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Alien दुनिया का पता लगाएंगे छोटे से बॉक्स के आकार के सैटेलाइट

Gulabi
25 Sept 2021 5:57 PM IST
Alien दुनिया का पता लगाएंगे छोटे से बॉक्स के आकार के सैटेलाइट
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बॉक्स के आकार के सैटेलाइट

एक छोटे से बॉक्स के आकार के सैटेलाइट (Box Size Sattelite) को इस महीने अंतरिक्ष (Space) में भेजा जाएगा. चार मिलियन डॉलर (लगभग 30 करोड़ रुपये) के इस सैटेलाइट का काम 'हॉट जूपिटर' (Hot Jupiters) के नाम से जाने जाने वाले एक्सोप्लैनेट्स का पता लगाना है. इन एक्सोप्लैनेट्स में वो ग्रह भी शामिल है, जो अभी तक ढूंढा गया सबसे गर्म ग्रह है.

इस सैटेलाइट को 'कोलोराडो अल्ट्रावायलेट ट्रांजिट एक्सपेरिमेंट' (CUTE) के तौर पर जाना जाता है. ये एक क्यूब सैटेलाइट (CubeSat) है, जो एक्सोप्लैनेट्स की खोज में सात महीने का मिशन चलाएगी. ये NASA द्वारा फंड किया गया पहला क्यूबसेट मिशन है, जो एक्सोप्लैनेट्स का पता लगाने और इस टेक्नोलॉजी की काबिलियत को जांचने के लिए किया जाएगा.
कोलोराडो यूनिवर्सिटी बोल्डर लेबोरेटरी फॉर एटमॉस्फेरिक एंड स्पेस फिजिक्स (LASP) के रिसर्चर और प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर केविन फ्रांस ने कहा, ये एक प्रयोग है, जिसे NASA ये देखने के लिए कर रहा है कि आखिर एक छोटे सैटेलाइट के जरिए कितनी जानकारी इकट्ठा की जा सकती है.
CubeSat 27 सितंबर को कैलिफोर्निया (California) के लोम्पोक में वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस (Vandenberg Space Force Base) से लैंडसैट 9 सैटेलाइट के साथ एक यूनाइटेड लॉन्च एलायंस एटलस वी रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में जाएगा.
अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के मुताबिक, हॉट जूपिटर ग्रह (Hot Jupiter planets) गैसों से भरे हुए विशालकाय ग्रह हैं, जो अपने तारे के करीब चक्कर लगाते हैं. ऐसे ग्रहों का एक उदाहरण KELT-9b है, जिसे जून 2017 में खोजा गया था. इसका तापमान 7,800 डिग्री फारेनहाइट है और ये अपने तारे का चक्कर लगाने में डेढ़ दिन का वक्त लेता है.
KELT-9b का ये नाम 'किलोडिग्री एक्सट्रीम्ली लिटिल टेलीस्कोप' (KELT) सिस्टम के नाम पर रखा गया, क्योंकि KELT ने इस ग्रह का 2017 में पता लगाया था. KELT-9b अब तक खोजा गया सबसे ग्रह ग्रह है और ये पृथ्वी से 670 प्रकाशवर्ष दूर स्थित है.
मिशन को तैयार करने में मदद करने वाले LASP की ग्रेजुएट छात्र एरिका इगन ने कहा, CubeSat का एक प्रमुख उद्देश्य है. और वो है इन गर्म और गैसीय एलियन दुनियाओं के वातावरण का अध्ययन करना. CubeSat का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के मिशनों के लिए किया गया है. इसमें सूर्य की गतिविधि को देखना और दूर की आकाशगंगाओं में सुपरनोवा को का पता लगाना शामिल है.
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