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अमेरिका और ईरान में बढ़ा तनाव, सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि ने दिया बड़ा बयान
Ratna Netam
1 Nov 2026 9:01 PM IST

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नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो उनका देश अपनी रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस बयान ने एक बार फिर पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति, अमेरिका-ईरान संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चर्चा तेज कर दी है।ईरानी प्रतिनिधि का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक मतभेदों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। प्रतिनिधि ने स्पष्ट संदेश दिया कि ईरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में किसी भी बाहरी हमले का सामना करने के लिए तैयार है। हालांकि, इस बयान को ईरान की ओर से तत्काल सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान युद्ध को आगे बढ़ाने के बजाय सम्मानजनक बातचीत के माध्यम से समाधान चाहता है। मार्च 2026 में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन उस पर शर्तें थोपकर समझौता नहीं कराया जा सकता। उन्होंने भविष्य में हमले नहीं होने की गारंटी और प्रतिबंधों में राहत को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया था।इलाही ने यह भी कहा था कि ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया को उसके आत्मरक्षा के अधिकार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उनका दावा था कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए किया गया। हालांकि, अमेरिकी और अन्य संबंधित पक्षों के अपने अलग सुरक्षा संबंधी तर्क हैं। ऐसे में ईरान के प्रतिनिधि के आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
ईरान के सर्वोच्च नेता ने भी दी चेतावनी
इस बीच 31 अक्टूबर को ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के साथ बैठक में संभावित अमेरिकी या इजरायली हमले के खिलाफ तत्काल और प्रभावी जवाब देने की तैयारी रखने का निर्देश दिया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, उन्होंने कहा कि नए हमले की स्थिति में ईरान की प्रतिक्रिया किसी सीमित भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं होगी।उनके इस संदेश को अमेरिका और इजरायल के लिए गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, ईरान ने किसी नए हमले की शुरुआत करने की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
कूटनीतिक समाधान की कोशिशें जारी
सैन्य तनाव के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है। एक नवंबर को रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी वार्ताकारों और कतर के मध्यस्थों ने दोहा में लगातार तीसरे दिन चर्चा की।वार्ता का उद्देश्य आठ महीने से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए स्वीकार्य समझौते की संभावनाएं तलाशना है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया कि तेहरान रक्षा और कूटनीति, दोनों के लिए तैयार है। हालांकि, प्रस्तावित समझौते पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए सैन्य हमले के संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है और अमेरिका कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर दुनिया की नजर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में सैन्य टकराव या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक तेल बाजार, परिवहन लागत और व्यापार पर दबाव बढ़ सकता है।मौजूदा बातचीत में इस समुद्री मार्ग को फिर से खोलने, ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और जब्त संपत्तियों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हो रही है। लेकिन इन विषयों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है क्षेत्रीय शांति
भारत के ईरान और अमेरिका, दोनों के साथ महत्वपूर्ण संबंध हैं। पश्चिम एशिया में स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी अहम है।भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच संपर्क और व्यापारिक सहयोग के मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की स्थिति में भारत के आर्थिक और रणनीतिक हित प्रभावित हो सकते हैं।इलाही ने पहले भी भारत और ईरान के संबंधों को गहरा बताते हुए विश्वास जताया था कि दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रहेगा।
युद्ध या बातचीत, अगले कदम पर नजर
ईरान की ओर से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि वह बाहरी हमले की स्थिति में अपनी रक्षा करेगा, लेकिन कूटनीतिक समाधान का रास्ता भी खुला रखना चाहता है। दूसरी ओर अमेरिका सैन्य विकल्प को पूरी तरह खारिज किए बिना बातचीत जारी रखे हुए है।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मध्यस्थता के प्रयास दोनों देशों के बीच किसी ठोस समझौते तक पहुंच पाएंगे या तनाव फिर सैन्य टकराव की दिशा में बढ़ेगा। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के फैसले पश्चिम एशिया की सुरक्षा तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
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