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पाकिस्तानी सेना पर हमलों से बलूचिस्तान में तनाव, BRG और BLF ने जारी किए बयान
Ratna Netam
3 Nov 2026 4:09 PM IST

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क्वेटा : 3 नवंबर 2026। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों और सशस्त्र बलूच अलगाववादी संगठनों के बीच संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। हाल के दिनों में पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों, सुरक्षा चौकियों और काफिलों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने कच्छी जिले के सन्नी क्षेत्र में एक सैन्य शिविर पर हमला करके 12 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों को मार गिराया। दूसरी ओर, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने अक्टूबर 2026 के दौरान 25 अलग-अलग सैन्य अभियानों को अंजाम देने का दावा किया है।हालांकि, इन संगठनों द्वारा बताई गई हताहतों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से सभी दावों की पुष्टि करने वाला विस्तृत विवरण भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इन आंकड़ों को संबंधित संगठनों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
BRG के अनुसार, उसके लड़ाकों ने 1 नवंबर को कच्छी जिले के सन्नी इलाके में स्थित एक प्रमुख सुरक्षा शिविर को निशाना बनाया। संगठन ने दावा किया कि हमले के दौरान सुरक्षा बलों को भारी नुकसान हुआ और उसके लड़ाकों ने कुछ समय के लिए शिविर पर नियंत्रण भी स्थापित कर लिया।दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल (SATP) के घटनाक्रम संबंधी विवरण में भी सन्नी क्षेत्र में 1 नवंबर को हुए इस कथित हमले का उल्लेख मिलता है। हालांकि, पोर्टल में दर्ज घटनाओं का आधार संबंधित स्रोतों की रिपोर्टिंग है और इससे प्रत्येक दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मानी जा सकती।कच्छी जिला बलूचिस्तान का रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां से गुजरने वाले प्रमुख मार्ग प्रांत के विभिन्न हिस्सों को आपस में जोड़ते हैं। हाल के महीनों में इस इलाके में सैन्य वाहनों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमलों की कई खबरें सामने आई हैं।इससे पहले भी BRG ने कच्छी जिले में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा किया था। संगठन का कहना है कि वह बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहा है।
BRG ने अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में ड्रोन इकाई गठित करने और उसके जरिए सैन्य शिविर पर हमला करने का भी दावा किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, संगठन ने इस इकाई को 'आमिर एयरो गार्डियंस' नाम दिया है।यदि ऐसे दावे सही साबित होते हैं, तो यह बलूचिस्तान में सशस्त्र संगठनों द्वारा नई तकनीकों के इस्तेमाल का संकेत हो सकता है। हालांकि, संबंधित ड्रोन हमलों की प्रभावशीलता और वास्तविक नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।इसी बीच BLF ने अक्टूबर महीने की अपनी गतिविधियों को लेकर अलग दावा प्रस्तुत किया है। संगठन के अनुसार, उसने पूरे महीने 25 अभियानों में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया।BLF ने दावा किया कि इन अभियानों में 129 से अधिक पाकिस्तानी सैन्य एवं खुफिया कर्मी मारे गए और 30 से अधिक गंभीर रूप से घायल हुए। संगठन की ओर से जारी इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।BLF पिछले कुछ समय से बलूचिस्तान के विभिन्न जिलों में हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा करता रहा है। अक्टूबर के दौरान संगठन ने ग्वादर, केच, अवारान और अन्य क्षेत्रों में सैन्य ठिकानों तथा सुरक्षा काफिलों के खिलाफ कार्रवाइयों की जानकारी दी थी।
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में BLF ने 'ऑपरेशन अलमास' नामक अभियान को लेकर भी बड़े दावे किए थे। संगठन ने कहा था कि उसके लड़ाकों ने ग्वादर जिले में पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया प्रतिष्ठानों पर समन्वित हमले किए।BLF ने इस अभियान में 80 से अधिक पाकिस्तानी सैन्य एवं खुफिया कर्मियों के मारे जाने का दावा किया था। संगठन ने सैन्य वाहनों को नुकसान पहुंचाने और कुछ सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर अस्थायी नियंत्रण स्थापित करने की बात भी कही थी।हालांकि, पाकिस्तान की सेना ने इस अभियान को लेकर अलग विवरण प्रस्तुत किया था। पाकिस्तानी सेना की जनसंपर्क शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के अनुसार, ग्वादर और गबद सीमा क्षेत्र के आसपास सुरक्षा अभियानों में 10 हमलावर मारे गए थे।पाकिस्तानी सैन्य पक्ष ने सुरक्षा बलों को नुकसान होने संबंधी BLF के बड़े दावों का समर्थन नहीं किया था। दोनों पक्षों के बयानों में स्पष्ट अंतर होने से वास्तविक हताहतों की संख्या को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।बलूचिस्तान लंबे समय से पाकिस्तान के सबसे अधिक अशांत क्षेत्रों में शामिल रहा है। यहां कई अलगाववादी संगठन अधिक स्वायत्तता या स्वतंत्रता की मांग को लेकर सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं।
बलूच संगठनों का आरोप है कि प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों का पर्याप्त लाभ स्थानीय आबादी को नहीं मिलता। वे राजनीतिक अधिकारों, संसाधनों पर नियंत्रण और सुरक्षा बलों की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाते रहे हैं।दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार इन सशस्त्र संगठनों को देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा मानती है। पाकिस्तान ने कई अलगाववादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाए हैं और उनके खिलाफ सैन्य तथा खुफिया अभियान चलाए हैं।इस संघर्ष का सबसे गंभीर प्रभाव स्थानीय नागरिकों पर भी पड़ता है। सुरक्षा अभियानों, सड़क अवरोधों, हमलों और जवाबी कार्रवाइयों से आम लोगों की आवाजाही, व्यापार तथा दैनिक जीवन प्रभावित हो सकता है।बलूचिस्तान में ग्वादर बंदरगाह और उससे जुड़ी परियोजनाएं भी महत्वपूर्ण हैं। यह क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से संबंधित परियोजनाओं के कारण विशेष रणनीतिक महत्व रखता है।कुछ सशस्त्र संगठनों ने पहले भी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और उनसे जुड़े सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की जिम्मेदारी ली है। ऐसे हमलों से विकास परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ती हैं।बलूचिस्तान में जारी हिंसा के दौरान अलग-अलग पक्षों द्वारा जारी किए जाने वाले आंकड़ों में अक्सर बड़ा अंतर दिखाई देता है। सशस्त्र संगठन अपने अभियानों को सफल बताते हैं, जबकि पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां कई मौकों पर उनके दावों का खंडन करती हैं।इस कारण संघर्ष में मारे गए लोगों की वास्तविक संख्या का निर्धारणस्वतंत्र जांच और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।फिलहाल BRG के 12 सुरक्षाकर्मियों को मारने और BLF के अक्टूबर में 25 अभियान चलाने संबंधी दावों ने बलूचिस्तान की सुरक्षा स्थिति को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।पाकिस्तानी सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर लगातार हमलों की खबरों से यह संकेत मिलता है कि प्रांत में सशस्त्र संघर्ष की चुनौती बनी हुई है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।
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