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बाजार में जल्द आएगी स्मार्ट पिस्टल, जानिए क्या है खासियत

Janta Se Rishta Admin
15 Jan 2022 10:35 AM GMT
बाजार में जल्द आएगी स्मार्ट पिस्टल, जानिए क्या है खासियत
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अमेरिकी बाजारों में जल्द ही एक स्मार्ट पिस्टल (Smart Pistols) लॉन्च होने जा रही है. इस स्मार्ट गन को खास तरीके से डिजाइन किया गया है. इस पिस्टल में सेक्योरिटी कोड के साथ फिंगरप्रिंट सेंसर का इस्तेमाल किया गया है. जब निशानेबाज एक विशेष रिंग पहनकर बंदूक को हाथ से पकड़ेगा तो सिक्योरिटी कोड अनलॉक हो जाएगा, जिसके बाद पिस्टल से फायर किया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक अमेरिकी आर्म्स मार्केट में ये पिस्टल जल्द ही बिक्री के लिए उपलब्ध हो सकती है. इस पिस्टल को लेकर लोगों की अलग-अलग राय है. कुछ लोग इसे बच्चों या खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलने की बात कह रहे हैं तो वहीं कुछ इसके हैकिंग को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं.

टॉम हॉलैंड की कंपनी स्मार्टगंज (SmartGunz) पिस्टल में आरएफआईडी चिप्स (RFID Chips) का उपयोग करेगी. ये ठीक उसी तरह से रिंग में इस्तेमाल किया गया है जैसे कई लोग अपनी कार में टोल भुगतान करने के लिए उपयोग करते हैं. चिप्स रिंग के अंदर लगे होंगे. जब कोई इस रिंग को पहनकर गन को पकड़ेगा तो सेक्योरिटी कोड अनलॉक हो जाएगा और इसके जरिए फायर किया जा सकेगा. ये पिस्टल उनके लिए काफी अच्छा साबित हो सकता है जो सुरक्षित गन चाहते हैं और जिन्हें लगता है कि उन्हें अपनी संपत्ति को लेकर सुरक्षा की जरुरत है.

स्मार्ट गन की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं हैं. उदाहरण के लिए, क्या उन्हें हैक किया जा सकता है? इनमें से अधिकतर स्मार्ट गन फायरिंग की अनुमति देने के लिए फिंगरप्रिंट अनलॉकिंग या रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान का उपयोग करेंगी. गन में एक चिप उपयोगकर्ता द्वारा रिंग या ब्रेसलेट में पहनी जाने वाली दूसरी चिप के साथ प्रभावी ढंग से संचार करती है. फिलहाल स्मार्टगंज की तकनीक का परीक्षण कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा भी किया जा रहा है. साथ ही संयुक्त राज्य अमेरिका में कुछ पुलिस द्वारा इस पिस्टल का टेस्ट किया जा रहा है. अप्रैल या मई तक नागरिकों को भी ब्रिकी के लिए उपलब्ध हो सकती है.

अमेरिका में ज्यादातर घरों में लोग गन रखते हैं. यहां अक्सर गन फायरिंग की घटनाएं भी सामने आते रहती है. लॉडस्टार वर्क्स (LodeStar Works) के सह-संस्थापक जिंजर चांडलर (Ginger Chandler) को उम्मीद है कि इससे बंदूक (Gun) से संबंधित दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी, खासकर उन मामलों में जहां बच्चे अपने माता-पिता की गन को अपने हाथ में लेकर दूसरों या खुद को चोट पहुंचाने की कोशिश करते हैं.

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