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ताइपे। ताइवान में आगामी स्थानीय चुनावों से पहले साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। ताइवान के राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो (NSB) ने चेतावनी दी है कि सरकारी नेटवर्क पर साइबर हमलों और संदिग्ध ऑनलाइन प्रभाव अभियानों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई महीने में ताइवान के गवर्नमेंट सर्विस नेटवर्क (GSN) पर 18.56 करोड़ साइबर हमले दर्ज किए गए। यह संख्या वर्ष के शुरुआती तीन महीनों में दर्ज कुल हमलों से भी अधिक है। सुरक्षा एजेंसी ने आशंका जताई है कि इन गतिविधियों का संबंध 28 नवंबर को होने वाले स्थानीय चुनावों को प्रभावित करने की कोशिशों से हो सकता है।
जुलाई में रिकॉर्ड 18.56 करोड़ साइबर हमले
जापानी और अंतरराष्ट्रीय समाचार माध्यमों के बीच ताइवान के स्थानीय अखबार 'द ताइपे टाइम्स' की रिपोर्ट में साइबर हमलों के चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं।रिपोर्ट के अनुसार, जून और जुलाई के बीच संदिग्ध साइबर गतिविधियों में तेजी दर्ज की गई। राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो ने बताया कि सितंबर तक सरकारी सेवा नेटवर्क को प्रतिदिन औसतन 25.8 लाख हमलों का सामना करना पड़ रहा था।जुलाई में दर्ज 18.56 करोड़ साइबर हमलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।अधिकारियों का कहना है कि सरकारी डिजिटल सेवाओं पर लगातार हो रहे हमले संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यों के लिए खतरा बन सकते हैं।
28 नवंबर को होने हैं स्थानीय चुनाव
ताइवान में 28 नवंबर 2026 को स्थानीय निकायों के चुनाव आयोजित किए जाएंगे। इन चुनावों को 'नाइन-इन-वन' चुनाव कहा जाता है, क्योंकि इनमें स्थानीय प्रशासन के विभिन्न पदों के लिए मतदान होता है।चुनाव आयोग के अनुसार, करीब 1.965 करोड़ मतदाता चुनाव में भाग लेने के पात्र हैं। इस दौरान स्थानीय प्रशासन के 11,051 पदों के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव किया जाएगा।चुनावों से पहले साइबर हमलों में बढ़ोतरी को राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो गंभीरता से देख रहा है। एजेंसी का मानना है कि इन गतिविधियों के माध्यम से संवेदनशील सूचनाएं जुटाने और जनमत प्रभावित करने का प्रयास किया जा सकता है।
चीन पर चुनावी हस्तक्षेप की आशंका
ताइवान के राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि साइबर हमलों के पीछे चीन से जुड़े समूहों की भूमिका होने की आशंका है।एजेंसी ने इस संभावना से इनकार नहीं किया कि बीजिंग आगामी स्थानीय चुनावों में हस्तक्षेप करने के उद्देश्य से साइबर गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा हो।हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह साबित नहीं होता कि जुलाई में दर्ज प्रत्येक साइबर हमला चीन से संचालित किया गया था।चीन पहले भी ताइवान के चुनावों में हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज कर चुका है।ताइवान और चीन के बीच लंबे समय से राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी तनाव बना हुआ है। बीजिंग ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है, जबकि ताइवान की वर्तमान सरकार इस दावे को स्वीकार नहीं करती।
पहले भी सामने आए करोड़ों साइबर हमले
राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो के अनुसार, पिछले वर्ष भी ताइवान के सरकारी नेटवर्क पर कई बार साइबर हमलों में अचानक तेजी देखी गई थी।रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले वर्ष अप्रैल में लगभग 10 करोड़ और मई में करीब 30 करोड़ हमले दर्ज किए गए थे।वहीं नवंबर में ताइवान की उपराष्ट्रपति शियाओ बी-खिम की यूरोप यात्रा के दौरान करीब 20 करोड़ साइबर हमले दर्ज होने की जानकारी दी गई थी।सुरक्षा एजेंसी का मानना है कि महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं के आसपास साइबर गतिविधियों में बढ़ोतरी का यह पैटर्न विशेष निगरानी की मांग करता है।
सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं का खतरा
साइबर हमलों के अलावा ताइवान की सुरक्षा एजेंसी ने सोशल मीडिया पर संदिग्ध सूचना अभियानों को लेकर भी चेतावनी जारी की है।जनवरी से सितंबर 2026 के बीच संदिग्ध सोशल मीडिया खातों से 25 लाख से अधिक विवादित या संदिग्ध सूचनाएं प्रसारित होने की पहचान की गई।यह संख्या पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले लगभग 48 प्रतिशत अधिक है।एजेंसी के अनुसार, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, राष्ट्रीय रक्षा और चुनावी उम्मीदवारों से जुड़े मुद्दों पर भ्रामक सामग्री प्रसारित किए जाने का खतरा है।इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार वीडियो, ऑडियो, फर्जी सर्वेक्षण और सोशल मीडिया खातों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई गई है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बढ़ रही चुनौती
ताइवान की खुफिया एजेंसी ने चेतावनी दी है कि साइबर हमलों में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।एआई के माध्यम से डिजिटल सिस्टम की कमजोरियों की पहचान, संभावित लक्ष्यों की तलाश और दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर तैयार करने जैसी गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।अधिकारियों के अनुसार, सरकारी संस्थानों के अलावा दूरसंचार, शिक्षा और रक्षा उद्योग से जुड़े संगठनों को भी निशाना बनाए जाने की आशंका है।
चुनाव से पहले सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
ताइवान के राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो ने आगामी चुनावों को देखते हुए विदेशी हस्तक्षेप और साइबर खतरों की निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया है।एजेंसी का उद्देश्य सरकारी नेटवर्क की सुरक्षा मजबूत करना, संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों की पहचान करना और चुनावी प्रक्रिया को बाहरी प्रभाव से सुरक्षित रखना है।फिलहाल साइबर हमलों के पीछे जिम्मेदार पक्षों की पूरी पहचान और उनके उद्देश्य की जांच जारी है। ऐसे में 28 नवंबर के चुनाव से पहले ताइवान की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था और सूचना तंत्र पर विशेष नजर बनी हुई है।
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