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डॉक्टरों में डर का माहौल पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन ने दी बड़ी चेतावनी

Ratna Netam
21 Oct 2026 4:21 PM IST
डॉक्टरों में डर का माहौल पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन ने दी बड़ी चेतावनी
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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। देश में डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कथित हिंसा, उत्पीड़न और आपराधिक मामले दर्ज होने की बढ़ती घटनाओं पर पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन (PMA) ने कड़ी नाराजगी जताई है। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित नहीं किया गया, तो देश की पहले से दबाव झेल रही स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट में पड़ सकती है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की 21 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी के डर से गंभीर मरीजों का इलाज करने में हिचकिचाने लगे हैं। इससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
डॉक्टरों के खिलाफ बढ़ती घटनाओं से चिंता
पाकिस्तान में हाल के दिनों में स्वास्थ्यकर्मियों से जुड़ी कई घटनाओं ने चिकित्सा संगठनों की चिंता बढ़ा दी है। लाहौर में एक महिला डॉक्टर के साथ कथित मारपीट, हैदराबाद के लियाकत यूनिवर्सिटी अस्पताल में डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर और कराची के डॉ. रूथ फाउ सिविल अस्पताल में चिकित्सा कर्मचारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई जैसे मामलों ने विवाद खड़ा कर दिया है।पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों को सुरक्षा और सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए। संगठन ने आशंका जताई कि लगातार कानूनी विवादों से चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
मेडिकल एसोसिएशन ने दी गंभीर चेतावनी
पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन के डॉ. अब्दुल गफूर शोरो ने कहा कि देशभर के स्वास्थ्यकर्मी मनोवैज्ञानिक दबाव, सार्वजनिक अपमान और प्रशासनिक उत्पीड़न जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि इस माहौल के कारण अनुभवी विशेषज्ञ और युवा डॉक्टर चिकित्सा पेशा छोड़ने या विदेश जाने पर विचार कर रहे हैं।शोरो के मुताबिक, डॉक्टरों के खिलाफ हत्या जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जाने से चिकित्सा पेशे में भय का वातावरण पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो पाकिस्तान में स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन और कठिन हो सकता है।
गंभीर मरीजों का इलाज करने से डर रहे डॉक्टर
मेडिकल एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि गंभीर मरीजों का इलाज करने के दौरान किसी प्रतिकूल परिणाम पर आपराधिक मुकदमे का डर डॉक्टरों के फैसलों को प्रभावित कर सकता है।संगठन के अनुसार, कई चिकित्सक जोखिम वाले ऑपरेशन और गंभीर मरीजों को भर्ती करने से पहले संभावित कानूनी कार्रवाई को लेकर चिंतित रहते हैं।ऐसी परिस्थिति में डॉक्टर रक्षात्मक चिकित्सा पद्धति अपनाने को मजबूर हो सकते हैं। इसका मतलब है कि वे मरीज की चिकित्सकीय जरूरत के साथ कानूनी जोखिम से बचने को भी प्राथमिकता देने लगते हैं।एसोसिएशन का कहना है कि इसका सबसे अधिक नुकसान उन मरीजों को हो सकता है, जिन्हें तत्काल इलाज और आपातकालीन चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है।
हैदराबाद में डॉक्टरों के खिलाफ मामले पर अदालत का आदेश
हैदराबाद के लियाकत यूनिवर्सिटी अस्पताल में डेंगू से पीड़ित 17 वर्षीय मरीज की अक्टूबर 2025 में मौत के बाद डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।इस मामले में 27 डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की खबर सामने आई थी। हालांकि, सिंध हाई कोर्ट ने 20 अक्टूबर 2026 को 24 डॉक्टरों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर अस्थायी रोक लगा दी।मरीज के पिता ने इलाज में कथित लापरवाही का आरोप लगाया था, जबकि संबंधित डॉक्टरों ने आरोपों को चुनौती दी है। अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई लगभग दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।
सरकार और न्यायपालिका से हस्तक्षेप की मांग
पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश और प्रांतीय सरकारों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।संगठन ने कहा कि चिकित्सा संबंधी मौतों या जटिल मामलों में डॉक्टरों के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराएं लगाने से पहले स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड अथवा स्वास्थ्य आयोग की तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए।इसके अलावा अस्पतालों, आपातकालीन वार्डों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून लागू करने की मांग भी की गई है।एसोसिएशन ने स्वास्थ्य संस्थानों के प्रशासनिक पदों पर योग्य चिकित्सा विशेषज्ञों को प्राथमिकता देने और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित कर नीतियों की समीक्षा करने का आग्रह किया है।
मरीजों और डॉक्टरों दोनों की सुरक्षा जरूरी
पाकिस्तान में सामने आई इन घटनाओं ने डॉक्टरों की सुरक्षा के साथ मरीजों के अधिकारों पर भी बहस तेज कर दी है।चिकित्सा संगठनों का कहना है कि इलाज में वास्तविक लापरवाही के मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन प्रत्येक प्रतिकूल चिकित्सकीय परिणाम को आपराधिक कृत्य नहीं माना जाना चाहिए।साथ ही मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों का पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन की चेतावनी ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा, जवाबदेही और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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