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जिनपिंग के भारत दौरे पर सस्पेंस खत्म चीन ने किया कन्फर्म

Ratna Netam
10 Sept 2026 4:14 PM IST
जिनपिंग के भारत दौरे पर सस्पेंस खत्म चीन ने किया कन्फर्म
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नई दिल्ली। BRICS शिखर सम्मेलन से ठीक पहले चीन ने बड़ा ऐलान करते हुए राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि कर दी है। पिछले कई दिनों से शी जिनपिंग की भारत यात्रा को लेकर बना सस्पेंस अब खत्म हो गया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर होने वाली यह यात्रा भारत-चीन संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शी जिनपिंग की यह यात्रा इसलिए भी खास है क्योंकि वह करीब सात साल बाद भारत आ रहे हैं। इससे पहले उनकी भारत यात्रा 2019 में हुई थी। वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख और गलवान घाटी में तनाव के बाद भारत और चीन के संबंधों में भारी गिरावट आई थी। अब दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के बीच शी का नई दिल्ली आना बड़ा कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
पहले चीन ने नहीं खोले थे पत्ते
शी जिनपिंग की यात्रा को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं। भारत में उनके आगमन की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन चीन का विदेश मंत्रालय आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने को तैयार नहीं था।
8 सितंबर को चीन के विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता माओ निंग से पूछा गया था कि भारत में होने वाले BRICS सम्मेलन में चीन का प्रतिनिधित्व कौन करेगा। उन्होंने जवाब दिया था कि चीन BRICS सहयोग को महत्व देता है और भारत द्वारा सम्मेलन के सफल आयोजन का समर्थन करता है, लेकिन प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल पर उस समय साझा करने के लिए कोई जानकारी नहीं है।
इस जवाब के बाद शी जिनपिंग की यात्रा को लेकर सस्पेंस और बढ़ गया था। अब चीन की पुष्टि ने तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है।
12 सितंबर को दिल्ली पहुंच सकते हैं शी
दिल्ली में शी जिनपिंग की यात्रा को लेकर सुरक्षा तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी राष्ट्रपति के 12 सितंबर को नई दिल्ली पहुंचने की संभावना है। उनकी सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
शी जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई बड़े वैश्विक नेता BRICS सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं। पुतिन के 11 सितंबर को भारत पहुंचने की तैयारी है।
चीन और रूस की सुरक्षा टीमें भी पहले ही उन होटलों में पहुंच चुकी हैं जहां दोनों देशों के शीर्ष नेता ठहरेंगे। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के लिए अलग-अलग होटल तय किए गए हैं।
सात साल बाद भारत की धरती पर शी जिनपिंग
शी जिनपिंग की यह करीब सात साल में पहली भारत यात्रा होगी। इसी वजह से BRICS के एजेंडे से अलग भारत-चीन संबंधों पर भी दुनिया की नजर रहेगी।
भारत और चीन के रिश्तों में सबसे बड़ा मोड़ 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद आया था। उस हिंसक झड़प में भारत के 20 और चीन के चार सैनिक मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर लंबे समय तक बातचीत चली।
हाल के समय में दोनों पक्षों ने तनाव कम करने और संबंध सामान्य करने की दिशा में कुछ कदम बढ़ाए हैं। सीधे हवाई संपर्क और वीजा प्रक्रियाओं में भी प्रगति हुई है, लेकिन निवेश, औद्योगिक उपकरणों और कारोबार से जुड़े कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी कायम है।
ऐसे समय में शी की भारत यात्रा संबंधों को आगे बढ़ाने का एक बड़ा मौका बन सकती है।
क्या होगी मोदी और शी की मुलाकात?
अब शी जिनपिंग की यात्रा कन्फर्म होने के बाद सबसे बड़ा सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति के बीच द्विपक्षीय बैठक को लेकर है।
Reuters के मुताबिक मोदी और शी की संभावित मुलाकात पर खास नजर रहेगी। दोनों नेता BRICS सम्मेलन के इतर बातचीत कर सकते हैं और इसमें भारत-चीन संबंधों को स्थिर करने तथा आर्थिक संपर्क बढ़ाने के प्रयासों की समीक्षा होने की संभावना है।
हालांकि चीन की तरफ से शुरुआती पुष्टि के समय द्विपक्षीय बैठक का पूरा कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया गया था। इसलिए औपचारिक शेड्यूल का इंतजार रहेगा।
अगर मोदी और शी आमने-सामने द्विपक्षीय वार्ता करते हैं तो सीमा से लेकर व्यापार तक कई मुद्दे चर्चा में आ सकते हैं।
2025 में मोदी ने दिया था न्योता
शी जिनपिंग को BRICS सम्मेलन के लिए भारत आने का निमंत्रण अचानक नहीं दिया गया था।
31 अगस्त 2025 को चीन के तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी। उस समय दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक गति का स्वागत किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने उसी बैठक में शी को 2026 में भारत की मेजबानी वाले BRICS शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया था।
शी जिनपिंग ने निमंत्रण के लिए मोदी को धन्यवाद दिया था और भारत की BRICS अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन की बात कही थी।
अब एक साल बाद शी इसी सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आ रहे हैं।
BRICS सम्मेलन कब और कहां होगा?
भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। 18वां BRICS शिखर सम्मेलन **12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा**।
भारत की इस साल की BRICS अध्यक्षता की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी गई है। भारत ने इसे मानव-केंद्रित दृष्टिकोण और “Humanity First” की भावना से जोड़ा है।
2026 में भारत ने BRICS अध्यक्ष के रूप में 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकों और उच्चस्तरीय कार्यक्रमों की मेजबानी की है। इनमें राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग और सांस्कृतिक तथा लोगों के बीच संपर्क प्रमुख स्तंभ रहे हैं।
पुतिन से लेकर ईरानी राष्ट्रपति तक होंगे शामिल
नई दिल्ली BRICS सम्मेलन में दुनिया के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी देखने वाली है।
Reuters के मुताबिक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो सम्मेलन में शामिल होंगे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के भी आने का कार्यक्रम है।
यही कारण है कि नई दिल्ली में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।
करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात
BRICS सम्मेलन के दौरान राजधानी दिल्ली में करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की तैयारी है। खासतौर पर चाणक्यपुरी और उन इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है जहां विदेशी राष्ट्राध्यक्ष ठहरेंगे।
होटलों के कर्मचारियों का वेरिफिकेशन किया गया है। राष्ट्रपति जिस फ्लोर पर ठहरेंगे वहां से लेकर होटल की छत और ग्राउंड फ्लोर तक सुरक्षा तैनात की जा रही है।
चीन और रूस की एडवांस सिक्योरिटी टीमें पहले ही दिल्ली पहुंच चुकी हैं। दोनों नेता अपने काफिले में इस्तेमाल होने वाले कुछ वाहन भी विमान से भारत ला सकते हैं।
पश्चिम एशिया संकट पर भी होगी बड़ी परीक्षा
इस बार BRICS सम्मेलन केवल भारत-चीन या भारत-रूस संबंधों के कारण महत्वपूर्ण नहीं है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और ईरान से जुड़े घटनाक्रम ने संगठन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
Reuters के मुताबिक ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तनाव के कारण BRICS के संयुक्त घोषणापत्र के लिए सभी सदस्यों की सहमति हासिल करना आसान नहीं होगा। भारत की कोशिश होगी कि ऐसी भाषा पर सहमति बनाई जाए जिसे सभी सदस्य स्वीकार कर सकें।
तेल की कीमतें और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
BRICS में चीन की मौजूदगी क्यों अहम?
चीन BRICS के सबसे बड़े आर्थिक सदस्यों में शामिल है। ऐसे में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की व्यक्तिगत मौजूदगी भारत की मेजबानी वाले सम्मेलन का राजनीतिक महत्व बढ़ाती है।
पिछले कुछ वर्षों में BRICS का विस्तार भी हुआ है। नए सदस्यों के जुड़ने से संगठन ग्लोबल साउथ की बड़ी आवाज बनने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सदस्य देशों के अलग-अलग रणनीतिक हित आम सहमति बनाने की चुनौती भी पैदा करते हैं।
ऐसे में भारत और चीन जैसे बड़े सदस्य देशों के बीच समन्वय BRICS की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
व्यापारिक रिश्तों पर भी होगी नजर
भारत और चीन के राजनीतिक संबंधों में सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन कारोबारी मोर्चे पर अभी कई बाधाएं मौजूद हैं।
Reuters के मुताबिक दोनों देशों के कारोबारियों को निवेश नियमों, वीजा, औद्योगिक उपकरणों और नियामकीय प्रक्रियाओं से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ चीनी कंपनियों के निवेश प्रस्ताव भारत में कड़ी जांच से गुजरे हैं, जबकि भारतीय पक्ष को चीन से महत्वपूर्ण उपकरणों और मशीनरी की आपूर्ति में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
इसलिए मोदी-शी संवाद में केवल सीमा विवाद ही नहीं बल्कि आर्थिक रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में भी बातचीत महत्वपूर्ण हो सकती है।
चीन की पुष्टि से खत्म हुआ सस्पेंस
कुछ दिन पहले तक हालात बिल्कुल अलग थे। दिल्ली में शी जिनपिंग की सुरक्षा और होटल की तैयारियां हो रही थीं, लेकिन चीन का विदेश मंत्रालय आधिकारिक पुष्टि से बच रहा था।
अब बीजिंग ने साफ कर दिया है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आएंगे और BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
इस पुष्टि के बाद सम्मेलन का कूटनीतिक महत्व और बढ़ गया है। एक ही मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग, व्लादिमीर पुतिन और कई दूसरे प्रमुख नेताओं की मौजूदगी ऐसे समय होगी जब दुनिया पश्चिम एशिया के युद्ध, महंगे कच्चे तेल, व्यापारिक तनाव और बदलते वैश्विक समीकरणों से जूझ रही है।
शी जिनपिंग की सात साल बाद भारत वापसी इस सम्मेलन की सबसे बड़ी कूटनीतिक घटनाओं में से एक होगी। अब अगली नजर इस पर रहेगी कि **मोदी और शी के बीच द्विपक्षीय बैठक का औपचारिक कार्यक्रम क्या रहता है और दोनों नेता सीमा, व्यापार तथा भारत-चीन संबंधों पर कौन सा संदेश देते हैं।**
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