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नई दिल्ली। जॉर्डन में चर्च पर हुए जानलेवा हमले की भारत ने कड़ी निंदा की है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को जॉर्डन के करक प्रांत में एक चर्च में अंतिम संस्कार के दौरान बंदूकधारियों ने गोलीबारी की, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई और 34 अन्य घायल हो गए। इस घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे जघन्य और कायरतापूर्ण कृत्य करार देते हुए पीड़ितों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। भारत ने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए इस मुश्किल घड़ी में जॉर्डन की सरकार और वहां के लोगों के साथ एकजुटता जताई है।
भारत ने हमले को बताया जघन्य और कायरतापूर्ण
विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि भारत 23 अक्टूबर को जॉर्डन के करक में चर्च पर हुए हमले की कड़ी निंदा करता है। मंत्रालय ने घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत इस कठिन समय में जॉर्डन के हाशमाइट साम्राज्य की सरकार और वहां के मित्रवत लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है। भारत ने आतंकवाद के सभी रूपों और प्रकारों से मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।नई दिल्ली का यह बयान धार्मिक स्थलों और आम नागरिकों पर होने वाली हिंसा के प्रति भारत के विरोध को भी रेखांकित करता है।
अंतिम संस्कार के दौरान चर्च में हुई गोलीबारी
जॉर्डन के करक प्रांत के हमूद गांव में स्थित ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च में यह हमला उस समय हुआ, जब वहां अंतिम संस्कार की प्रक्रिया चल रही थी। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, हमलावर वाहन से पहुंचे और चर्च परिसर के आसपास गोलीबारी शुरू कर दी।घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाने और हमलावरों की तलाश का अभियान शुरू किया।जॉर्डन के सार्वजनिक सुरक्षा निदेशालय के प्रमुख ने बताया कि हमले में सात लोगों की मौत हुई और 34 लोग घायल हुए। इनमें से कई घायलों को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
हमलावरों की तलाश में जुटीं सुरक्षा एजेंसियां
हमले के बाद जॉर्डन की सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने बताया कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।जॉर्डन के आंतरिक मंत्री माजेन अल-फराया ने शुरुआती जानकारी में हमले के पीछे चरमपंथी तत्वों के शामिल होने की बात कही। हालांकि, किसी विशेष संगठन की जिम्मेदारी की तत्काल पुष्टि नहीं हुई थी।जांच एजेंसियां घटना से जुड़े सुराग जुटा रही हैं। अधिकारियों ने हमले के पीछे की मंशा और संभावित नेटवर्क का पता लगाने पर भी जोर दिया है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी जताया दुख
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।भारत की ओर से संवेदना व्यक्त करना जॉर्डन के साथ द्विपक्षीय संबंधों और आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ कार्रवाई और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा की वकालत करता रहा है।
आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता दोहराई
विदेश मंत्रालय के बयान में भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के सभी रूपों और प्रकारों के खिलाफ उसकी नीति दृढ़ है। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि हिंसा के जरिए निर्दोष लोगों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है।चर्च जैसे धार्मिक स्थलों पर हमले न केवल लोगों की जान लेते हैं, बल्कि समुदायों के बीच सुरक्षा और विश्वास की भावना को भी प्रभावित करते हैं। ऐसे मामलों में दोषियों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाना महत्वपूर्ण माना जाता है।
जॉर्डन में सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
जॉर्डन को क्षेत्र के अपेक्षाकृत स्थिर देशों में गिना जाता है, इसलिए चर्च पर हुआ यह हमला विशेष चिंता का विषय बन गया है। घटना के बाद वहां सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक स्थलों की निगरानी को लेकर सवाल उठे हैं।अधिकारियों ने हमले की जांच जारी रखी है। फिलहाल किसी संगठन ने घटना की जिम्मेदारी नहीं ली थी। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही हमले की पूरी परिस्थितियों और इसके पीछे के कारणों पर स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।भारत ने इस दुखद घटना पर जॉर्डन के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को फिर से रेखांकित किया है।
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