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ट्रम्प की नई तैयारी से बढ़ा तनाव ईरान के परमाणु ठिकाने निशाने पर

Ratna Netam
15 Oct 2026 3:30 PM IST
ट्रम्प की नई तैयारी से बढ़ा तनाव  ईरान के परमाणु ठिकाने निशाने पर
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वॉशिंगटन : 15 अक्टूबर 2026। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ी सैन्य रिपोर्ट सामने आई है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ संभावित हमलों के नए विकल्प तैयार किए हैं, जिनमें दुनिया के सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बमों में शामिल GBU-43/B 'मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट' (MOAB) के इस्तेमाल की संभावना भी शामिल है। इस हथियार को आमतौर पर 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' कहा जाता है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य योजनाकार ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, अभी इन हमलों को अंजाम देने का कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
ईरान के परमाणु ठिकाने अमेरिकी निशाने पर?
CNN ने सैन्य योजनाओं से परिचित कई अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी सेना ने संभावित हमलों के लिए नए स्ट्राइक पैकेज तैयार किए हैं।इन योजनाओं में ईरान के महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों और परमाणु केंद्रों को निशाना बनाने के विकल्प शामिल हैं। विशेष रूप से 'पिकएक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) जैसे परमाणु ठिकानों को लेकर चर्चा की जा रही है।रिपोर्ट के अनुसार, इन सैन्य विकल्पों को तभी लागू किया जा सकता है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई का आदेश दें।फिलहाल यह सैन्य योजना के स्तर पर विचाराधीन विकल्प है। अमेरिका की ओर से MOAB बम का इस्तेमाल करने का कोई आधिकारिक आदेश घोषित नहीं किया गया है।
क्या है 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' की ताकत?
GBU-43/B अमेरिका के सैन्य शस्त्रागार में मौजूद सबसे बड़े गैर-परमाणु बमों में से एक है। इसका वजन लगभग 9,800 किलोग्राम है और इसे बड़े क्षेत्र में शक्तिशाली विस्फोट करने के लिए डिजाइन किया गया है।इस बम का इस्तेमाल पहली बार अप्रैल 2017 में अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकियों के ठिकानों के खिलाफ किया गया था।हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों ने ईरान के अत्यधिक गहराई में बने भूमिगत परमाणु ठिकानों के खिलाफ इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं।MOAB मुख्य रूप से बड़े क्षेत्र में विस्फोट का प्रभाव पैदा करने वाला हथियार है। इसलिए पहाड़ों के भीतर गहराई में स्थित ठिकानों को नष्ट करने की इसकी क्षमता सीमित हो सकती है।
ट्रम्प पर युद्ध खत्म करने का बढ़ता दबाव
CNN के अनुसार, ईरान के खिलाफ नए सैन्य विकल्प ऐसे समय तैयार किए गए हैं, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर युद्ध समाप्त करने का घरेलू राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है।अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मध्यावधि चुनाव होने हैं। ईरान के साथ लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण ट्रम्प प्रशासन को राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।युद्ध को लेकर अमेरिकी जनता के एक बड़े वर्ग में असहमति देखी गई है। दूसरी ओर, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक समझौते की कोशिशों में भी गतिरोध बना हुआ है।इस परिस्थिति में अमेरिकी प्रशासन के सामने सैन्य कार्रवाई और बातचीत के बीच आगे की रणनीति तय करने की चुनौती है।
अमेरिकी प्रशासन में सैन्य कार्रवाई पर मतभेद
रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के खिलाफ नए हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर अलग-अलग विचार सामने आए हैं।कुछ अधिकारी सैन्य दबाव बढ़ाने के पक्ष में बताए गए हैं, जबकि अन्य प्रतिबंधों और कूटनीतिक उपायों को प्राथमिकता देना चाहते हैं।विशेषज्ञों के बीच यह सवाल भी बना हुआ है कि ईरान के परमाणु और ऊर्जा ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमला अमेरिकी रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल कर पाएगा या नहीं।ऐसी कार्रवाई से क्षेत्रीय संघर्ष के और व्यापक होने का जोखिम भी हो सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ सकता है सैन्य तनाव
ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और परमाणु प्रतिष्ठानों पर संभावित अमेरिकी हमले से मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति और जटिल हो सकती है।ईरान पहले भी अपने महत्वपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दे चुका है।राष्ट्रपति ट्रम्प ने 8 अक्टूबर को कहा था कि अमेरिका नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर नया हमला नहीं करेगा। हालांकि, अमेरिकी सेना संभावित परिस्थितियों के लिए सैन्य विकल्प तैयार कर रही है।CNN की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि अमेरिकी सैन्य रणनीति में ईरान के खिलाफ बड़े हमलों की संभावनाओं पर विचार जारी है। लेकिन किसी योजना का तैयार होना और उसे लागू करने का आदेश मिलना अलग-अलग बातें हैं।अब ध्यान इस बात पर रहेगा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या दोनों देशों का टकराव नए सैन्य चरण में प्रवेश करता है।
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