विश्व

इजरायल में सरकार गठन पर सस्पेंस, लिकुड ने चुनावी गड़बड़ी की जांच मांगी

nidhi
29 Oct 2026 6:56 AM IST
इजरायल में सरकार गठन पर सस्पेंस, लिकुड ने चुनावी गड़बड़ी की जांच मांगी
x
नेतन्याहू की पार्टी ने अरब दलों पर लगाए धांधली के आरोप
यरुशलम: इजरायल के संसदीय चुनाव में किसी भी प्रमुख राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। शुरुआती मतगणना के आधार पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का खेमा विपक्ष से आगे है, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या से पीछे है। दूसरी ओर, अरब बहुल पार्टियों के मजबूत प्रदर्शन ने उन्हें संभावित रूप से निर्णायक स्थिति में पहुंचा दिया है। इसी बीच नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने अरब दलों पर चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।
इजरायल की 120 सदस्यीय संसद नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं। बुधवार रात तक लगभग 90 प्रतिशत मतों की गिनती के आधार पर नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलने का अनुमान था। पूर्व सैन्य प्रमुख और याशर पार्टी के नेता गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को 48 सीटें मिलती दिखाई दे रही थीं। अरब बहुल दलों राम और जॉइंट लिस्ट को संयुक्त रूप से 19 सीटें मिलने की संभावना है। ये आंकड़े अभी अंतिम परिणाम नहीं हैं।
बहुमत तक पहुंचने की चुनौती
मौजूदा रुझानों ने दोनों प्रमुख खेमों के सामने गठबंधन विस्तार की चुनौती खड़ी कर दी है। नेतन्याहू का गठबंधन अनुमानित तौर पर बहुमत से आठ सीट पीछे है। विपक्षी खेमे को भी अपने दम पर सरकार बनाने लायक समर्थन नहीं मिल रहा। ऐसे में अब राजनीतिक बातचीत, सहयोग के नए विकल्प और अलग-अलग पार्टियों की शर्तें महत्वपूर्ण होंगी। लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनती दिखाई दे रही है, लेकिन अकेले सबसे बड़ा दल होने से सरकार गठन सुनिश्चित नहीं होता। प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने के लिए पर्याप्त संसदीय समर्थन जुटाना जरूरी होगा। मतगणना पूरी होने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल चुनावी मुकाबला किसी एक खेमे की निर्णायक जीत के बजाय लंबी राजनीतिक बातचीत की ओर बढ़ता दिख रहा है।
लिकुड ने जांच एजेंसियों से कार्रवाई मांगी
लिकुड ने बुधवार को जारी बयान में अरब पार्टियों पर रिश्वत, धमकी, हिंसा, फर्जीवाड़े और मतदाताओं को सक्रिय करने के लिए प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के आरोप लगाए। पार्टी ने पुलिस, आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट और केंद्रीय चुनाव समिति से शिकायतों की जांच करने को कहा है। पार्टी का दावा है कि उसने संबंधित अधिकारियों को बड़ी संख्या में गवाहियां और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई है। हालांकि, शिकायत सौंपना आरोपों के साबित होने के समान नहीं है। केंद्रीय चुनाव समिति ने कहा कि लिकुड की शिकायत की समीक्षा चुनावी शुचिता से संबंधित नियमित प्रक्रिया के तहत की जा रही है। समिति इस प्रक्रिया में अन्य दलों की शिकायतों और परिणामों में संभावित त्रुटियों से जुड़े आवेदनों को भी देखती है।
धांधली के आरोपों की पुष्टि नहीं
अनादोलु एजेंसी ने इजरायली अखबार ‘इजरायल हयोम’ की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि पुलिस को लिकुड के आरोपों के समर्थन में साक्ष्य नहीं मिले हैं। रिपोर्ट में अनाम सूत्रों के आधार पर कहा गया कि केंद्रीय चुनाव समिति को भी उस समय मतदान की विश्वसनीयता पर चिंता जताने का आधार नहीं दिखा। चुनाव समिति की ओर से व्यवस्थित तरीके से मतपत्रों में हेरफेर के संकेत नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। व्यक्तिगत शिकायतों को अलग से देखा जा रहा है। इसलिए चुनावी गड़बड़ी को फिलहाल लिकुड का आरोप ही माना जाना चाहिए। शिकायतों की समीक्षा और अंतिम परिणाम सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
अरब पार्टियों की भूमिका पर नजर
अरब दलों की संभावित 19 सीटें सरकार गठन के समीकरण में अहम हो सकती हैं। हालांकि, सीटों का गणित मिलना और राजनीतिक सहमति बनना अलग-अलग चुनौतियां हैं। आइजनकोट तथा उनके कई सहयोगी चुनाव प्रचार के दौरान अरब पार्टियों के साथ साझेदारी को लेकर विरोध जता चुके हैं। जॉइंट लिस्ट के नेता यूसुफ जबरीन ने नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए विपक्ष के साथ सहयोग की इच्छा जताई है। हालांकि, उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों में सीधे सरकारी गठबंधन में शामिल होने की संभावना से दूरी बनाई। उधर, विपक्षी खेमे के वामपंथी नेता याइर गोलान ने अरब दलों के साथ सहयोग का समर्थन किया है। इससे विपक्ष के भीतर भी आगे की रणनीति पर चर्चा तेज होने के संकेत हैं।
राष्ट्रपति ने दोबारा चुनाव टालने की अपील की
राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने राजनीतिक दलों से सरकार गठन की बातचीत में खुले मन से शामिल होने का आग्रह किया है। उन्होंने एक और चुनाव से बचने के लिए हर संभव प्रयास करने की जरूरत बताई। आधिकारिक परिणाम मिलने के बाद राष्ट्रपति विभिन्न संसदीय दलों से विचार-विमर्श करेंगे। इसके बाद सरकार बनाने का जिम्मा सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अभी सैनिकों और राजनयिकों सहित विशेष श्रेणियों के मतपत्रों की गिनती का असर अंतिम आंकड़ों पर पड़ सकता है। इसलिए वर्तमान अनुमान के आधार पर किसी खेमे की सरकार बनना तय नहीं माना जा सकता। यदि दल पर्याप्त समर्थन पर सहमत नहीं हुए, तो राजनीतिक गतिरोध लंबा खिंचने और दोबारा चुनाव की संभावना बनी रहेगी।
Next Story