीगरी के साथ किस तरह प्रस्तुत किया जा सकता है। 'मयूर सहस्र' केवल एक विशाल आभूषण नहीं, बल्कि उन 55 कारीगरों के कौशल का उदाहरण भी है, जिन्होंने हजारों घंटे मेहनत कर इसे तैयार किया।
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