तंजानिया में जन्मे अब्दुर्रज्जाक गरनाह को साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना

तंजानिया में जन्मे अब्दुर्रज्जाक गरनाह को इस साल साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है. 72 साल के गरनाह ने अपने लेख में उस यात्रा का दर्द उड़ेला है जो वह बतौर एक शरणार्थी तमाम जिंदगी करते रहे हैं.उपन्यासकार अब्दुर्रज्जाक गरनाह 35 साल से लिख रहे हैं. लेकिन लिखना उन्होंने चुना नहीं था. यह कुछ ऐसा तो जो उनके साथ जिंदगी की तरह घटा. ठीक उसी तरह जैसे 1948 में अपना देश छोड़कर उन्हें ब्रिटेन में शरण लेनी पड़ी. ब्रिटेन में बसे गरनाह बताते हैं, "यह (लिखना) तो आखरी चीज थी, जो मैं अपने लिए सोचता." गुरुवार को जब उन्हें बताया गया कि उन्हें इस साल का नोबेल पुरस्कार मिला है तो उन्होंने कहा, "मैं बहुत हैरान हूं और बेशक शुक्रगुजार भी." तस्वीरेंः भारत के दो लोगों को ऑल्टरनेटिव नोबेल गरनाह कहते हैं कि उन्हें इस पुरस्कार का मिलना उन विषयों को बहस के लिए ज्यादा मंच देता है, जो उनके उपन्यासों में उठाए गए हैं, मसलन शरणार्थियों का दर्द या साम्राज्यवाद. उन्होंने कहा, "मैं हमेशा इस बारे में सोचता रहता हूं कि ऐसा क्या था जो हमें यहां लेकर आया. वे कौन सी ताकतें और कौन से ऐतिहासिक पल थे, जो हमें यहां लेकर आए." विषयों को मंच मिला उन्हें नोबेल मिला है, यह बात उन्हें अब तक जज्ब नहीं हुई है.





