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टूट रहा अमेरिकी सपना! भारत लौटने को मजबूर हजारों टेक प्रोफेशनल्स

nidhi
6 Nov 2026 6:36 AM IST
टूट रहा अमेरिकी सपना! भारत लौटने को मजबूर हजारों टेक प्रोफेशनल्स
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नई दिल्ली: बेहतर नौकरी, आकर्षक वेतन और शानदार भविष्य की उम्मीद लेकर अमेरिका जाने वाले भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के सामने अब बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त आव्रजन नीतियों, ग्रीन कार्ड मिलने में लंबी देरी और टेक कंपनियों में लगातार हो रही छंटनी ने हजारों भारतीय पेशेवरों की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि अमेरिका में वर्षों से काम कर रहे कई भारतीय इंजीनियर और आईटी विशेषज्ञ अब स्वदेश लौटने का फैसला कर रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका में रोजगार और स्थायी निवास की अनिश्चितता के कारण भारतीय तकनीकी पेशेवरों की घर वापसी में तेजी आई है। स्टाफिंग कंपनी Xpheno के आंकड़ों के आधार पर प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, जनवरी से सितंबर 2026 के बीच लगभग 12,700 टेक पेशेवर अमेरिका से भारत लौटे। हालांकि, यह संख्या भर्ती बाजार के विश्लेषण पर आधारित अनुमान है, कोई आधिकारिक सरकारी गणना नहीं। अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों की सबसे बड़ी समस्या ग्रीन कार्ड का लंबा इंतजार है। ग्रीन कार्ड मिलने के बाद विदेशी नागरिक अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने के पात्र बनते हैं। लेकिन रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की कुछ श्रेणियों में भारतीय आवेदकों के लिए वर्षों पुराना बैकलॉग बना हुआ है। इसके कारण बड़ी संख्या में पेशेवरों को स्थायी निवास का इंतजार करना पड़ रहा है।
अमेरिकी विदेश विभाग के नवंबर 2026 वीजा बुलेटिन के अनुसार, भारत के लिए रोजगार आधारित EB-2 श्रेणी की फाइनल एक्शन कटऑफ तारीख 1 नवंबर 2013 है। वहीं EB-3 श्रेणी में कटऑफ तारीख 22 जनवरी 2014 तक पहुंची है। इससे स्पष्ट होता है कि पुरानी प्राथमिकता तारीखों वाले कई आवेदकों की प्रक्रिया अब भी लंबित है। हालांकि, इन तारीखों को हर नए आवेदक की वास्तविक प्रतीक्षा अवधि नहीं माना जा सकता। ग्रीन कार्ड के अलावा H-1B वीजा पर काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों के सामने नौकरी बचाने की चुनौती भी है। अमेरिका की प्रमुख टेक कंपनियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लागत में कटौती और कारोबारी पुनर्गठन के कारण कर्मचारियों की छंटनी हो रही है। ऐसे में नौकरी गंवाने वाले विदेशी पेशेवरों के लिए नई नौकरी तलाशना और भी कठिन हो जाता है।
H-1B वीजा धारकों को नौकरी समाप्त होने के बाद सामान्यतः अधिकतम 60 दिनों की ग्रेस अवधि मिल सकती है, जो उनकी अधिकृत निवास अवधि समाप्त होने से आगे नहीं बढ़ती। इस दौरान उन्हें नई नौकरी, पात्र होने पर वीजा स्थिति में बदलाव या अमेरिका छोड़ने जैसे विकल्पों पर निर्णय लेना पड़ सकता है। इससे कर्मचारियों के साथ उनके परिवारों पर भी मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ता है।
अमेरिकी आव्रजन नीतियों में बदलाव ने भी भारतीय आईटी कर्मचारियों की परेशानी बढ़ाई है। अक्टूबर 2026 में कुछ बड़ी तकनीकी कंपनियों के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास प्रक्रिया से जुड़े PERM श्रम प्रमाणन कार्यक्रम पर प्रतिबंध की खबरें सामने आई थीं। इससे संबंधित कंपनियों में भविष्य के ग्रीन कार्ड प्रायोजन को लेकर चिंता बढ़ी। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी भारतीय कर्मचारियों के मौजूदा H-1B वीजा रद्द हो गए हैं। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, डेटा साइंस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे क्षेत्रों में नए अवसर विकसित हो रहे हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम जैसे तकनीकी केंद्र अंतरराष्ट्रीय अनुभव रखने वाले पेशेवरों के लिए आकर्षक बन रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों से लौटने वाले अनुभवी इंजीनियर भारतीय स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अमेरिका में वर्षों तक काम करने वाले पेशेवर अपने साथ अत्याधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय कार्य अनुभव और प्रबंधन संबंधी विशेषज्ञता लेकर आते हैं। इससे भारतीय तकनीकी उद्योग को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।
स्वदेश लौटना भी आसान नहीं है। अमेरिका में ऊंचा वेतन पाने वाले भारतीय पेशेवरों को भारत में तुलनात्मक रूप से कम वेतन के प्रस्ताव मिल रहे हैं। कई कर्मचारियों को अपनी आय और जीवनशैली में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। इसके अलावा भारतीय टेक सेक्टर में भी नियुक्तियों की रफ्तार और उपलब्ध अवसरों को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। करियर विशेषज्ञों के अनुसार, परिवार के करीब रहने की इच्छा, बच्चों की शिक्षा, माता-पिता की देखभाल और स्थायी जीवन की सुरक्षा भी घर वापसी के महत्वपूर्ण कारण बन रहे हैं। कुछ पेशेवरों के लिए यह मजबूरी है, जबकि दूसरे भारत में उपलब्ध नए अवसरों को देखते हुए स्वेच्छा से लौट रहे हैं।
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