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दिल्ली में होगा एससीओ का सांस्कृतिक संवाद
नई दिल्ली: भारत ने शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ के सभ्यतागत संवाद मंच में शामिल होने के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत एवं संस्कृति मंत्री औरंगजेब खान खिची को निमंत्रण भेजा है। कार्यक्रम नवंबर में नई दिल्ली में प्रस्तावित है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव के बाद किसी वरिष्ठ पाकिस्तानी मंत्री को भारत बुलाने का यह पहला ऐसा निमंत्रण है। हालांकि, पाकिस्तान ने मंत्री की भागीदारी पर अभी अंतिम फैसला नहीं किया है।
यह आमंत्रण एससीओ के सांस्कृतिक और सभ्यतागत संवाद कार्यक्रम के लिए है। इसे सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन का निमंत्रण नहीं समझा जाना चाहिए। भारत ने मंच के लिए संगठन के सभी सदस्य देशों को बुलाया है। अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में स्पष्ट किया गया है कि बहुपक्षीय कार्यक्रम में पाकिस्तान को आमंत्रित करना अपने आप दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों में बदलाव का संकेत नहीं है।
पाकिस्तानी मंत्री की यात्रा अभी तय नहीं
पाकिस्तान को न्योता भेजे जाने और उसके प्रतिनिधि की यात्रा निश्चित होने के बीच अंतर है। फिलहाल औरंगजेब खान खिची के दिल्ली आने की पुष्टि नहीं हुई है। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय निमंत्रण पर विचार कर रहा है। आंतरिक परामर्श के बाद भागीदारी का निर्णय लिया जाना है। यदि पाकिस्तान शामिल होता है, तो उसका प्रतिनिधित्व किस स्तर पर होगा, यह भी स्पष्ट होना बाकी है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, खिची के आने की स्थिति में मई 2023 के बाद किसी पाकिस्तानी मंत्री की यह पहली भारत यात्रा होगी। उस समय पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए गोवा आए थे। वर्तमान निमंत्रण संस्कृति मंत्री को भेजा गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस यात्रा के दौरान किसी अलग द्विपक्षीय बैठक की घोषणा नहीं की गई है।
सभ्यतागत संवाद मंच का क्या है उद्देश्य?
प्रस्तावित मंच का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत, कला, साहित्य और सभ्यतागत संबंधों पर संवाद बढ़ाना है। इसके माध्यम से लोगों के बीच संपर्क तथा सांस्कृतिक सहयोग के अवसर तलाशे जाएंगे। यह एससीओ के व्यापक सहयोग ढांचे का हिस्सा है, जिसमें सुरक्षा और क्षेत्रीय मुद्दों के अलावा सांस्कृतिक संपर्क भी शामिल हैं। इसलिए इस कार्यक्रम का विषय सामान्य राजनीतिक वार्ता से अलग है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान इस पहल का प्रस्ताव रखा था। बाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान के दुशांबे में एससीओ शासनाध्यक्षों की बैठक में भारत की मेजबानी की जानकारी दी। आयोजन में संस्कृति मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की साझेदारी बताई गई है।
कार्यक्रम की तारीख पर रिपोर्टों में अंतर
मनीकंट्रोल और द ट्रिब्यून ने कार्यक्रम की अवधि 20 से 22 नवंबर बताई है, जबकि एबीपी और जनसत्ता की रिपोर्टों में 20-21 नवंबर का उल्लेख है। इसलिए विस्तृत कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। सभी रिपोर्टों में आयोजन नवंबर में नई दिल्ली में होने और पाकिस्तानी संस्कृति मंत्री को निमंत्रण दिए जाने की बात समान रूप से सामने आई है। कार्यक्रम में एससीओ के दस सदस्य देशों के संस्कृति मंत्रियों के साथ अन्य आमंत्रित प्रतिनिधियों की भागीदारी की संभावना है। संगठन के सदस्यों में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान, बेलारूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। किसी देश को निमंत्रण भेजे जाने का अर्थ यह नहीं कि उसका मंत्री अनिवार्य रूप से पहुंचेगा। अंतिम प्रतिनिधिमंडलों की जानकारी संबंधित देशों की स्वीकृति के बाद स्पष्ट होगी।
तनावपूर्ण रिश्तों के बीच बहुपक्षीय संपर्क
भारत और पाकिस्तान के संबंधों में पिछले वर्ष के सैन्य टकराव के बाद तनाव बना हुआ है। अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने मई में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और जवाबी कार्रवाई हुई। इस पृष्ठभूमि में पाकिस्तानी मंत्री को निमंत्रण कूटनीतिक ध्यान आकर्षित कर रहा है, लेकिन इसे व्यापक संबंध सुधार की घोषणा मानने का आधार नहीं है। बहुपक्षीय संगठनों में भागीदारी और अलग से द्विपक्षीय वार्ता दो अलग प्रक्रियाएं हैं। एससीओ के कार्यक्रम में सदस्य देश संगठन के तय विषयों पर एक मंच पर आते हैं। किसी प्रतिनिधि की उपस्थिति से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि दोनों देशों के बीच लंबित विवादों पर बातचीत शुरू हो गई है। वर्तमान मामले में निमंत्रण का घोषित संदर्भ सभ्यतागत और सांस्कृतिक संवाद है।
पहले भी एससीओ के तहत हुए हैं संपर्क
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बावजूद एससीओ की बैठकों में आधिकारिक भागीदारी होती रही है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर अक्टूबर 2024 में संगठन की शासनाध्यक्षों की बैठक के लिए इस्लामाबाद गए थे। हाल में भारत के एससीओ राष्ट्रीय समन्वयक आलोक डिमरी ने भी इस्लामाबाद में समन्वयकों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। अब नजर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और प्रस्तावित कार्यक्रम की अंतिम रूपरेखा पर रहेगी। यदि पाकिस्तानी मंत्री भाग लेते हैं, तो यह एससीओ के ढांचे में एक महत्वपूर्ण मंत्रीस्तरीय संपर्क होगा। फिलहाल स्पष्ट स्थिति यही है कि भारत ने निमंत्रण भेजा है, पाकिस्तान की स्वीकृति बाकी है और किसी द्विपक्षीय वार्ता का ऐलान नहीं हुआ है।
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