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चीन-अमेरिका के रिश्तों में नरमी के संकेत, दोनों देश एक-दूसरे के मीडियाकर्मियों पर प्रतिबंधों में ढील देने पर जताई सहमति

Renuka Sahu
17 Nov 2021 4:35 AM GMT
चीन-अमेरिका के रिश्तों में नरमी के संकेत, दोनों देश एक-दूसरे के मीडियाकर्मियों पर प्रतिबंधों में ढील देने पर जताई सहमति
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फाइल फोटो 

चीन और अमेरिका दोनों पक्षों के संबंधों में मामूली नरमी के बीच दोनों देश एक-दूसरे के मीडियाकर्मियों पर प्रतिबंधों में ढील देने पर सहमत हो गए हैं।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। चीन और अमेरिका दोनों पक्षों के संबंधों में मामूली नरमी के बीच दोनों देश एक-दूसरे के मीडियाकर्मियों पर प्रतिबंधों में ढील देने पर सहमत हो गए हैं। आधिकारिक चाइना डेली अखबार ने बुधवार को कहा कि चीनी नेता शी चिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच मंगलवार को हुई पहली वर्चुअल द्विपक्षीय बैठक से पहले यह समझौता हुआ।

चाइना डेली ने कहा कि समझौते के तहत, अमेरिका चीनी मीडियाकर्मियों को एक साल का मल्टीपल एंट्री वीजा जारी करेगा और इसको लेकर सभी प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी नीतियों के प्रभाव में आने के बाद चीन अमेरिकी पत्रकारों के साथ समान व्यवहार करेगा और दोनों पक्ष कानूनों और विनियमों के आधार पर मीडियाकर्मियों के लिए वीजा जारी करेंगे।
मंगलवार देर रात द एसोसिएटेड प्रेस को दिए एक बयान में विदेश विभाग ने कहा कि चीन अमेरिकी पत्रकारों के एक समूह के लिए वीजा जारी करने के लिए प्रतिबद्ध है बशर्ते वे सभी तय कानूनों और विनियमों के तहत पात्र हों। बयान में कहा गया कि हम उन (चीनी) पत्रकारों को भी वीजा जारी करेंगे, जो अमेरिकी कानून के तहत वीजा के लिए पात्र हैं। इसके साथ ही चीन अमेरिकी मीडियाकर्मियों के वीजा अवधी को 90 दिनों से एक वर्ष तक वैध करने के लिए भी तैयार है।
पीपुल्स रिपब्लिक आफ चाइना का जिक्र करते हुए विदेश विभाग के बयान में कहा गया है कि पारस्परिक आधार पर हम पीआरसी पत्रकारों को जारी किए गए अमेरिकी वीजा की वैधता को एक साल तक बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों पक्ष मल्टीपल एंट्री वीजा पर सहमत हुए हैं।
बीते साल अमेरिका ने चीनी राज्य मीडिया कर्मियों को जारी किए गए वीजा की संख्या सीमित कर दी थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया था। इसके जवाब में चीन ने अमेरिकी आउटलेट्स के लिए काम करने वाले पत्रकारों को निष्कासित कर दिया था और देश में काम करना जारी रखने वालों के लिए शर्तों को कड़ा कर दिया था।

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