विश्व
भारत पर टैरिफ बिल और राजा कृष्णमूर्ति की भूमिका की पूरी कहानी
Ratna Netam
18 Sept 2026 3:09 PM IST

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वाशिंगटन : अमेरिकी संसद में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने से जुड़े एक प्रस्ताव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस प्रस्ताव में भारत और चीन जैसे देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल बताया जा रहा है। इस बिल को लेकर अमेरिकी राजनीति में बहस के बीच भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति का नाम भी चर्चा में आया है, क्योंकि उन्होंने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।राजा कृष्णमूर्ति अमेरिका के प्रमुख भारतीय-अमेरिकी नेताओं में शामिल हैं। वह डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हैं और लंबे समय से अमेरिकी राजनीति में सक्रिय हैं। भारतीय मूल होने के बावजूद अमेरिकी संसद में उनके फैसले और राजनीतिक रुख अमेरिकी नीतियों और हितों के आधार पर तय होते हैं।
कौन हैं राजा कृष्णमूर्ति?
राजा कृष्णमूर्ति का पूरा नाम राजशेखर कृष्णमूर्ति है। उनका जन्म भारत में हुआ था और बचपन में ही उनका परिवार अमेरिका चला गया था। उन्होंने अमेरिका में शिक्षा हासिल की और कानून तथा सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में काम किया।वह इलिनॉय राज्य से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य हैं। अमेरिकी संसद में पहुंचने वाले भारतीय मूल के नेताओं में उनका नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है।
राजनीति में कैसे बनाई पहचान?
राजा कृष्णमूर्ति ने राजनीति में आने से पहले नीति निर्माण और कानूनी क्षेत्र में काम किया। उन्होंने सार्वजनिक सेवा से जुड़े कई पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं।इसके बाद उन्होंने चुनावी राजनीति में कदम रखा और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए। संसद में रहते हुए उन्होंने अर्थव्यवस्था, शिक्षा, तकनीक, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे कई मुद्दों पर अपनी राय रखी है।
100% टैरिफ वाले प्रस्ताव पर क्यों चर्चा?
रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका में लंबे समय से बहस चल रही है। कुछ अमेरिकी सांसदों का कहना है कि रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाया जाना चाहिए, ताकि रूस की आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़े।इसी संदर्भ में अमेरिकी संसद में एक प्रस्ताव लाया गया, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान बताया गया है। राजा कृष्णमूर्ति ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।हालांकि भारत की ओर से कहा जाता रहा है कि देश की ऊर्जा जरूरतों और नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए तेल खरीद के फैसले लिए जाते हैं। भारत ने कई मौकों पर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता बताया है।
भारत-अमेरिका संबंधों के बीच बयान का महत्व
राजा कृष्णमूर्ति के बयान को भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग जैसे कई क्षेत्रों में संबंध हैं।वहीं, रूस से तेल खरीद और व्यापार नीतियों को लेकर दोनों देशों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण भी सामने आते रहे हैं।
भारतीय मूल के प्रभावशाली अमेरिकी नेताओं में शामिल
राजा कृष्णमूर्ति उन भारतीय-अमेरिकी नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने अमेरिकी राजनीति में अपनी जगह बनाई है। वह अमेरिकी संसद में भारतीय समुदाय से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय रहे हैं।उनकी पहचान एक ऐसे सांसद के रूप में है जो घरेलू नीतियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी राय रखते हैं।
टैरिफ प्रस्ताव पर आगे क्या?
अमेरिकी संसद में किसी भी बिल का कानून बनने से पहले कई चरणों से गुजरना पड़ता है। प्रस्ताव को सदन और सीनेट में मंजूरी तथा अन्य संवैधानिक प्रक्रियाओं को पूरा करना होता है।इसलिए फिलहाल यह प्रस्ताव चर्चा के स्तर पर है। इसके आगे बढ़ने और अंतिम रूप लेने के बाद ही इसके वास्तविक प्रभाव स्पष्ट हो पाएंगे।
राजा कृष्णमूर्ति के समर्थन के बाद यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह भारतीय मूल के प्रमुख अमेरिकी सांसद हैं। हालांकि उनका राजनीतिक रुख अमेरिकी नीति और उनके निर्वाचन क्षेत्र के हितों के आधार पर तय होता है।
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