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ब्राजील में चुनावी मुकाबला दूसरे दौर में

Kavita2
5 Oct 2026 10:06 AM IST
ब्राजील में चुनावी मुकाबला दूसरे दौर में
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ब्रासीलिया। ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को पहले दौर में आवश्यक बहुमत नहीं मिलने के बाद अब मुकाबला दूसरे दौर में पहुंच गया है। मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो 25 अक्टूबर को होने वाले रनऑफ में आमने-सामने होंगे। लगभग सभी मतों की गिनती के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो को करीब 47 प्रतिशत और लूला को लगभग 45 प्रतिशत वोट मिले। ब्राजील में पहले दौर में जीत के लिए 50 प्रतिशत से अधिक वैध मत हासिल करना जरूरी है।

पहले दौर के नतीजों में फ्लावियो बोल्सोनारो का प्रदर्शन चुनाव पूर्व कई सर्वेक्षणों के अनुमान से बेहतर रहा। मतदान से पहले कुछ प्रमुख सर्वेक्षणों में लूला को पहले दौर में बढ़त दिखाई गई थी, लेकिन मतगणना के बाद बोल्सोनारो मामूली बढ़त के साथ आगे रहे। अब दोनों उम्मीदवारों को दूसरे दौर के लिए फिर से चुनाव प्रचार करना होगा।

80 वर्षीय लूला वर्कर्स पार्टी के नेता हैं और चौथी बार, गैर-लगातार कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर 45 वर्षीय फ्लावियो बोल्सोनारो ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। वह सीनेटर हैं और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी माने जाते हैं। यही वजह है कि ब्राजील के इस चुनाव में घरेलू मुद्दों के साथ अमेरिका और ट्रंप के साथ संबंध भी चर्चा में हैं।

पहले दौर के चुनाव प्रचार में अपराध, महंगाई, भ्रष्टाचार, सार्वजनिक कर्ज और जीवनयापन की बढ़ती लागत जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। ब्राजील में बेरोजगारी और असमानता के कुछ संकेतकों में सुधार के बावजूद महंगाई, घरेलू कर्ज और अपराध को लेकर मतदाताओं की चिंताएं बनी हुई हैं। फ्लावियो बोल्सोनारो ने इन्हीं मुद्दों को अपने प्रचार में प्रमुखता दी, जबकि लूला ने अपनी सरकार की सामाजिक योजनाओं और आर्थिक उपलब्धियों को सामने रखा।

अपराध का मुद्दा चुनावी अभियान में खास तौर पर चर्चा में रहा। फ्लावियो बोल्सोनारो ने अपराध के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का समर्थन किया है। उनके चुनावी प्रस्तावों में संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कठोर कदम उठाने जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं। दूसरी ओर लूला सरकार को भी अपराध और सुरक्षा से जुड़े सवालों का सामना करना पड़ा है।

भ्रष्टाचार भी चुनावी बहस के केंद्र में रहा। दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों को अलग-अलग आरोपों और विवादों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में दूसरे दौर में भ्रष्टाचार और राजनीतिक जवाबदेही का मुद्दा और तेज होने की संभावना है। चुनाव प्रचार में दोनों पक्ष एक-दूसरे के राजनीतिक रिकॉर्ड को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

ब्राजील के चुनाव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी बार-बार सामने आया है। फ्लावियो बोल्सोनारो की ट्रंप से राजनीतिक नजदीकी और अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर उनका रुख उन्हें लूला से अलग करता है। लूला की विदेश नीति अमेरिका के साथ संबंध बनाए रखने के साथ चीन समेत अन्य वैश्विक शक्तियों से संबंधों में रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर देती रही है। वहीं बोल्सोनारो खेमा अमेरिका के साथ अधिक करीबी संबंधों का समर्थक माना जाता है।

ब्राजील और अमेरिका के संबंध चुनाव के दौरान इसलिए भी चर्चा में रहे क्योंकि व्यापार और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद और बातचीत होती रही है। फ्लावियो बोल्सोनारो ने अमेरिका के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की बात कही है। लूला ने दूसरी ओर ब्राजील की संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति को अपने चुनाव प्रचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।

पहले दौर के परिणाम के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो ने इसे बदलाव की इच्छा का संकेत बताया। वहीं लूला ने अपने समर्थकों से कहा कि दूसरे दौर के लिए नया अभियान शुरू होगा और वह मतदाताओं के सामने अपनी सरकार के कामकाज को रखेंगे। दोनों नेताओं की प्रतिक्रियाओं से साफ है कि अगले तीन सप्ताह ब्राजील में जोरदार चुनाव प्रचार देखने को मिलेगा।

पहले दौर से पहले आए सर्वेक्षण भी बताते थे कि दूसरे दौर का मुकाबला करीबी हो सकता है। एक अक्टूबर को जारी Datafolha सर्वेक्षण में काल्पनिक दूसरे दौर में लूला को 48 प्रतिशत और फ्लावियो बोल्सोनारो को 45 प्रतिशत समर्थन मिला था। हालांकि दो प्रतिशत के मार्जिन ऑफ एरर के कारण सर्वेक्षण ने मुकाबले को तकनीकी रूप से बेहद करीबी बताया था। वास्तविक पहले दौर के परिणाम में बोल्सोनारो ने सर्वेक्षणों की अपेक्षा बेहतर प्रदर्शन किया।

अब दूसरे दौर में उन मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी जिन्होंने पहले दौर में अन्य उम्मीदवारों को वोट दिया था। दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के अभियान ऐसे मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश करेंगे। हालांकि दूसरे दौर के अंतिम परिणाम को लेकर अभी कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

ब्राजील की चुनावी व्यवस्था के मुताबिक राष्ट्रपति पद के लिए किसी उम्मीदवार को पहले दौर में 50 प्रतिशत से अधिक वैध मत हासिल करना जरूरी होता है। ऐसा नहीं होने पर सबसे अधिक वोट पाने वाले दो उम्मीदवार दूसरे दौर में पहुंचते हैं। इस बार यही स्थिति बनी है और 25 अक्टूबर को लूला तथा फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच अंतिम मतदान होगा।

ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और करीब 21.4 करोड़ की आबादी वाला देश है। इस कारण राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों का प्रभाव केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। अमेरिका और चीन के साथ ब्राजील के रिश्ते, क्षेत्रीय कूटनीति, अमेजन संरक्षण, व्यापार और आर्थिक नीतियों पर भी अगली सरकार के फैसलों का असर पड़ेगा।

पहले दौर में करीब 15.9 करोड़ लोग मतदान के पात्र थे। चुनाव अधिकारियों के अनुसार मतदान प्रक्रिया सामान्य रूप से संपन्न हुई और बड़े स्तर पर किसी गंभीर अनियमितता की सूचना नहीं मिली। ब्राजील लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रणाली का इस्तेमाल करता रहा है।

अब 25 अक्टूबर का दूसरा दौर तय करेगा कि ब्राजील में लूला को एक और कार्यकाल मिलता है या फ्लावियो बोल्सोनारो राष्ट्रपति पद तक पहुंचते हैं। फिलहाल दोनों खेमों के सामने पहले दौर में दूसरे उम्मीदवारों को मिले वोटों के बीच अपना समर्थन बढ़ाने की चुनौती है। अपराध, भ्रष्टाचार, अर्थव्यवस्था, महंगाई और अमेरिका के साथ संबंध अगले चरण के चुनाव प्रचार में प्रमुख मुद्दे बने रहने की संभावना है।

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