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ADDAN अदन। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने गुरुवार को सऊदी अरब की दक्षिणी क्षेत्रों (खासकर हदरमौत और अल-महरा प्रांतों) में तनाव कम करने की अपील का समर्थन किया है। यह फैसला साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) की हालिया सैन्य गतिविधियों के बीच आया है, जिसने इन प्रांतों पर कब्जा कर लिया है और हूती-विरोधी गठबंधन में दरार डाल दी है। राज्य समर्थित सबा न्यूज एजेंसी के मुताबिक, यमनी सरकार ने हद्रामौत और अल-महरा प्रांतों में हाल के घटनाक्रमों के प्रति सऊदी अरब के स्पष्ट, संतुलित और जिम्मेदार रुख का स्वागत किया।
सरकार ने चेतावनी दी कि राज्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर और प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (पीएलसी) से इतर कोई भी सैन्य कार्रवाई "तनाव का एक अस्वीकार्य स्रोत" मानी जाएगी। सऊदी विदेश मंत्रालय ने 25 दिसंबर को बयान जारी कर एसटीसी की कार्रवाई को "एकतरफा" और "अनुचित" बताया, जो यमनी हितों को नुकसान पहुंचा रही है। सऊदी ने एसटीसी से तत्काल और व्यवस्थित तरीके से बलों की वापसी की मांग की। एक संयुक्त सऊदी-यूएई प्रतिनिधिमंडल 12 दिसंबर को अदन पहुंचा था, जो तनाव कम करने के लिए बातचीत कर रहा है।
एसटीसी ने इन प्रांतों में स्थानीय बलों की भर्ती का विस्तार जारी रखा, लेकिन सऊदी-यूएई प्रयासों के बावजूद अभी तक कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ। एसटीसी दक्षिण यमन की स्वतंत्रता चाहता है। रियाद ने घोषणा की कि एक संयुक्त सऊदी-अमीराती सैन्य प्रतिनिधिमंडल अदन पहुंचा है ताकि एसटीसी के साथ मिलकर इलाकों से अपनी सेनाओं को व्यवस्थित तरीके से हटाया जाए। 3 दिसंबर को तनाव तब बढ़ गया जब एसटीसी बलों ने सरकार समर्थक इकाइयों के साथ झड़पों के बाद हद्रामौत पर कब्जा कर लिया था। उन पर 'मुस्लिम ब्रदरहुड' से संबंध बनाए रखने का आरोप लगाया गया। एसटीसी ने पीएलसी की भी आलोचना की कि वह हूती समूह के खिलाफ कोई गंभीर अभियान शुरू करने में नाकाम रहा है।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, इसके बाद एसटीसी बलों ने बिना किसी विरोध के अल-महराह में अपना विस्तार किया और यमनी सरकार और सऊदी अरब की ओर से बार-बार तनाव कम करने की अपील के बावजूद, दोनों प्रांतों में स्थानीय बलों की भर्ती की है। यमन में 2014 से जारी गृहयुद्ध में हूती विद्रोहियों (ईरान समर्थित) ने उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया था, जबकि सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार (अब प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल—पीएलसी) का समर्थन करता है। एसटीसी (यूएई समर्थित) 2017 में गठित हुआ और दक्षिण यमन की स्वतंत्रता की मांग करता है।
2022 में एसटीसी को पीएलसी में शामिल किया गया था, लेकिन हाल ही में (दिसंबर 2025 की शुरुआत में) एसटीसी ने हदरमौत और अल-महरा पर कब्जा कर लिया, जहां 80 प्रतिशत तेल भंडार हैं। एसटीएस ने इसे "सुरक्षा मजबूत करने" के रूप में जस्टिफाई किया, लेकिन सऊदी अरब ने इसे "अनुचित वृद्धि" कहा।
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