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नई दिल्ली। भारत ने यूरोपीय देश हंगरी के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक, नवाचार, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को हंगरी के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने दोनों देशों के पुराने और मजबूत संबंधों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत और हंगरी के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें भविष्य में और आगे बढ़ाया जा सकता है।
हंगरी के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत की भागीदारी
विदेश मंत्रालय के अनुसार, हंगरी के राष्ट्रीय दिवस समारोह में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।इस अवसर पर उन्होंने भारत और हंगरी के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग केवल राजनीतिक और कूटनीतिक संपर्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक, तकनीकी, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों तक फैला हुआ है।विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कार्यक्रम की जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत हंगरी के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
व्यापार और निवेश बढ़ाने पर विशेष जोर
भारत और हंगरी के बीच आर्थिक संबंध द्विपक्षीय सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। दोनों देशों के लिए व्यापार और निवेश के क्षेत्र में नए अवसर तलाशना प्राथमिकताओं में शामिल है।हंगरी यूरोप में भारत का एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग, विनिर्माण, दवा उद्योग और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में संबंध विकसित हुए हैं।विदेश मंत्रालय की ओर से दोहराई गई प्रतिबद्धता से संकेत मिलता है कि भारत भविष्य में व्यापारिक संपर्कों को अधिक व्यापक बनाने और निवेश संबंधी अवसरों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है।इससे भारतीय और हंगरी की कंपनियों के बीच साझेदारी की नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।
तकनीक और नवाचार में सहयोग की संभावनाएं
दोनों देशों ने तकनीक और नवाचार को भी आपसी सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया है।आधुनिक तकनीकी विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार से जुड़े क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं मौजूद हैं।भारत और हंगरी के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़ी गतिविधियों पर पहले भी बातचीत होती रही है।फरवरी 2026 में आयोजित 11वें विदेश कार्यालय परामर्श के दौरान दोनों पक्षों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, जल प्रबंधन, फार्मास्यूटिकल्स और अंतरिक्ष सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की थी।
शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को मिलेगी प्राथमिकता
भारत और हंगरी के बीच शिक्षा तथा लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करना भी एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है।दोनों देशों के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षण संस्थानों के बीच संपर्क बढ़ने से शैक्षणिक सहयोग को प्रोत्साहन मिल सकता है।शिक्षा के अलावा संस्कृति, पर्यटन और सामाजिक संपर्कों के माध्यम से भी दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे की परंपराओं और जीवनशैली को समझने के अवसर मिलते हैं।विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि लोगों के बीच आपसी संपर्क दोनों देशों की साझेदारी को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
फरवरी में हुई थी उच्चस्तरीय बैठक
भारत और हंगरी के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में इस वर्ष कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक संपर्क हुए हैं।10 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में दोनों देशों के बीच विदेश कार्यालय परामर्श का 11वां दौर आयोजित किया गया था।भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सिबी जॉर्ज ने किया था, जबकि हंगरी की ओर से विदेश एवं व्यापार मंत्रालय की राज्य सचिव बोगलार्का इलेश ने बातचीत में हिस्सा लिया था।बैठक के दौरान राजनीतिक संबंधों, व्यापार, निवेश, रक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग सहित अनेक मुद्दों की समीक्षा की गई थी।
जुलाई में बुडापेस्ट में भी हुई थी बातचीत
इससे पहले जुलाई 2026 में हंगरी में भारत के राजदूत अंशुमान गौर ने हंगरी के विदेश मंत्रालय में संसदीय राज्य सचिव ग्योर्गी लास्जलो वेल्के से बुडापेस्ट में मुलाकात की थी।इस बातचीत में दोनों देशों के मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई थी।
भविष्य में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता
हंगरी के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत की उच्चस्तरीय भागीदारी दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक संवाद का एक और उदाहरण है।भारत ने स्पष्ट किया है कि व्यापार, निवेश, तकनीक, शिक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग को आगे बढ़ाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।माना जा रहा है कि नियमित उच्चस्तरीय बातचीत और संस्थागत संपर्कों से आने वाले समय में भारत और हंगरी के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक संबंधों को और मजबूती मिल सकती है।
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