
World विश्व: सुसुमु कितागावा, रिचर्ड रॉबसन और उमर एम. याघी को 2025 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार धातु-कार्बनिक ढांचे (MOFs) के विकास के लिए प्रदान किया गया है। इन वैज्ञानिकों ने MOFs की खोज और विकास में अहम योगदान दिया, जो रासायनिक उद्योग, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा भंडारण में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं।
सुसुमु कितागावा ने पहले MOFs के लिए एक नया दृष्टिकोण पेश किया, जो अत्यधिक संवेदनशील होते हैं और गैसों को आकर्षित करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। रिचर्ड रॉबसन और उमर एम. याघी ने इन ढांचों के विकास को आगे बढ़ाया, और विभिन्न प्रकार के MOFs को संश्लेषित किया जो गैसों को अवशोषित करने, पानी की शुद्धता को बढ़ाने और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे हानिकारक गैसों को अवशोषित करने में सहायक हैं।
इन वैज्ञानिकों की खोज ने न केवल रासायनिक शोध में नई दिशा दी, बल्कि ऊर्जा, पर्यावरण और चिकित्सा क्षेत्रों में भी नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। MOFs के विकास ने जलवायु परिवर्तन से लड़ने और ऊर्जा संकट को हल करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।





