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तालिबान शासन: अफगानिस्तान के हालात पहले से भी ज्यादा बिगड़े

jantaserishta.com
30 Aug 2022 3:36 PM IST
तालिबान शासन: अफगानिस्तान के हालात पहले से भी ज्यादा बिगड़े
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प्रतीकात्मक तस्वीर | न्यूज़ क्रेडिट: आजतक

नई दिल्ली: तालिबान की अफगानिस्तान सरकार में एंट्री के बाद से ही दुनियाभर के कई देशों की ओर से अफगानिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगी हुई है. जिसका असर अफगानिस्तान पर बड़े स्तर पर देखने को भी मिल रहा है. करीब 60 लाख अफगान लोग भुखमरी की कगार पर हैं और करीब तीन करोड़ 90 लाख लोगों को मानवीय मदद की दरकार है. अगर हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ तो यह और ज्यादा भी बिगड़ सकते हैं.

संयुक्त राष्ट्र की मानवीय मामलों की एजेंसी के प्रमुख मार्टिन ग्रिफिथ्स ने संयुक्त राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में सभी दाताओं से आग्रह करते हुए कहा कि अफगानिस्तान के विकास को लेकर रोकी गई फंडिंग को फिर शुरू कर दिया जाए. उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में करीब 60 लाख लोग भुखमरी की कगार पर हैं.
मार्टिन ग्रिफिथ्स ने बताया कि अफगानिस्तान कई तरह के संकटों से जूझ रहा है, जिसमें मानवीय, आर्थिक, क्लाइमेट, भूख और वित्तीय संकट शामिल हैं. उन्होंने आगे कहा कि आने वाले सर्दी के मौसम को देखते हुए अफगानिस्तान की तुरंत 770 मिलियन डॉलर की मदद की जानी चाहिए.
मार्टिन ग्रिफिथ्स ने आगे कहा कि विवाद, गरीबी, क्लाइमेट और खाने का संकट काफी समय से अफगानिस्तान की दुखद सच्चाई रही है. लेकिन वर्तमान में अफगानिस्तान की विकास सहायता के रुक जाने से और ज्यादा संकट बढ़ गया है. मार्टिन ने आगे कहा कि गरीबी का संकट और ज्यादा गहराता जा रहा है और जनसंख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. मार्टिन ने कहा कि हालात को देखते हुए हमे कुछ डेवलेपमेंट सपोर्ट देना फिर शुरू कर देना चाहिए.
मार्टिन ने बताया कि करीब 3 करोड़ 90 लाख लोग यानी आधे से ज्यादा अफगानिस्तानी लोगों को मानवीय मदद की दरकार है. करीब 60 लाख लोग भुखमरी की कगार पर हैं. उन्होंने आगे बताया कि 10 से ज्यादा बच्चे कुपोषण के संकट में हैं और सही से इलाज नहीं मिलने की वजह से मर सकते हैं.
मार्टिन ने कहा कि सर्दियों के आने से पहले ही अफगानिस्तान के लिए 614 मिलियन डॉलर की अरजेंट जरूरत है. इस फंड से अफगानिस्तान में लोगों के शेल्टरों को रिपेयर और अपग्रेड किया जाना है, साथ ही जरूरतमंद लोगों को गर्म कपड़े और कंबल भी दिए जाने हैं. इसके साथ ही सर्दी शुरू होने से पहले ही कई इलाकों में खाने और अन्य चीजों की सप्लाई के लिए 154 मिलियन डॉलर की अलग जरूरत है.
मार्टिन ग्रिफिथ्स ने आगे कहा कि अफगानिस्तान में 70 फीसदी से ज्यादा लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं. उन्होंने चेताते हुए कहा कि अगर खेती और पशुधन उत्पादन को सुरक्षित नहीं किया गया तो लाखों जिंदगियां रिस्क पर आ जाएंगी.
आपको बता दें कि साल 2021 में तालिबान ने एक बार फिर अफगानिस्तान की सरकार पर कब्जा कर लिया था. तालिबान के कब्जे की काफी संख्या में देशों ने निंदा की थी. जिसके बाद तालिबान को दूसरे देशों की सरकार ने अभी तक औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है. तालिबान के आने से पहले अफगानिस्तान के विकास के लिए जो मदद की जा रही थी, उसपर भी रोक लगा दी गई.


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