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तालिबान ने कैदी को ही बनाया काबुल जेल का प्रभारी, रिहाई से पहले कई महीनों तक था बंद

Neha
15 Sep 2021 6:55 AM GMT
तालिबान ने कैदी को ही बनाया काबुल जेल का प्रभारी, रिहाई से पहले कई महीनों तक था बंद
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इन कैदियों को सजा सुनाने वालीं महिला जज खौफजदा हैं. उन्हें डर है कि रिहा होने के बाद अपराधी उन्हें मौत के घाट उतार सकते हैं.

अफगानिस्तान (Afghanistan) की सत्ता पर काबिज तालिबानी (Taliban) अपनी काबिलियत का सबूत हर रोज दे रहे हैं. अब तालिबानियों ने एक कैदी को जेल का प्रभारी बनाकर बता दिया है कि उनके राज में कानून व्यवस्था कैसी रहने वाली है. काबुल के पूर्वी क्षेत्र में बनी 'पुल-ए-चरखी' जेल कभी कैदियों से भरी होती थी, लेकिन अब यहां सन्नाटा पसरा हुआ है. काबुल पर कब्जे के बाद तालिबान ने सभी कैदियों को रिहा कर दिया है. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि पूर्वी कुनार प्रांत से जिस तालिबान आतंकी को पकड़कर 'पुल-ए-चरखी' जेल लाया गया था, अब उसे ही जेल का प्रभारी बनाया गया है.

Friends ने डाला जेल में डेरा
प्रभारी बनाए गए तालिबानी ने बताया कि उसे यहां आंखों पर पट्टी बांधकर लाया गया था. अब वह अपने कुछ साथियों के साथ जेल की सुरक्षा व्यवस्था देख रहा है. इस प्रभारी तालिबानी के कई दोस्त भी आजकल जेल में डेरा डाले हुए हैं और उसकी उपलब्धि पर खुश हैं. वैसे, कैदियों की रिहाई के बाद से जेल की स्थिति बिल्कुल नहीं बदली है. पानी की बोतलें चप्पलें यहां-वहां बिखरी पड़ी हैं.
गया था Jail के दौरे पर
अपना नाम बताने से इनकार वाले जेल प्रभारी ने न्यूज एजेंसी 'एसोसिएटेड प्रेस' को बताया कि वो हाल ही में अपने दोस्तों के साथ जेल परिसर के निजी दौरे पर गया था. उसे पूर्वी कुनार प्रांत में गिरफ्तार किया गया था और आंखों पर पट्टी बांधकर 'पुल-ए-चरखी' लाया गया था. उसने कहा कि जब मैं उन दिनों को याद करता हूं तो काफी सहम जाता हूं. कैदियों को दुर्व्यवहार और यातना का सामना करना पड़ता था. रिहा होने से पहले उसे लगभग 14 महीने तक जेल में रखा गया था.
'अब बिना किसी डर के आया हूं'
अपने कैद के दिनों को याद करते हुए जेल प्रभारी ने कहा, 'वे दिन मेरे जीवन के सबसे काले दिन थे और अब यह मेरे लिए सबसे खुशी का क्षण है कि मैं स्वतंत्र हूं और बिना किसी डर के यहां आया हूं'. गौरतलब है कि अफगानिस्तान पर कब्जे के साथ ही तालिबान ने जेल में बंद सभी कैदियों को रिहा कर दिया था. वहीं, इन कैदियों को सजा सुनाने वालीं महिला जज खौफजदा हैं. उन्हें डर है कि रिहा होने के बाद अपराधी उन्हें मौत के घाट उतार सकते हैं.


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