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सरकार पर सुधार का दबाव बढ़ा
पेरिस: फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को देशभर में हजारों छात्र सड़कों पर उतरे। पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने स्कूलों के बाहर अवरोध लगाए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, गुरुवार को देशभर में 71,500 लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया, जबकि राजधानी पेरिस में करीब 24,500 लोग सड़कों पर उतरे। इसी दौरान 375 स्कूल पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहे अथवा प्रभावित हुए।
खराब शैक्षणिक व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर छात्र
फ्रांस में यह आंदोलन सितंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू हुआ था। छात्र स्कूलों में शिक्षकों की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाओं, खराब भवनों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर नाराज हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई स्कूलों में कक्षाएं पर्याप्त शिक्षकों के बिना संचालित हो रही हैं। कुछ जगहों पर भवनों की स्थिति खराब है और छात्रों को पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। छात्रों की मांग है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराए, शिक्षकों की नियुक्ति करे और स्कूलों की स्थिति सुधारे। लंबे स्कूल समय और पढ़ाई के बढ़ते दबाव को लेकर भी विरोध जताया जा रहा है। आंदोलन अब तीसरे सप्ताह में पहुंच चुका है और कई शहरों में इसे समर्थन मिल रहा है।
पेरिस में स्कूल के बाहर बैरिकेडिंग, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले
गुरुवार को पेरिस के उत्तर-पूर्वी इलाके में स्थित हेलेन बुशे हाईस्कूल के बाहर छात्रों ने कचरे के डिब्बे लगाकर रास्ता अवरुद्ध कर दिया। पुलिस ने बैरिकेड हटाने और रास्ता खाली कराने के लिए कार्रवाई की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। राजधानी के अन्य इलाकों में भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और शिक्षकों के साथ मारपीट की घटनाएं भी सामने आईं। अधिकारियों ने हिंसा और तोड़फोड़ की निंदा की है, जबकि छात्र संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। इस तरह आंदोलन में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी मांगों के साथ पुलिस की भूमिका भी प्रमुख मुद्दा बन गई है।
375 स्कूल प्रभावित, हजारों लोग प्रदर्शन में शामिल
फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, 8 अक्टूबर को 375 स्कूल पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहे अथवा प्रदर्शन के कारण प्रभावित हुए। इससे पहले आंदोलन के दौरान सैकड़ों स्कूलों में कक्षाएं बाधित होने और स्कूल परिसरों में अवरोध लगाए जाने की खबरें आ चुकी हैं। देशव्यापी प्रदर्शनों में 71,500 लोगों की भागीदारी दर्ज की गई। इनमें से 24,500 लोग अकेले पेरिस में प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलन की व्यापकता को देखते हुए सरकार पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ रहा है।
सरकार ने दिया कार्रवाई का भरोसा
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकॉर्नू ने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर प्रतिक्रिया देने के लिए मंत्रियों को अक्टूबर के अंत तक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। शिक्षा मंत्री एडुआर गेफ्रे ने भी अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रदर्शनकारी इन आश्वासनों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि केवल घोषणाओं से समस्याएं हल नहीं होंगी। उनकी मांग है कि स्कूलों में कर्मचारियों की कमी दूर की जाए, भवनों की मरम्मत कराई जाए और शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विवाद
प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने के बाद फ्रांस सरकार ने स्टन ग्रेनेड के इस्तेमाल को निलंबित कर दिया है। इससे पहले एक किशोर के गंभीर रूप से घायल होने की घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली की आलोचना तेज हुई थी। हालांकि, प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कुछ स्थानों पर आंसू गैस का इस्तेमाल जारी रखा। फिलहाल फ्रांस में छात्र आंदोलन खत्म होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। छात्र संगठनों ने मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रस्तावित कार्ययोजना और स्कूलों में होने वाले सुधारों पर आंदोलन की दिशा निर्भर करेगी।
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