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साल 2020 में अंतरिक्ष से लाए गए थे रयुगु ऐस्टरॉइड के कुछ नमूने, अब खोले कई बडे़ रहस्य

Neha Dani
22 Dec 2021 10:42 AM GMT
साल 2020 में अंतरिक्ष से लाए गए थे रयुगु ऐस्टरॉइड के कुछ नमूने, अब खोले कई बडे़ रहस्य
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शोधकर्ताओं का कहना है कि ये वाष्पशील बाहरी सौर मंडल में उत्पन्न होने की संभावना है।

वैज्ञानिकों को पिछले साल कुछ बेहद दुर्लभ अंतरिक्ष चट्टानों के नमूने मिले थे। इसमें सबसे खास था पृथ्वी के निकट मौजूद ऐस्टरॉइड 162173 रयुगु, जिसकी 5.4 ग्राम सामग्री वैज्ञानिकों को मिली थी। इसे 6 दिसंबर 2020 को जापानी स्पेस एजेंस के हायाबुसा-2 स्पेसक्राफ्ट की मदद से अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लाया गया था। वैज्ञानिकों ने नेचर एस्ट्रोनॉमी में प्रकाशित शोध में अब इन खोजों का विवरण दिया है।

यह खोज हमारी समझ को मजबूत करती है कि रयुगु ऐस्टरॉइड कैसा दिखता था। हीरे के आकार की अंतरिक्ष चट्टान उम्मीद से ज्यादा काली और ज्यादा छिद्रों वाली है। यह खोज यह समझने में भी मदद कर सकती है कि क्या कभी इस तरह के ऐस्टरॉइड पृथ्वी के लिए खतरा बन सकते हैं। इस चट्टान में कुछ अस्थिर तत्व भी मौजूद हैं, जो सुझाव देते हैं कि रयुगु बाहरी सौर मंडल से सामग्री को भी संरक्षित करता है।
सिर्फ दो फीसदी प्रकाश को करते हैं परावर्तित
इसका मतलब है कि वैज्ञानिकों के पास उनकी लैब में सौर मंडल के शुरुआती समय से संबंधित कुछ सबसे प्राचीन चीजें भी मौजूद हैं। पहले पेपर, 'जब हायाबुसा-2 नमूनों के साथ सी-टाइप ऐस्टरॉइड रयुगु से लौटा', में वैज्ञानिकों ने ज्यादातर रयुगु की संरचना को लेकर अपनी कुछ पुरानी भविष्यवाणियों की पुष्टि की लेकिन इसमें कुछ अप्रत्याशित नतीजे भी शामिल थे। रयुगु के नमूने अपनी ओर आने वाले प्रकाश के सिर्फ 2 फीसदी भाग को ही परावर्तित करते हैं।
दूसरे उल्कापिंडों की तुलना में 50 फीसदी ज्यादा छेद वाला
यह असाधारण रूप से नाजुक भी है क्योंकि यह पृथ्वी पर गिरे कार्बनयुक्त चोंड्राइट उल्कापिंडों की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक छिद्रों वाला है। शोधकर्ताओं ने कहा कि पृथ्वी पर पाए जाने वाले किसी भी उल्कापिंड में इस तरह की उच्च-सूक्ष्मता सामग्री की खोज नहीं की गई है। दूसरे पेपर का शीर्षक 'माइक्रोमेगा हाइपरस्पेक्ट्रल माइक्रोस्कोप की मदद से रयुगु नमूनों की पहली जांच' है जिसमें रयुगु नमूने के रासायनिक विश्लेषण का विवरण दिया गया है
चट्टान में विभिन्न प्रकार के वाष्पशील कार्बनिक यौगिक मौजूद हैं। इनमें ऑक्सीजन से बने गैर-पानी के अणु और हाइड्रॉक्सिल के रूप में जाने वाले हाइड्रोजन परमाणु शामिल हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये वाष्पशील बाहरी सौर मंडल में उत्पन्न होने की संभावना है।

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