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26 सितंबर से जोधपुर में तरंग शक्ति का आगाज

Ratna Netam
22 Sept 2026 5:53 PM IST
26 सितंबर से जोधपुर में तरंग शक्ति का आगाज
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जोधपुर। भारतीय वायुसेना के बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास **'तरंग शक्ति 2026'** में इस बार अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का F-35 स्टील्थ फाइटर प्रमुख आकर्षण होगा। अमेरिकी वायुसेना के F-35 लड़ाकू विमान पहली बार भारत में किसी सैन्य अभ्यास के दौरान भारतीय वायुसेना के साथ सामरिक प्रशिक्षण में शामिल होने वाले हैं। वायु सेना उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की।तरंग शक्ति का दूसरा संस्करण राजस्थान के जोधपुर वायु सेना स्टेशन पर **26 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026** तक आयोजित किया जाएगा। इसमें कई देशों की वायु सेनाएं अपने लड़ाकू विमानों और दूसरे एयर एसेट्स के साथ हिस्सा लेंगी। 40 से अधिक देशों की भागीदारी या प्रतिनिधित्व की संभावना है, जबकि करीब 8 से 10 देश अपने विमानों के साथ प्रत्यक्ष रूप से अभ्यास में शामिल हो सकते हैं।
पहली बार IAF के साथ सामरिक अभ्यास करेगा F-35
F-35 इससे पहले भारत में आयोजित एयरो इंडिया में दिखाई दे चुका है, लेकिन भारतीय धरती पर किसी सैन्य अभ्यास में इसकी यह पहली भागीदारी होगी। इससे पहले F-35 ने बेंगलुरु में एयरो इंडिया 2023 और 2025 में हिस्सा लिया था।तरंग शक्ति में उसकी भागीदारी इसलिए अलग है क्योंकि यहां विमान केवल प्रदर्शनी का हिस्सा नहीं होगा, बल्कि बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण और सामरिक अभ्यासों में हिस्सा लेगा। इससे भारतीय वायुसेना को पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ प्लेटफॉर्म के साथ प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा।
आशुतोष दीक्षित ने बताई अहमियत
वायु सेना उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने F-35 की भागीदारी के परिचालन महत्व को रेखांकित किया। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय वायुसेना पहली बार F-35 के साथ प्रशिक्षण करेगी। इस दौरान विभिन्न प्रकार के संयुक्त मिशन और सामरिक परिस्थितियों से जुड़े अभ्यास किए जाने की संभावना है।F-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमान की मौजूदगी बहुराष्ट्रीय अभ्यास को अलग तकनीकी आयाम देती है। आधुनिक हवाई युद्ध में स्टील्थ, सेंसर फ्यूजन, नेटवर्क आधारित ऑपरेशन और अलग-अलग प्लेटफॉर्म के बीच डेटा साझा करने की क्षमता महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या खास है F-35 में?
F-35 अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का मल्टीरोल स्टील्थ लड़ाकू विमान है। इसे अमेरिकी कंपनी Lockheed Martin ने विकसित किया है। विमान को कम रडार दृश्यता, उन्नत सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता के लिए जाना जाता है।इस विमान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में स्टील्थ तकनीक शामिल है, जिसे दुश्मन के रडार के लिए विमान का पता लगाना कठिन बनाने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है।F-35 केवल लड़ाकू मिशन तक सीमित नहीं है। इसे खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी, लक्ष्य की पहचान और दूसरे सैन्य प्लेटफॉर्म के साथ जानकारी साझा करने जैसे मिशनों के लिए भी तैयार किया गया है।
IAF उतारेगी अपने प्रमुख लड़ाकू विमान
तरंग शक्ति 2026 में भारतीय वायुसेना भी अपने प्रमुख लड़ाकू और सपोर्ट प्लेटफॉर्म उतारेगी। रिपोर्टों के अनुसार इसमें सुखोई-30MKI, राफेल, मिराज-2000 और स्वदेशी तेजस जैसे लड़ाकू विमान शामिल होने की उम्मीद है। इसके साथ परिवहन विमान, हेलीकॉप्टर और एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम यानी AWACS जैसे प्लेटफॉर्म भी अभ्यास का हिस्सा होंगे।अलग-अलग क्षमताओं वाले विमानों को एक साथ अभ्यास में उतारने से भारतीय वायुसेना को विभिन्न परिस्थितियों में संयुक्त ऑपरेशन का प्रशिक्षण मिलेगा।
फ्रांस का राफेल और UAE का F-16 भी होगा आकर्षण
अमेरिका के F-35 के अलावा फ्रांस के राफेल और संयुक्त अरब अमीरात के F-16 लड़ाकू विमानों के भी अभ्यास में शामिल होने की सूचना है। अमेरिका, फ्रांस, UAE, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, ग्रीस, सिंगापुर, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों की भागीदारी या प्रतिनिधित्व की जानकारी सामने आई है।इससे अभ्यास में अलग-अलग देशों की सैन्य तकनीक और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं के बीच तालमेल का प्रशिक्षण संभव होगा।
इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना प्रमुख उद्देश्य
तरंग शक्ति जैसे बहुराष्ट्रीय अभ्यास का एक प्रमुख उद्देश्य अलग-अलग देशों की वायु सेनाओं के बीच **इंटरऑपरेबिलिटी** बढ़ाना है। आसान भाषा में इसका मतलब है कि अलग-अलग सैन्य प्रणालियों, विमानों और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं वाली वायु सेनाएं जरूरत पड़ने पर एक साथ प्रभावी तरीके से ऑपरेशन कर सकें।इसके लिए मिशन प्लानिंग, संचार, हवाई सुरक्षा, संयुक्त उड़ान और विभिन्न परिचालन परिस्थितियों से जुड़े अभ्यास महत्वपूर्ण होते हैं।तरंग शक्ति भारत को मित्र देशों की वायु सेनाओं के साथ अनुभव साझा करने और अलग-अलग ऑपरेशनल तरीकों को समझने का मंच भी देता है।
2024 में हुआ था पहला तरंग शक्ति
तरंग शक्ति की शुरुआत 2024 में हुई थी। यह भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित बड़े बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यासों में शामिल है। अब इसका दूसरा संस्करण पहले की तुलना में व्यापक स्तर पर आयोजित किया जा रहा है।2026 के संस्करण में बड़ी संख्या में देशों की भागीदारी और आधुनिक लड़ाकू विमानों की मौजूदगी इसे महत्वपूर्ण बनाती है।
वीर गार्जियन के बाद जोधपुर में दूसरा बड़ा अभ्यास
तरंग शक्ति से ठीक पहले जोधपुर में भारत और जापान की वायु सेनाओं के बीच **वीर गार्जियन 2026** अभ्यास आयोजित किया गया। यह अभ्यास 9 से 22 सितंबर तक चला, जिसमें जापान के F-2 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया। जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के प्रमुख जनरल ताकेहिरो मोरिता ने इस दौरान भारतीय तेजस में उड़ान भी भरी।इसके तुरंत बाद जोधपुर एयरबेस तरंग शक्ति 2026 की मेजबानी करेगा। इससे सितंबर और अक्टूबर के दौरान जोधपुर अंतरराष्ट्रीय सैन्य विमानन गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।
पांचवीं पीढ़ी के विमान के साथ प्रशिक्षण का मौका
F-35 की भागीदारी भारतीय वायुसेना के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के साथ प्रत्यक्ष प्रशिक्षण का अवसर होगी। भारत के पास वर्तमान में पांचवीं पीढ़ी का परिचालन लड़ाकू विमान नहीं है और देश अपने स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA कार्यक्रम पर काम कर रहा है।हालांकि किसी सैन्य अभ्यास में F-35 की भागीदारी को भारत द्वारा विमान की खरीद से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। यह बहुराष्ट्रीय अभ्यास में अमेरिकी वायुसेना की परिचालन भागीदारी है।
जोधपुर के आसमान में दिखेगा आधुनिक एयर पावर
26 सितंबर से शुरू होने वाला तरंग शक्ति 2026 भारतीय वायुसेना के लिए बड़े अंतरराष्ट्रीय अभ्यास का मंच होगा। F-35 की पहली सामरिक भागीदारी, फ्रांस के राफेल और अन्य देशों के आधुनिक विमानों की मौजूदगी के कारण इस बार अभ्यास पर विशेष नजर रहेगी।F-35 का भारतीय वायुसेना के साथ पहली बार प्रशिक्षण करना इस अभ्यास का प्रमुख आकर्षण होगा। इससे विभिन्न वायु सेनाओं को एक-दूसरे की परिचालन प्रक्रियाओं को समझने, संयुक्त मिशन का अभ्यास करने और बहुराष्ट्रीय सैन्य समन्वय बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
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