विश्व

कुदरत का कहर इतना भयानक कि कई पीड़ितों के शव शायद कभी नहीं मिल पाएंगे

Ratna Netam
4 Sept 2026 7:11 PM IST
कुदरत का कहर इतना भयानक कि कई पीड़ितों के शव शायद कभी नहीं मिल पाएंगे
x
नेपाल : आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद हजारों परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे हैं। कई दिनों से जारी खोज अभियान के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। इसी बीच विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि कुछ लापता लोगों के शव शायद कभी नहीं मिल पाएंगे। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, तेज बहाव और मलबे की गहराई के कारण बचाव दलों के सामने बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
नेपाल की इस त्रासदी ने हजारों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। कई लोग अब भी अपने प्रियजनों की एक झलक पाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि कुछ परिवारों ने मजबूरी में बिना शव मिले ही अंतिम संस्कार जैसी धार्मिक प्रक्रियाएं शुरू कर दी हैं।
हजारों लोग अब भी लापता
नेपाल में आई भीषण आपदा के बाद मृतकों और लापता लोगों का आंकड़ा लगातार बढ़ता गया है। अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें स्थानीय नागरिकों के अलावा विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन कई इलाकों में पहुंचना बेहद मुश्किल बना हुआ है।
बाढ़ के तेज बहाव ने कई गांवों, सड़कों और पुलों को तबाह कर दिया। कई जगहों पर लोग मलबे और कीचड़ के नीचे दब गए, जबकि कुछ लोग उफनती नदियों में बह गए।
क्यों नहीं मिल पा रहे शव?
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में आई ऐसी आपदाओं में शवों को ढूंढना बेहद कठिन होता है। पहाड़ी इलाकों में तेज बहाव, गहरी घाटियां, बड़े पैमाने पर जमा मलबा और खराब मौसम खोज अभियान को प्रभावित करते हैं।
फोरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ शव नदी के बहाव के साथ बहुत दूर तक जा सकते हैं या मिट्टी और चट्टानों के नीचे दब सकते हैं। ऐसे मामलों में कई बार महीनों या वर्षों बाद भी अवशेष मिलने की संभावना बनी रहती है।
परिवारों की उम्मीदें टूटने लगीं
आपदा में लापता हुए लोगों के परिजन अभी भी अस्पतालों, राहत शिविरों और खोज अभियान वाले इलाकों में अपने रिश्तेदारों की तलाश कर रहे हैं।
कई परिवारों के लिए सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि उन्हें यह भी नहीं पता कि उनके अपने जीवित हैं या नहीं। कुछ लोग अब भी किसी चमत्कार की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि कुछ ने भारी मन से यह मानना शुरू कर दिया है कि शायद अब शव भी नहीं मिल पाएंगे।
DNA से पहचान की कोशिश
शव मिलने के बाद भी उनकी पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन गई है। कई शव क्षत-विक्षत अवस्था में मिले हैं, जिसके कारण परिवारों तक उन्हें पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।
नेपाल प्रशासन और जांच एजेंसियां DNA सैंपल, फोटो और अन्य रिकॉर्ड के जरिए मृतकों की पहचान करने की कोशिश कर रही हैं।
धार्मिक परंपराओं के सामने मजबूरी
नेपाल में कई परिवार अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करना चाहते हैं, लेकिन शव नहीं मिलने के कारण वे असमंजस में हैं। कुछ स्थानों पर परिवारों ने प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की है।
परिजनों का कहना है कि अंतिम विदाई देना उनके लिए जरूरी है, ताकि वे अपने प्रियजनों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर सकें।
बचाव दलों के सामने बड़ी चुनौती
रेस्क्यू टीमें लगातार मलबे को हटाकर लोगों की तलाश कर रही हैं। सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ विशेषज्ञ टीमें भी अभियान में जुटी हैं।
लेकिन कई प्रभावित इलाके ऐसे हैं जहां भारी नुकसान और कठिन रास्तों के कारण बचाव कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है।
सुरंगों और जलविद्युत परियोजनाओं में भी फंसे लोग
नेपाल की कई जलविद्युत परियोजनाएं भी इस आपदा से प्रभावित हुई हैं। कुछ सुरंगों में लोगों के फंसे होने की आशंका जताई गई थी, जिसके बाद बचाव अभियान चलाया गया।
कुछ लोगों को लंबे समय बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिससे बचाव टीमों की उम्मीद बनी रही कि कहीं और भी लोग जीवित मिल सकते हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
आपदा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं में शुरुआती दिनों में बचाव की संभावना सबसे ज्यादा होती है। समय बीतने के साथ जीवित लोगों को ढूंढना मुश्किल होता जाता है, वहीं शवों की तलाश भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि कई मामलों में लंबे समय बाद भी अवशेष मिल सकते हैं।
Next Story