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US ने भारत को 428 मिलियन डॉलर की रक्षा डील मंजूर की

Kiran
23 Jun 2026 3:18 PM IST
US ने भारत को 428 मिलियन डॉलर की रक्षा डील मंजूर की
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US अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि अमेरिका ने भारत को अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए सपोर्ट सर्विस और उससे जुड़े उपकरणों की संभावित बिक्री को मंज़ूरी दे दी है, जिसकी अनुमानित लागत 198.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। विदेश विभाग ने M777A2 अल्ट्रा-लाइट होवित्ज़र के लिए सस्टेनमेंट सपोर्ट (रखरखाव में मदद) की संभावित बिक्री को भी मंज़ूरी दी, जिसकी अनुमानित लागत 230 मिलियन अमेरिकी डॉलर है।

विदेश विभाग ने कहा कि अपाचे सपोर्ट सर्विस डील के लिए मुख्य कॉन्ट्रैक्टर बोइंग कंपनी और लॉकहीड मार्टिन होंगे। होवित्ज़र सपोर्ट के लिए, मुख्य कॉन्ट्रैक्टर यूके के कंब्रिया में स्थित BAE सिस्टम्स होगा। विदेश विभाग ने कहा कि भारत ने AH-64E अपाचे सस्टेनमेंट सपोर्ट सर्विस; अमेरिकी सरकार और कॉन्ट्रैक्टर की इंजीनियरिंग, टेक्निकल और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट सर्विस; टेक्निकल डेटा और पब्लिकेशन; कर्मियों की ट्रेनिंग; और लॉजिस्टिक्स व प्रोग्राम सपोर्ट से जुड़ी अन्य चीज़ें खरीदने का अनुरोध किया है। भारत ने M777A2 अल्ट्रा-लाइट होवित्ज़र के लिए लंबे समय तक सस्टेनमेंट सपोर्ट खरीदने का भी अनुरोध किया था।

होवित्ज़र के लिए सपोर्ट सर्विस का ज़िक्र करते हुए विदेश विभाग ने कहा कि इसमें ये गैर-प्रमुख रक्षा उपकरण शामिल होंगे: सहायक वस्तुएं; स्पेयर पार्ट्स; मरम्मत और वापसी; ट्रेनिंग; टेक्निकल सहायता; फील्ड सर्विस प्रतिनिधि; डिपो क्षमता; और लॉजिस्टिक्स व प्रोग्राम सपोर्ट से जुड़ी अन्य चीज़ें। हेलीकॉप्टर और होवित्ज़र के लिए सपोर्ट सर्विस की संभावित बिक्री 'फॉरेन मिलिट्री सेल' (विदेशी सैन्य बिक्री) के ज़रिए होगी। विदेश विभाग ने कहा कि हेलीकॉप्टर और होवित्ज़र की प्रस्तावित बिक्री अमेरिका-भारत रणनीतिक संबंधों को मज़बूत करके अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा लक्ष्यों को सपोर्ट करेगी।

इससे एक प्रमुख रक्षा साझेदार की सुरक्षा को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी, जो इंडो-पैसिफिक और दक्षिण एशिया क्षेत्रों में राजनीतिक स्थिरता, शांति और आर्थिक प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण ताकत बना हुआ है। प्रस्तावित बिक्री से मौजूदा और भविष्य के खतरों से निपटने, देश की रक्षा को मज़बूत करने और क्षेत्रीय खतरों को रोकने की भारत की क्षमता में सुधार होगा। विदेश विभाग ने कहा कि भारत को इन उपकरणों और सेवाओं को अपनी सशस्त्र सेनाओं में शामिल करने में कोई कठिनाई नहीं होगी। उपकरणों और सपोर्ट की प्रस्तावित बिक्री से क्षेत्र में बुनियादी सैन्य संतुलन नहीं बदलेगा। विदेश विभाग ने कहा कि इस प्रस्तावित बिक्री के परिणामस्वरूप अमेरिकी रक्षा तैयारियों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।

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