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दुनिया के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल का होगा खुलासा, फाइलें होंगी पब्लिक, नेता-बिजनेसमैन का काला चिट्ठा खुलेगा?
jantaserishta.com
18 Dec 2025 8:46 AM IST

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वॉशिंगटन डीसी: ट्रम्प प्रशासन 19 दिसंबर को कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दशकों पुराने सरकारी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर सकता है। इस दौरान एपस्टीन केस से जुड़े सभी ईमेल, तस्वीरें और डॉक्यूमेंट्स पब्लिक होंगे। इसका मकसद एपस्टीन के पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने लाना है।
आरोप है कि इस नेटवर्क में नाबालिग लड़कियों का शोषण हुआ और दुनिया के कई बेहद ताकतवर लोग इससे जुड़े थे। इससे पहले इस केस से जुड़ीं 19 तस्वीरें 12 दिसंबर को पब्लिक हुई थीं। इसमें 3 तस्वीरें ट्रम्प की हैं। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, अरबपति बिल गेट्स जैसे बड़ी हस्तियों की तस्वीरें भी सार्वजनिक हुईं।
अब एपस्टीन से जुड़े सभी रिकॉर्ड पब्लिक होने में सिर्फ 2 दिन बाकी हैं। ऐसे में अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में राजनीतिक और कारोबारी हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब तक किसी भारतीय नागरिक या भारतीय नेता-उद्योगपति का नाम आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है।
भारतीय नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया है कि इसमें कुछ भारतीय मंत्री, पूर्व मंत्री और मौजूदा सांसदों के नाम सामने आ सकते हैं। हालांकि अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है। लेकिन एपस्टीन के संबंध अमेरिका के बाहर के देशों के नेताओं और बिजनेसमैन से भी बताए जाते हैं, इसलिए पूरी दुनिया की नजर इन फाइलों पर टिकी है।
जेफ्री एपस्टीन की संपत्ति से जारी 19 तस्वीरों में 9 बड़ी हस्तियों के नाम सामने आए हैं। ये तस्वीरें सीधे तौर पर किसी को अपराधी साबित नहीं करतीं, लेकिन इन्हें एपस्टीन के साथ दिखाती हैं जिससे विवाद और सवाल खड़े हो रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रम्प (अमेरिकी राष्ट्रपति)
बिल क्लिंटन (पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति)
बिल गेट्स (अरबपति)
प्रिंस एंड्रयू (ब्रिटिश किंग के भाई)
स्टीव बैनन (ट्रम्प के पूर्व सलाहकार)
लैरी समर्स (हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष)
वुडी एलन (फिल्म निर्माता)
रिचर्ड ब्रैनसन (बिजनेसमैन)
एलन डर्शोविट्ज (मशहूर वकील)
पिछले महीने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों ने एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों को पब्लिक करने वाला एक्ट भारी बहुमत से पास कर दिया था। हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स ने बिल को 427-1 के अंतर से मंजूरी दी, जबकि सीनेट ने भी इसे बिना विरोध सर्वसम्मति से पारित कर दिया।
दरअसल, जब कोई बिल संसद के दोनों सदनों से पास हो जाता है, तो वह राष्ट्रपति के पास जाता है। यदि ट्रम्प चाहते तो इस पर साइन नहीं कर सकते थे, चूंकि दोनों सदन में यह बहुत अंतर से पास हुआ था। ऐसे में ट्रम्प के पास कोई विकल्प नहीं बचा था।
ट्रम्प यदि इस बिल पर वीटो भी कर देते तो अमेरिकी संसद इसे दो-तिहाई बहुत से ओवरराइड कर सकती थी। यही वजह है कि राष्ट्रपति ट्रम्प को 19 नवंबर को इस पर दस्तखत करना पड़ा था।
अब नियम के मुताबिक 30 दिन के भीतर न्याय विभाग (DOJ) को एपस्टीन से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करनी हैं। यह तारीख 18 दिसंबर को पूरी हो रही है।
कुल कितनी फाइलें रिलीज होंगी, इसका कोई तय या आधिकारिक आंकड़ा अभी घोषित नहीं किया गया है, लेकिन यह आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता है।
न्याय विभाग खुद कह चुका है कि उसके पास एपस्टीन से जुड़ा एक ‘बहुत बड़ा आर्काइव’ है, यानी फाइलों की संख्या हजारों से लेकर लाखों पेज तक हो सकती है।
इसकी शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया।
जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है।
धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई।
मामले की जांच से पता चला कि एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में शानदार विला है। एपस्टीन यहां हाई-प्रोफाइल पार्टियां करता था, जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल होती थीं।
एपस्टीन अपने निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ से पार्टियों में कम उम्र की लड़कियां लेकर आता था। वह लड़कियों को पैसों-गहनों का लालच और धमकी देकर मजबूर करता था। इसमें एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल उसका साथ देती थी।
हालांकि शुरुआती जांच के बाद भी एपस्टीन को लंबे समय तक जेल नहीं हुई। उसका रसूख इतना था कि 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा सुनाई गई, जिसमें वह जेल से बाहर जाकर काम भी कर सकता था।
साल 2009 में जेल से आने के बाद एपस्टीन लो प्रोफाइल रहने लगा। ठीक 8 साल बाद अमेरिका में मी टू मूवमेंट शुरू हुआ। साल 2017 में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन के खिलाफ कई रिपोर्ट्स छापीं।
इसमें बताया गया कि वाइंस्टीन ने दशकों तक अभिनेत्रियों, मॉडल्स और कर्मचारियों का यौन शोषण किया। इस घटना ने पूरी दुनिया में सनसनी पैदा कर दी। 80 से ज्यादा महिलाओं ने वाइंस्टीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर मी टू (मेरे साथ भी शोषण हुआ) के आरोप लगाए।
इसमें एंजेलीना जोली, सलमा हायेक, उमा थरमन और एश्ले जुड जैसे बड़े नाम थे। इसके बाद लाखों महिलाओं ने सोशल मीडिया पर '#MeToo' लिखकर अपने शोषण की कहानियां शेयर कीं।
इसमें वर्जीनिया ग्रिफे नाम की युवती भी थी। उसने एप्सटीन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उसने दावा किया कि उसके साथ 3 साल तक यौन शोषण हुआ था। इसके बाद करीब 80 महिलाओं ने उसके खिलाफ शिकायत की।
एपस्टीन पर आरोप लगाने वाली एक युवती वर्जीनिया गिफ्रे भी थी। उसने आरोप लगाया था कि वह सिर्फ 16 साल की थी जब वह डोनाल्ड ट्रम्प के क्लब मार-ए-लागो में काम कर रही थी। वहीं पर उसकी मुलाकात गिस्लेन मैक्सवेल से हुई थी।
उसने उसे मसाज थेरेपी का ऑफर दिया था। वह झांसा देकर उसे एपस्टीन के पास ले गई। गिफ्रे ने दावा किया कि उसे एपस्टीन के घर ले जाया गया जहां उसे ‘मालिश’ देने को कहा गया। गिफ्रे ने बताया कि करीब 3 साल तक वह एपस्टीन और मैक्सवेल के लिए काम करती रही।
इस दौरान उसे दुनियाभर की जगहों पर प्राइवेट जेट से भेजा गया और वहां उसे प्रभावशाली लोगों के साथ ‘यौन संबंध’ बनाने को मजबूर किया गया।
गिफ्रे ने ब्रिटेन के शाही परिवार के प्रिंस एंड्रयू पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने उसके साथ जबरदस्ती की, जब वह नाबालिग थी। यह मामला ब्रिटिश मीडिया में बहुत बड़ा विवाद बना।
गिफ्रे ने यह नहीं कहा कि ट्रम्प ने उसका शोषण किया, लेकिन यह बात सामने आई कि मार-ए-लागो क्लब ही वह जगह थी जहां से उसे “भर्ती” किया गया। इसी साल अप्रैल 2025 में वर्जीनिया गिफ्रे की मौत हो गई। इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन इसने एक बार फिर इस केस को चर्चा में ला दिया।
एपस्टीन के खिलाफ दबाव बढ़ रहा था। ऐसे में 6 जुलाई 2019 को न्यूयॉर्क में एपस्टीन को फिर से सेक्स ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया। 23 जुलाई को उसे सेल में बेहोश पाया गया। उसके गले पर निशान थे। माना गया कि किसी ने उसकी जान लेने की कोशिश की थी।
इसके बाद उसकी सुरक्षा बढ़ा दी गई, लेकिन जल्द ही हटा दी गई। 10 अगस्त 2019 को उसी हाई-सिक्योरिटी जेल में एपस्टीन मरा हुआ मिला। आधिकारिक रिपोर्ट में कहा गया कि उसने फांसी लगाकर आत्महत्या की, लेकिन कई मेडिकल और कानूनी एक्सपर्ट्स ने इस पर सवाल उठाए।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया कि एपस्टीन की गर्दन की कुछ हड्डियां टूटी हुई थीं। ये चोटें आमतौर पर गला घोंटने से जुड़ी होती हैं, आत्महत्या से नहीं। जिस दिन एपस्टीन की मौत हुई, उस दिन उसकी सेल के बाहर लगे सुरक्षा कैमरे काम नहीं कर रहे थे और फुटेज गायब हो गए थे।
चूंकि एपस्टीन की क्लाइंट लिस्ट में बड़े-बड़े नाम शामिल थे। ऐसे में माना गया कि राज खुलने के डर से उसकी हत्या कराई गई है। एपस्टीन की मौत के बाद FBI और जस्टिस डिपार्टमेंट ने इसकी जांच शुरू की।
एपस्टीन ने कहा था- ट्रम्प को खूबसूरत लड़कियां पसंद
ट्रम्प और एपस्टीन की मुलाकात एक पार्टी में हुई थी। 2002 में ट्रम्प ने एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा था-
मैं जेफ को 15 साल से जानता हूं, कमाल का आदमी है। हम दोनों को कम उम्र की खूबसूरत लड़कियां पसंद हैं।
यह बयान बाद में ट्रम्प के लिए मुसीबत बन गया। 1992 में ट्रम्प ने फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में एपस्टीन और चीयरलीडर्स के साथ एक पार्टी की। 2019 में NBC ने इसका एक फुटेज जारी किया था।
इसमें ट्रम्प, एपस्टीन को एक महिला की ओर इशारा करते दिखते हैं और झुककर कहते हैं- देखो वह बहुत हॉट है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ट्रम्प ने 7 बार एपस्टीन के प्राइवेट जेट से ट्रैवल किया था।
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