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अमेरिका का बदला रुख पाकिस्तान को झटका ईरान मुद्दे के बीच बढ़ी हलचल
Ratna Netam
29 Aug 2026 4:23 PM IST

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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिका के रुख पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के उस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया, जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर को **“भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा”** बताया। इस बयान पर भारत में इसे सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा गया, जबकि पाकिस्तान ने इसका विरोध किया।
मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में कुछ समय से नजदीकी बढ़ी है। वहीं, ईरान के मुद्दे पर पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी की खबरों ने दक्षिण एशिया की कूटनीति को और दिलचस्प बना दिया है।
अमेरिका का कश्मीर पर पुराना रुख क्या रहा है?
कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका की नीति पिछले कई दशकों में बदलती रही है। शुरुआत में अमेरिका इसे भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद के रूप में देखता था और कई बार बातचीत की जरूरत पर जोर देता था। शीत युद्ध के दौर में पाकिस्तान अमेरिका का रणनीतिक साझेदार था, जिसके कारण वाशिंगटन का झुकाव कई मामलों में इस्लामाबाद के करीब माना जाता था।
समय के साथ भारत-अमेरिका संबंध मजबूत हुए। खासकर 1999 के कारगिल युद्ध के बाद अमेरिका का रुख बदलता नजर आया और उसने नियंत्रण रेखा (LoC) के सम्मान तथा द्विपक्षीय समाधान पर ज्यादा जोर दिया।
बाद के वर्षों में अमेरिका लगातार यही कहता रहा कि भारत और पाकिस्तान को कश्मीर सहित सभी मुद्दों का समाधान बातचीत से करना चाहिए।
सर्जियो गोर के बयान को क्यों माना जा रहा अहम?
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान कहा कि यह **“भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा”** है। यह बयान इसलिए चर्चा में आया क्योंकि अमेरिकी राजनयिक आमतौर पर कश्मीर को लेकर संतुलित और सावधानी भरी भाषा का इस्तेमाल करते रहे हैं।
राजनयिक विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में शब्दों का बहुत महत्व होता है। किसी क्षेत्र को लेकर इस्तेमाल की गई भाषा किसी देश की सोच और प्राथमिकताओं का संकेत दे सकती है। हालांकि, इसे अमेरिका की आधिकारिक नीति में बड़ा बदलाव मानना अभी जल्दबाजी होगी।
पाकिस्तान ने क्यों जताई नाराजगी?
सर्जियो गोर के बयान के बाद पाकिस्तान ने इसका विरोध किया। इस्लामाबाद ने कहा कि यह बयान अमेरिका के पुराने रुख से अलग है और उसने अमेरिकी राजनयिक के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय विवाद के रूप में पेश करता रहा है, जबकि भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न हिस्सा है और इससे जुड़े मुद्दे पूरी तरह द्विपक्षीय हैं।
ईरान मुद्दे से कैसे जुड़ रहा है पाकिस्तान?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच पाकिस्तान ने कुछ मौकों पर मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश की है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की ईरान यात्रा और अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर भी चर्चा हुई।
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ईरान पर दबाव बनाने की नीति अपना रहा है और ऐसे समय में पाकिस्तान की ईरान के साथ सक्रिय कूटनीति अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण भी है और चुनौती भी।
हालांकि यह कहना मुश्किल है कि केवल ईरान मुद्दे के कारण अमेरिका ने कश्मीर पर अपना रुख बदला है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में फैसले कई रणनीतिक कारणों से प्रभावित होते हैं।
क्या अमेरिका ने सच में बदली नीति?
विशेषज्ञों का मानना है कि सर्जियो गोर का बयान महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसे औपचारिक नीति परिवर्तन नहीं कहा जा सकता। अमेरिका अब भी भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता की बात करता है।
भारत के साथ अमेरिका के संबंध पिछले वर्षों में रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में काफी मजबूत हुए हैं। वहीं पाकिस्तान भी अमेरिका के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बना हुआ है।
ट्रंप की विदेश नीति का असर
डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति को अक्सर लेन-देन आधारित और रणनीतिक हितों पर केंद्रित माना जाता है। ट्रंप प्रशासन अलग-अलग देशों के साथ संबंधों को अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से देखता है।
दक्षिण एशिया में अमेरिका के लिए भारत एक बड़ा आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है, जबकि पाकिस्तान सुरक्षा और क्षेत्रीय मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। इसलिए अमेरिका दोनों देशों के साथ संतुलन बनाने की कोशिश करता है।
भारत के लिए क्या मायने?
भारत के नजरिए से जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिकी राजदूत का बयान कूटनीतिक रूप से सकारात्मक संदेश माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत अपनी स्थिति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत तरीके से पेश करने में सफल रहा है।
हालांकि, भारत हमेशा से कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार नहीं की जाएगी।
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