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मध्य एशियाई देशों के साथ रिश्ते मजबूत करेगा अमेरिका

Ratna Netam
19 Oct 2026 3:15 PM IST
मध्य एशियाई देशों के साथ रिश्ते मजबूत करेगा अमेरिका
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समरकंद (उज्बेकिस्तान)। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को मध्य एशियाई देशों के साथ आर्थिक सहयोग, व्यापारिक संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित C5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान उन्होंने मध्य एशिया के पांच देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और मध्य एशियाई देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना तथा व्यापार, निवेश और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर तलाशना रहा।इस महत्वपूर्ण बैठक में उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और किर्गिज़ गणराज्य के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया। अमेरिकी विदेश मंत्री ने सभी देशों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए आपसी सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
सोशल मीडिया पर साझा किया मुलाकात का अनुभव
मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बैठक से संबंधित जानकारी साझा की। उन्होंने मध्य एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों से हुई मुलाकात पर प्रसन्नता व्यक्त की।रुबियो ने लिखा, "C5 देशों के सभी विदेश मंत्रियों से मिलकर बहुत अच्छा लगा।"उनका यह संदेश अमेरिका और मध्य एशियाई देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक संपर्कों को दर्शाता है। बैठक के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापारिक अवसरों और आर्थिक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
आर्थिक सहयोग और निवेश पर विशेष ध्यान
C5+1 बैठक में आर्थिक सहयोग को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। अमेरिका मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापारिक संबंधों का विस्तार करना चाहता है। इन देशों में ऊर्जा संसाधनों, महत्वपूर्ण खनिजों और परिवहन के क्षेत्र में निवेश की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।रुबियो की यात्रा के दौरान 200 से अधिक अमेरिकी व्यापारिक प्रतिनिधि भी उज्बेकिस्तान पहुंचे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य मध्य एशियाई देशों में निवेश और व्यावसायिक साझेदारी के अवसरों की पहचान करना है।अमेरिकी प्रशासन की प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति, ऊर्जा सहयोग और व्यापारिक संपर्कों का विस्तार शामिल है। इन क्षेत्रों में सहयोग से अमेरिकी कंपनियों के लिए नए बाजार खुलने की संभावना है।
क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर भी हुई चर्चा
मध्य एशिया अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय राजनीति में विशेष महत्व रखता है। यह क्षेत्र रूस, चीन, ईरान और अफगानिस्तान के निकट स्थित है। ऐसे में यहां की सुरक्षा और स्थिरता का प्रभाव व्यापक क्षेत्रीय परिस्थितियों पर पड़ सकता है।अमेरिका इन देशों के साथ आतंकवाद विरोधी सहयोग, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर संबंध मजबूत करने का इच्छुक है।
क्या है C5+1 समूह?
C5+1 एक कूटनीतिक मंच है, जिसमें मध्य एशिया के पांच देश और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। इस मंच के माध्यम से सदस्य देश आर्थिक विकास, सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते हैं।इस समूह में उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और किर्गिज़ गणराज्य शामिल हैं, जबकि अमेरिका छठे साझेदार के रूप में भाग लेता है।इस मंच का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच राजनीतिक संवाद बढ़ाना और साझा हितों से जुड़े विषयों पर सहयोग विकसित करना है।
रूस और चीन के प्रभाव के बीच अमेरिका की रणनीति
मध्य एशिया लंबे समय से रूस और चीन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। चीन इन देशों का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, जबकि रूस के साथ इनके ऐतिहासिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध रहे हैं।ऐसे में अमेरिका की बढ़ती सक्रियता को क्षेत्र में अपने आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों का विस्तार करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।रुबियो की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और ऊर्जा संसाधनों तक पहुंच के लिए नए अंतरराष्ट्रीय साझेदार तलाश रहा है।
उज्बेकिस्तान के बाद भारत दौरे का कार्यक्रम
मध्य एशिया की यात्रा के बाद मार्को रुबियो का भारत आने का कार्यक्रम भी है। भारत यात्रा के दौरान व्यापार, ऊर्जा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है।अमेरिकी विदेश मंत्री की इस कूटनीतिक यात्रा को एशिया के विभिन्न देशों के साथ वाशिंगटन के आर्थिक और राजनीतिक संबंधों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।C5+1 मंत्रिस्तरीय बैठक से अमेरिका और मध्य एशियाई देशों के बीच व्यापार, निवेश और सुरक्षा सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, बैठक में हुई चर्चाओं के वास्तविक परिणाम आगामी समझौतों और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।
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