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चीन पाकिस्तान सीमा की कहानी कैसे हुआ शक्सगाम घाटी का समझौता
Ratna Netam
17 Sept 2026 2:14 PM IST

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नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद की चर्चा अक्सर लद्दाख, अक्साई चिन और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर होती है, लेकिन हिमालय के ऊंचे इलाकों में एक ऐसा क्षेत्र भी है, जो दशकों से विवाद का विषय बना हुआ है। यह क्षेत्र है **शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley)**, जिसे चीन में **ताशकुर्गान क्षेत्र का हिस्सा** माना जाता है। यह इलाका पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के उत्तरी हिस्से में स्थित है और भारत इस पर अपना दावा करता है।
शक्सगाम घाटी का नाम तब ज्यादा चर्चा में आया जब पाकिस्तान ने 1963 में चीन के साथ एक सीमा समझौता किया था। इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने इस क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा चीन को सौंप दिया। भारत ने इस समझौते को मान्यता नहीं दी और इसे अपनी संप्रभुता से जुड़ा मामला बताया।
कहां स्थित है शक्सगाम घाटी?
शक्सगाम घाटी काराकोरम पर्वतमाला के उत्तर में स्थित एक दुर्गम इलाका है। यह क्षेत्र करीब 5,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ माना जाता है। यहां ऊंचे पहाड़, ग्लेशियर और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां हैं।
यह इलाका ऐतिहासिक रूप से जम्मू-कश्मीर क्षेत्र का हिस्सा रहा है। 1947 में भारत के विभाजन और जम्मू-कश्मीर में हुए घटनाक्रम के बाद क्षेत्र का एक हिस्सा पाकिस्तान के नियंत्रण में चला गया। पाकिस्तान इस हिस्से को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहता है, जबकि भारत इसे अवैध कब्जे वाला क्षेत्र मानता है।
1963 में हुआ था चीन-पाकिस्तान समझौता
1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच एक सीमा समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी के क्षेत्र को चीन के प्रशासनिक नियंत्रण में देने पर सहमति जताई।
इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीमा को स्पष्ट करना था। पाकिस्तान और चीन के बीच यह समझौता ऐसे समय हुआ था जब दोनों देशों के संबंध तेजी से मजबूत हो रहे थे।
हालांकि, भारत ने इस समझौते का विरोध किया। भारत का कहना था कि पाकिस्तान के पास उस क्षेत्र को किसी अन्य देश को देने का अधिकार नहीं था, क्योंकि जम्मू-कश्मीर का पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है।
पहले चीन और पाकिस्तान के बीच सीधी सीमा नहीं थी
शक्सगाम घाटी समझौते से पहले पाकिस्तान और चीन के बीच सीधी अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं थी। 1963 के समझौते के बाद दोनों देशों के बीच एक सीमा संपर्क स्थापित हुआ।
इसके बाद चीन को काराकोरम क्षेत्र में रणनीतिक पहुंच मिली। यही क्षेत्र आगे चलकर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण बना।
चीन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह इलाका?
शक्सगाम घाटी भले ही आबादी के लिहाज से बेहद कम महत्वपूर्ण है, लेकिन रणनीतिक रूप से इसका महत्व बहुत ज्यादा है। यह इलाका चीन के शिनजियांग क्षेत्र, पाकिस्तान के उत्तरी इलाकों और काराकोरम क्षेत्र के बीच स्थित है।
इस क्षेत्र के पास ही काराकोरम दर्रा और दुनिया की कुछ सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं मौजूद हैं। सैन्य और भू-राजनीतिक दृष्टि से यहां नियंत्रण किसी भी देश के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसके अलावा यह इलाका चीन के पश्चिमी हिस्से को पाकिस्तान से जोड़ने वाले संपर्क मार्गों के लिहाज से भी अहम है।
भारत का क्या रुख है?
भारत लगातार यह कहता रहा है कि पाकिस्तान ने जिस क्षेत्र को चीन को सौंपा, वह भारत के जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा है। भारत ने 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को अस्वीकार किया है।
भारत के अनुसार, पाकिस्तान को उस क्षेत्र पर कोई अधिकार नहीं था, इसलिए किसी अन्य देश के साथ किया गया समझौता वैध नहीं माना जा सकता।
चीन और पाकिस्तान का पक्ष
चीन और पाकिस्तान दोनों इस समझौते को अपने बीच सीमा निर्धारण की प्रक्रिया का हिस्सा बताते हैं। दोनों देशों के अनुसार, यह समझौता आपसी सहमति से किया गया था।
हालांकि, भारत इस दावे से सहमत नहीं है और इस पूरे क्षेत्र को लेकर अपना दावा कायम रखता है।
अक्साई चिन से अलग है शक्सगाम घाटी
अक्सर शक्सगाम घाटी को अक्साई चिन के साथ जोड़ा जाता है, लेकिन दोनों क्षेत्र अलग-अलग हैं। अक्साई चिन पूर्वी लद्दाख में स्थित है, जिस पर चीन का नियंत्रण है और भारत अपना दावा करता है।
वहीं शक्सगाम घाटी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के उत्तरी हिस्से में है, जिसे चीन को 1963 के समझौते के बाद प्रशासनिक नियंत्रण में दिया गया।
दोनों क्षेत्रों का विवाद भारत-चीन सीमा मुद्दे के बड़े संदर्भ से जुड़ा हुआ है, लेकिन उनकी भौगोलिक स्थिति और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि अलग है।
आज भी बना हुआ है विवाद
शक्सगाम घाटी का मुद्दा आज भी भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच संवेदनशील विषय बना हुआ है। यह केवल जमीन का विवाद नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति से भी जुड़ा हुआ है।
काराकोरम क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों और चीन-पाकिस्तान सहयोग के कारण इस इलाके का महत्व और बढ़ गया है। भारत लगातार इस क्षेत्र पर अपने दावे को दोहराता रहा है, जबकि चीन और पाकिस्तान अपने 1963 के समझौते को आधार मानते हैं।
इस तरह शक्सगाम घाटी हिमालय के एक ऐसे हिस्से की कहानी है, जहां इतिहास, भूगोल और अंतरराष्ट्रीय राजनीति तीनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
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